इंदौर में दिग्विजय सिंह के ‘विवादित बोल’: दुपट्टे पर ‘ॐ नमः शिवाय’ देख भड़के दिग्गी राजा, पूछा- कामरेड का इससे क्या लेना-देना?
इंदौर: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह अपने बयानों और अनूठे राजनीतिक अंदाज को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। शनिवार को इंदौर के दौरे पर आए दिग्विजय सिंह ने एक मुलाकात के दौरान धार्मिक प्रतीक और राजनीतिक विचारधारा को लेकर ऐसा सवाल पूछ लिया, जिसकी चर्चा अब पूरे प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में तेज हो गई है।
रेसिडेंसी कोठी पर हुई दिलचस्प मुलाकात
दरअसल, इंदौर प्रवास के दौरान दिग्विजय सिंह शहर के रेसिडेंसी कोठी पर ठहरे हुए थे। यहाँ उनसे शिष्टाचार भेंट करने के लिए कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के पुराने कार्ड होल्डर और इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) के पूर्व उपाध्यक्ष राजेश शर्मा पहुंचे थे। राजेश शर्मा जब दिग्विजय सिंह से मिलने कमरे में दाखिल हुए, तो उन्होंने अपने गले में एक विशेष दुपट्टा (स्कार्फ) डाल रखा था।
‘ॐ नमः शिवाय’ देखते ही टोक पड़े दिग्गी राजा
राजेश शर्मा ने जैसे ही दिग्विजय सिंह का अभिवादन किया, वैसे ही पूर्व मुख्यमंत्री की नजर उनके गले में लटके दुपट्टे पर चली गई। उस दुपट्टे पर ‘ॐ नमः शिवाय’ का धार्मिक संदेश लिखा हुआ था।
कम्युनिस्ट पार्टी की नास्तिक या धर्म-निरपेक्ष छवि और सामने ‘ॐ नमः शिवाय’ का यह विरोधाभास देखकर दिग्विजय सिंह खुद को रोक नहीं पाए। उन्होंने तुरंत तंज कसते हुए सवाल दाग दिया— “इस ‘ॐ नमः शिवाय’ से कामरेड (कम्युनिस्ट पार्टी) का क्या लेना-देना?”
राजेश शर्मा ने दिया ये जवाब
दिग्विजय सिंह के इस सवाल पर वहां मौजूद लोग मुस्कुराने लगे। इस पर कम्युनिस्ट नेता राजेश शर्मा ने भी सहजता से जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि वह वामपंथी विचारधारा से जरूर जुड़े हैं, लेकिन धार्मिक प्रतीकों और आस्था का सम्मान अपनी जगह है। हालांकि, इस बेहद छोटे से संवाद और दिग्विजय सिंह के इस चुटीले सवाल ने अब इंदौर की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ बयान
जैसे ही यह वाकया कोठी से बाहर निकलकर आया, भाजपा और अन्य राजनीतिक विश्लेषकों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी है। कुछ लोग इसे दिग्विजय सिंह का एक सामान्य मजाकिया लहजा बता रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर इसे वामपंथियों की सनातन आस्था पर दिग्गी राजा का एक बड़ा कटाक्ष माना जा रहा है।


