वोट चोरी’ मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंची ‘INDIA’ गठबंधन की याचिका अटकी; रजिस्ट्री ने निकालीं 14 तकनीकी खामियां
नई दिल्ली:
चुनाव आयोग की वोटर लिस्ट संशोधन प्रक्रिया (Special Intensive Revision – SIR) और कथित ‘वोट चोरी’ के खिलाफ विपक्षी गठबंधन (INDIA bloc) की कानूनी मुहिम को शुरुआती चरण में ही एक बड़ा तकनीकी झटका लगा है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित 11 शीर्ष विपक्षी नेताओं द्वारा दायर संयुक्त रिट याचिका को सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने सुनवाई के लिए लिस्ट करने से रोक दिया है.
रजिस्ट्री द्वारा की गई आधिकारिक स्क्रूटनी के दौरान इस याचिका में 14 गंभीर प्रक्रियात्मक और दस्तावेजी खामियां (Procedural Defects) पाई गई हैं. नियमों के मुताबिक, जब तक विपक्ष की लीगल टीम इन कमियों को दुरुस्त (Cure) नहीं कर लेती, तब तक इस मामले को अदालत के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया जाएगा.
रजिस्ट्री द्वारा रेखांकित की गईं मुख्य 14 खामियां
सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा जारी आपत्तियों में बुनियादी दस्तावेजों से लेकर वित्तीय शुल्क तक की कई गंभीर त्रुटियां शामिल हैं. मुख्य कमियों का विवरण नीचे दिया गया है:
- कोर्ट फीस में कमी: याचिका दायर करने के लिए आवश्यक तय कानूनी शुल्क में ₹220 की कमी पाई गई है.
- धुंधला पहचान पत्र: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का जो आईडी कार्ड संलग्न किया गया है, उसकी फोटोकॉपी बेहद अस्पष्ट और अपठनीय है.
- वकालतनामा गायब: संयुक्त याचिका में शामिल 11 नेताओं में से 9 याचिकाकर्ताओं के हस्ताक्षरित वकालतनामे (कानूनी अधिकार पत्र) गायब हैं.
- निजी प्रतिवादी बनाने पर आपत्ति: संविधान के अनुच्छेद 32 (Article 32) के तहत दायर इस रिट याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों को व्यक्तिगत तौर पर प्राइवेट रिस्पॉन्डेंट क्यों बनाया गया, इस पर स्पष्टीकरण मांगा गया है.
- अधूरे और फीके पन्ने: याचिका के साथ जोड़े गए सहायक दस्तावेजों के कुछ पन्ने गायब हैं, कुछ का फॉन्ट बहुत छोटा है और कई पन्नों का टेक्स्ट पढ़ने योग्य नहीं है.
- पुराने फैसलों की प्रतियों का अभाव: याचिका में जिन पुराने अदालती फैसलों और निर्वाचन आयोग के पूर्व निर्णयों का हवाला दिया गया है, उनकी आधिकारिक कॉपियां साथ नहीं लगाई गई हैं.
- नंबरिंग और फॉर्मेटिंग की त्रुटियां: दस्तावेजों की पेज नंबरिंग में गड़बड़ी है और दो विशिष्ट दस्तावेजों की रंगीन कॉपियां (Coloured Copies) जमा नहीं की गई हैं.
विपक्ष की याचिका और मुख्य मांगें क्या हैं?
केंद्रीय दिल्ली में विपक्षी नेताओं द्वारा किए गए व्यापक ‘मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ प्रदर्शन के बाद यह याचिका शीर्ष अदालत में दाखिल की गई थी. विपक्ष ने याचिका के माध्यम से मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें उठाई हैं:
- स्वतंत्र ऑडिट: सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में तकनीकी विशेषज्ञों और प्रतिष्ठित नागरिकों की एक स्वतंत्र समिति गठित की जाए, जो SIR प्रक्रिया के तहत वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों का समयबद्ध ऑडिट करे.
- दस्तावेज सार्वजनिक करना: चुनाव आयोग द्वारा स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के संबंध में लिए गए सभी निर्णयों और रिकॉर्ड्स को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए.
- प्रक्रिया पर अंतरिम रोक: जब तक इस स्वतंत्र कमेटी द्वारा सभी शिकायतों का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक चल रही SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाई जाए.
आगे का क्या है कानूनी कदम?
लीगल एक्सपर्ट्स के अनुसार, रजिस्ट्री द्वारा कमियां निकाला जाना एक सामान्य प्रक्रियात्मक हिस्सा है. विपक्षी गठबंधन की लीगल टीम इन सभी 14 आपत्तियों को दूर करने के काम में जुट गई है.
सभी त्रुटियों को सुधारने, नए स्पष्ट वकालतनामे जोड़ने और ₹220 की शेष अदालती फीस जमा करने के बाद याचिका को दोबारा रजिस्ट्री के पास क्लियरेंस के लिए भेजा जाएगा. इसके बाद ही कोर्ट इस संवेदनशील विषय पर सुनवाई के लिए कोई तारीख (Listing Date) तय करेगा.


