सराफा नाइट चाट-चौपाटी के दुकानदारों को मिली बड़ी राहत; मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नगर निगम की चयनात्मक कार्रवाई को अनुचित ठहराया, हटाए गए सभी छोटे वेंडर्स फिर लगा सकेंगे दुकान।
इंदौर:
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने इंदौर की विश्व प्रसिद्ध सराफा नाइट चाट-चौपाटी को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने नगर निगम द्वारा की गई चयनात्मक कार्रवाई को पूरी तरह से निरस्त करते हुए उन सभी याचिकाकर्ता दुकानदारों को बड़ी राहत दी है, जिन्हें पिछले दिनों हटा दिया गया था। कोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि नगर निगम या किसी भी व्यापारिक एसोसिएशन को चौपाटी में दुकानों की संख्या मनमाने ढंग से सीमित करने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है।
निगम का 80 दुकानों का फॉर्मूला हुआ फेल
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने नगर निगम के उस कदम को चुनौती दी थी, जिसमें चौपाटी में दुकानों की संख्या को केवल 80 तक सीमित कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने निगम के इस फैसले को अनुचित और मनमाना माना। कोर्ट ने कहा कि किसी भी छोटे व्यापारी को बिना किसी ठोस लिखित आदेश या सुनवाई के हटाना उनके संविधान प्रदत्त आजीविका के मौलिक अधिकार का हनन है।
“जिसका ओटला, उसका अधिकार”
माननीय न्यायालय ने फैसले में सबसे अहम टिप्पणी करते हुए साफ किया कि सराफा बाजार में रात के समय कौन सी दुकान लगेगी और कौन सी नहीं, इसका फैसला केवल उस संबंधित दुकान (ओटले) का मालिक ही कर सकता है। एसोसिएशन की सूची के आधार पर किसी भी वैध वेंडर को हटाना पूरी तरह से गलत है। कोर्ट ने अब नगर निगम को निर्देश दिए हैं कि हटाए गए दुकानदारों को दुकान मालिकों की सहमति के आधार पर दोबारा अपना व्यवसाय शुरू करने की तुरंत अनुमति दी जाए। इस फैसले के बाद सराफा के छोटे व्यापारियों में खुशी की लहर है।


