देशभर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की धूम देखने को मिल रही है। भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य उत्सव पर देश के कोने-कोने से लेकर विदेशों तक में भक्तों का उत्साह चरम पर है। कान्हा की जन्मभूमि मथुरा से लेकर गुजरात के तटों और राजस्थान के नाथद्वारा तक, हर तरफ सिर्फ ‘जय कन्हैया लाल की’ की गूंज सुनाई दे रही है। इस पावन अवसर पर देश के अलग-अलग हिस्सों से भक्ति और तकनीक का एक अनूठा संगम देखने को मिला है।
मथुरा में 15 लाख भक्तों ने किया कान्हा का दीदार
भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा में इस बार आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि सारे रिकॉर्ड टूट गए। जिला प्रशासन और मंदिर समितियों के अनुमान के मुताबिक, जन्मोत्सव के मुख्य दिन करीब 15 लाख से अधिक श्रद्धालु मथुरा-वृंदावन पहुंचे।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान के मुख्य मंदिर में जैसे ही रात के ठीक 12 बजे कान्हा का प्राकट्य हुआ, पूरा परिसर शंखध्वनि, घंटों की आवाज और ‘नंद के आनंद भयो…’ के जयकारों से गुंजायमान हो गया। ठाकुरजी का दूध, दही, घी, शहद और बुरादे से महाअभिषेक किया गया। भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से सुरक्षा और रूट डायवर्जन के कड़े इंतजाम किए गए थे।
गुजरात में 300 ड्रोन से आसमान में सजी कृष्ण लीला
गुजरात में इस बार जन्माष्टमी के मौके पर परंपरा के साथ आधुनिक तकनीक का भी अद्भुत नजारा देखने को मिला। यहां आयोजित एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम में 300 से अधिक आधुनिक ड्रोन्स ने आसमान में उड़ान भरी।
इन ड्रोन्स ने रात के अंधेरे में आसमान को अपनी सतरंगी लाइटों से जगमगा दिया और भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न बाल लीलाओं की आकृतियां बनाईं। आसमान में कभी माखन चुराते कान्हा, कभी कालिया नाग का मर्दन करते श्याम, तो कभी गोवर्धन पर्वत उठाए गिरिधारी की छवि दिखाई दी। इस विहंगम दृश्य को देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग मौजूद थे।
नाथद्वारा में गूंजी 21 तोपों की सलामी
राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित प्रसिद्ध पुष्टिमार्गीय संप्रदाय के प्रधान पीठ, श्रीनाथजी मंदिर (नाथद्वारा) में जन्माष्टमी का त्योहार पूरी राजसी परंपरा के साथ मनाया गया।
यहाँ जैसे ही भगवान के जन्म का समय हुआ, वैसे ही परंपरा के अनुसार कान्हा के स्वागत में 21 तोपों की सलामी दी गई। तोपों की गर्जना के साथ ही पूरा नाथद्वारा कस्बा ‘श्रीजी’ की भक्ति में सराबोर हो गया। मंदिर में भगवान को विशेष छप्पन भोग लगाया गया और महाआरती उतारी गई, जिसके दर्शन के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालु पहुंचे थे।
देशभर में मटकी फोड़ की धूम
इन मुख्य आयोजनों के अलावा देश के अन्य राज्यों, विशेषकर महाराष्ट्र में दही-हंडी (मटकी फोड़) उत्सव की भारी धूम रही। जगह-जगह गोविंदाओं की टोलियां ऊंचे-ऊंचे पिरामिड बनाकर मटकी फोड़ते नजर आईं।


