Thursday, October 8, 2026

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MP Teacher Scam: फर्जी डिग्री पर 20 साल से नौकरी कर रहे 51 शिक्षकों पर FIR के आदेश, ₹100 करोड़ से अधिक वेतन की होगी रिकवरी

इंदौर। मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। इंदौर जिले के सांवेर विकासखंड में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों (D.Ed और B.Ed) के आधार पर पिछले 20 वर्षों से सरकारी नौकरी कर रहे 51 शिक्षकों पर अब कानूनी शिकंजा कस गया है। इंदौर के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) शौर्य मल्होत्रा ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी संबंधित संकुल प्राचार्यों को इन आरोपियों के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज कराने के लिखित निर्देश जारी कर दिए हैं।

20 वर्षों में लिया 100 करोड़ से ज्यादा का वेतन

जांच रिपोर्ट के अनुसार, ये शिक्षक वर्ष 2006-2007 में तत्कालीन शिवराज सिंह चौहान सरकार के कार्यकाल के दौरान संविदा शाला शिक्षक के रूप में भर्ती हुए थे। पिछले दो दशकों में इन शिक्षकों ने सरकारी खजाने से वेतन और भत्तों के रूप में लगभग 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि उठाई है। विभाग अब इन सभी शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने के साथ-साथ उनसे इस पूरी राशि की रिकवरी (वसूली) करने की ठोस तैयारी कर रहा है।

ऐसे खुला महाघोटाले का राज

इस पूरे मामले की शुरुआत साल 2021 में हुई एक गोपनीय शिकायत के बाद हुई थी। शुरुआती संदेह के बाद जब माध्यमिक शिक्षा मंडल से इन शिक्षकों की अंकसूचियों (मार्कशीट) का वेरिफिकेशन कराया गया, तो चौंकाने वाले खुलासे हुए।

  • जांच में पाया गया कि कई मार्कशीट बोर्ड द्वारा कभी जारी ही नहीं की गई थीं।
  • कुछ मामलों में एक ही रोल नंबर पर दो अलग-अलग परीक्षार्थियों के दस्तावेज मिले।
  • स्पेशल टास्क फोर्स (STF) भोपाल की जांच में भी इन डिग्रियों को पूरी तरह फर्जी और कूटरचित पाया गया।

लोकायुक्त की नजर, 23 अन्य शिक्षक भी रडार पर

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए लोकायुक्त संगठन भी समानांतर जांच कर रहा है। लोकायुक्त ने शिक्षा विभाग से कुल 74 संदिग्ध शिक्षकों का पूरा सेवा रिकॉर्ड तलब किया है। फिलहाल 51 शिक्षकों का फर्जीवाड़ा पूरी तरह प्रमाणित हो चुका है, जबकि बचे हुए 23 अन्य शिक्षकों के दस्तावेजों की स्क्रूटनी अभी जारी है।

कार्रवाई में देरी पर भी उठ रहे सवाल

विभागीय सूत्रों के अनुसार, जांच समिति ने मई 2024 में ही अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी, लेकिन तत्कालीन अधिकारियों की सुस्ती के चलते कार्रवाई फाइलों में दबी रही और ये फर्जी शिक्षक लगातार वेतन का लाभ लेते रहे। अब वर्तमान DEO के कड़े आदेश के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है और आने वाले दिनों में कई बड़े नामों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।

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