पुणे: MPSC परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों छात्र, सुप्रिया सुले बोलीं- ‘पुणे में जंतर-मंतर जैसा नजारा’
विशेष संवाददाता, पुणे
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की कार्यप्रणाली और परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सोमवार को पुणे की सड़कों पर भारी जन-आक्रोश देखने को मिला। राज्य भर से आए हजारों प्रतियोगी छात्रों ने ‘MPSC विद्यार्थी आक्रोश मोर्चा’ के बैनर तले एक विशाल विरोध प्रदर्शन किया। आंदोलन की भयावहता और छात्रों की भारी भीड़ को देखते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने इसकी तुलना दिल्ली के ऐतिहासिक विरोध स्थल से करते हुए कहा कि आज पुणे की सड़कों पर बिल्कुल ‘जंतर-मंतर’ जैसा नजारा दिखाई दे रहा है।
यह विरोध मार्च पुणे के ऐतिहासिक ओंकारेश्वर मंदिर से शुरू होकर जिला कलेक्टर कार्यालय तक पहुंचा, जिसमें शामिल छात्र सरकार और आयोग के खिलाफ नारेबाज़ी कर रहे थे।
ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा में ‘पेपर लीक’ बना मुख्य कारण
छात्रों के इस देशव्यापी आक्रोश के पीछे मुख्य कारण हाल ही में आयोजित हुई ‘औषध निरीक्षक’ (Drug Inspector) परीक्षा का कथित पेपर लीक मामला है। आंदोलनकारी छात्रों का आरोप है कि आयोग के भीतर बैठे कुछ तत्वों की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी परीक्षा का लीक होना संभव नहीं है।
इसके अलावा, छात्रों ने निम्नलिखित प्रशासनिक विफलताओं को रेखांकित किया है:
- भर्ती प्रक्रियाओं में अत्यधिक विलंब: पिछले कई वर्षों से विभिन्न विभागों के परिणाम और नियुक्तियां अटकी हुई हैं।
- परीक्षा कैलेंडर का अभाव: आयोग द्वारा परीक्षाओं के आयोजन और उनके परिणामों को लेकर कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की जा रही है, जिससे अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका है।
- पारदर्शिता का संकट: बार-बार सामने आ रही गड़बड़ियों के कारण छात्रों का परीक्षा प्रणाली से पूरी तरह भरोसा उठ चुका है।
शीर्ष अधिकारियों के इस्तीफे और CBI जांच की मांग
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र प्रतिनिधियों ने प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें स्पष्ट कर दी हैं। अभ्यर्थियों की मुख्य मांगों में शामिल हैं:
- MPSC अध्यक्ष व सचिव का इस्तीफा: परीक्षा की शुचिता बनाए रखने में विफल रहने पर आयोग के शीर्ष नेतृत्व को तुरंत पद से हटाया जाए।
- उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच: ड्रग इंस्पेक्टर सहित हाल ही में आयोजित हुई सभी संदिग्ध परीक्षाओं की CBI या CID से समयबद्ध जांच कराई जाए।
- सख्त कानून की आवश्यकता: भविष्य में पेपर लीक और नकल रोकने के लिए राज्य में एक कड़ा गैर-जमानती ‘एंटी-चीटिंग एक्ट’ लागू किया जाए।
राजनीतिक गलियारों में हलचल, सड़क पर उतरे विपक्ष के नेता
छात्रों के इस आंदोलन ने महाराष्ट्र के सियासी पारे को गरमा दिया है। सुप्रिया सुले के अलावा विधायक रोहित पवार भी प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में सीधे सड़क पर उतरे और उन्होंने एक वाहन पर चढ़कर युवाओं को संबोधित करते हुए सरकार की नीतियों की तीखी आलोचना की। इसके साथ ही विभिन्न सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों ने भी इस मोर्चे को अपना पूर्ण समर्थन घोषित किया है।
दूसरी ओर, विवादों के बीच MPSC के वर्तमान अध्यक्ष विवेक भिमनवार ने अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि जिन अनियमितताओं की बात की जा रही है, वे कथित तौर पर जनवरी 2026 में हुई थीं, जबकि उन्होंने स्वयं मार्च 2026 में पदभार ग्रहण किया था। बहरहाल, छात्र आयोग के इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हैं और उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर तुरंत कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो यह आंदोलन आगामी दिनों में और उग्र रूप धारण करेगा।


