Tuesday, October 6, 2026

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पन्ना का ‘बृहस्पति कुंड’ वॉटरफॉल हुआ जीवंत: भारी बारिश के बाद 700 फीट की ऊंचाई से गिर रहा ‘एमपी का नियाग्रा फॉल्स’, प्रशासन का अलर्ट

पन्ना, 20 अगस्त 2026 अजय विश्वकर्मा की रिपोर्ट

पन्ना का ‘बृहस्पति कुंड’ वॉटरफॉल हुआ जीवंत: भारी बारिश के बाद 700 फीट की ऊंचाई से गिर रहा ‘एमपी का नियाग्रा फॉल्स’, प्रशासन का अलर्टपन्ना, 20 अगस्त 2026:मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में स्थित प्रसिद्ध पर्यटन स्थल ‘बृहस्पति कुंड’ (Brihaspati Kund) इन दिनों सैलानियों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है। बुंदेलखंड क्षेत्र और पन्ना जिले में पिछले 24 घंटों से हो रही मूसलाधार बारिश के चलते बाघिन नदी पूरी तरह उफान पर है। इस भारी बारिश के कारण बृहस्पति कुंड जलप्रपात अपने पूरे शवाब और भव्य रूप में लौट आया है, जहाँ लगभग 700 फीट की ऊंचाई से गिरती विशाल जलधारा अद्भुत नजारा पेश कर रही है। इसे अपनी इस बेहिसाब खूबसूरती के कारण “मध्य प्रदेश का नियाग्रा फॉल्स” भी कहा जाता है।

ग्लास ब्रिज पर रोमांच का सफर

झरने के इस मनमोहक और रौद्र रूप को करीब से देखने के लिए मध्य प्रदेश के साथ-साथ पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से भी भारी संख्या में पर्यटक यहाँ पहुँच रहे हैं। पर्यटकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण यहाँ हाल ही में बना कांच का पुल (Glass Bridge) है। 700 फीट की गहराई के ठीक ऊपर बने इस ग्लास ब्रिज पर खड़े होकर बहते झरने को देखना लोगों के लिए बेहद रोमांचक साबित हो रहा है।

पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व

बृहस्पति कुंड का सिर्फ प्राकृतिक ही नहीं, बल्कि पौराणिक महत्व भी है। मान्यताओं के अनुसार, यहाँ देवगुरु बृहस्पति ने आकर तपस्या की थी। इसके अलावा, यहाँ की प्राचीन गुफाओं की चट्टानों पर आदिमानव काल के प्राचीन शैलचित्र (Rock Paintings) भी मौजूद हैं, जो इतिहास प्रेमियों को आकर्षित करते हैं।

सुरक्षा को लेकर प्रशासन सख्त, पर्यटकों को चेतावनीलगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। सुरक्षा के मद्देनजर कुंड के निचले हिस्से और पानी के बिल्कुल नजदीक जाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। पुलिस ने पर्यटकों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने और रील बनाने या खतरनाक जगहों पर सेल्फी लेने से बचने की सख्त हिदायत दी है।

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