व्यवस्था या अव्यवस्था? डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा रुड़की का सरकारी अस्पताल, मरीज बेहाल
अर्जुन धारीवाल
रुड़की। सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के तमाम दावों के बीच रुड़की के राजकीय उप-जिला चिकित्सालय की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। यहां डॉक्टरों की भारी कमी के चलते मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आलम यह है कि पूरे अस्पताल में मरीजों को देखने की जिम्मेदारी मात्र एक फिजिशियन डॉ. वैदेही मित्तल के कंधों पर है।
एक डॉक्टर, हजारों मरीज –
पिछले कुछ समय से रुड़की के सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में प्रयास किए गए हैं, लेकिन चिकित्सकों की कमी व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है। मरीजों की बढ़ती तादाद के बीच उपलब्ध डॉक्टरों पर काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसका सीधा असर उपचार व्यवस्था पर दिख रहा है। अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को देखने और उन्हें उचित परामर्श देने की जिम्मेदारी सीमित चिकित्सकीय संसाधनों के बीच निभानी पड़ रही है।
अस्पताल में तैनात फिजिशियन डॉ. वैदेही मित्तल के सामने भी मरीजों की बड़ी संख्या के चलते चुनौतीपूर्ण स्थिति बनी हुई है। डॉ. मित्तल 28 सितंबर से रुड़की के सरकारी अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रही हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या और चिकित्सकों की कमी के कारण प्रत्येक मरीज को समय पर उपचार उपलब्ध कराना उनके लिए भी चुनौतीपूर्ण हो रहा है।
डॉक्टर भी परेशान, मरीज भी –
चिकित्सकों पर बढ़ते कार्यभार के चलते जहां मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, वहीं डॉक्टरों के लिए भी लगातार बड़ी संख्या में मरीजों को देखना तनावपूर्ण स्थिति पैदा करता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग और संबंधित अधिकारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि रुड़की के सरकारी अस्पताल में चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए कब ठोस कदम उठाए जाएंगे। यदि अस्पताल में पर्याप्त डॉक्टरों की तैनाती की जाती है, तो मरीजों को समय पर उपचार मिलने के साथ-साथ मौजूदा चिकित्सकों पर काम का दबाव भी कम हो
“मरीजों की संख्या बहुत अधिक है, लेकिन डॉक्टरों की कमी के कारण हर मरीज को समय पर उपचार देना कठिन हो रहा है।”


