सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में पुलिस ने जाली मुद्रा यानी नकली पैसों के एक बहुत बड़े नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है। नगर कोतवाली पुलिस, स्वाट और एसओजी की संयुक्त टीम ने मिलकर 20-20 रुपये के नकली सिक्के बनाने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में गिरोह के मुख्य सरगना समेत 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों के पास से 20 रुपये के 6,400 तैयार नकली सिक्के बरामद किए हैं, जिनकी कुल कीमत 1 लाख 28 हजार रुपये है। इसके साथ ही मौके से सिक्के बनाने वाली 6 मशीनें, लोहे की 5 डाई और बिना मुहर लगी 39 कच्ची डाई समेत भारी मात्रा में उपकरण जब्त किए गए हैं।
बाजार में चला चुके हैं 70 करोड़ से ज्यादा के सिक्के
सहारनपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अभिनंदन ने पुलिस लाइन में इस पूरे मामले की जानकारी दी। पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया है। आरोपियों के मुताबिक, उनका यह गिरोह अब तक देश के अलग-अलग राज्यों के बाजारों में 70 करोड़ रुपये से भी ज़्यादा के नकली सिक्के खपा चुका है। हालांकि, पुलिस प्रशासन का कहना है कि इस दावे की गहराई से जांच की जा रही है और वास्तविक आंकड़ा जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो पाएगा।
यह गिरोह पंजाब से अपना नेटवर्क बढ़ा रहा था और अब सहारनपुर को अपना नया केंद्र बनाकर यहाँ नकली सिक्के ढालने का एक बड़ा कारखाना शुरू करने की फिराक में था। लेकिन इनकी योजना कामयाब होने से पहले ही पुलिस ने इन्हें धर दबोचा।
शराब के ठेकों और टोल प्लाजा पर होती थी सप्लाई
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह एक दिन में करीब 10 से 12 हजार नकली सिक्के तैयार कर लेता था। इन सिक्कों को बाजार में चलाने के लिए आरोपियों ने बहुत ही शातिर तरीका अपनाया था। गैंग के सदस्य इन नकली सिक्कों को ज्यादातर सरकारी शराब के ठेकों, हाईवे के टोल टैक्स नाकों, पेट्रोल पंपों और छोटी दुकानों पर चलाते थे। इन जगहों पर भीड़भाड़ और जल्दबाजी के कारण लोग सिक्कों को बिना जांचे आसानी से ले लेते थे।
सुनार का काम करने वाला निकला मुख्य सरगना
पकड़े गए गिरोह का मुख्य सरगना उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह है, जो मूल रूप से मोहाली (पंजाब) का रहने वाला है। पुलिस के अनुसार, उपकार लूथरा साल 2001 से ही नकली सिक्के बनाने के इस अवैध काले धंधे में शामिल है। वह पहले सुनार यानी सर्राफा का काम करता था, जिसकी वजह से उसे धातुओं को पिघलाने और सांचे में ढालने का पूरा अनुभव था। यह गैंग पहले भी दिल्ली की तिहाड़ जेल जा चुका है। जेल से छूटने के बाद आरोपियों ने अपना नेटवर्क पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, बिहार और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में दोबारा फैला लिया था।
पुलिस ने क्या-क्या सामान बरामद किया?
- नकली सिक्के: 20 रुपये के 6,400 तैयार सिक्के (कुल कीमत ₹1,28,000)
- अधबने सिक्के: करीब 5 लाख रुपये की कीमत के बिना तैयार सिक्के
- मशीनें: सिक्के ढालने वाली 6 बड़ी मशीनें और सांचे
- डाई (सांचे): लोहे की 5 मुख्य डाई, बिना मुहर की 39 डाई और मुहर लगी 20 डाई
- वाहन: दो कारें (इको स्पोर्ट और स्विफ्ट डिजायर)
- अन्य सामान: 8 मोबाइल फोन, हिसाब-किताब के 7 रजिस्टर और 10,000 रुपये के असली नोट
गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम:
- उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह (निवासी: जिरकपुर, मोहाली, पंजाब)
- हिमांशु उर्फ गुल्लू (निवासी: बरसी, सहारनपुर)
- कुलदीप (निवासी: आवास विकास, सहारनपुर)
- संतोष चौरसिया उर्फ जनार्दन (निवासी: मधुबनी, बिहार)
- अनुराग पाल उर्फ लंकेश (निवासी: संत रविदासनगर)
पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ नगर कोतवाली में गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया है। इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश में पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।


