Friday, October 2, 2026

TOP NEWS

नगर पालिका परिषद पीथमपुर...

( संवाददाता प्रफुल्ल तंवर )एनटीवी टाइम न्यूज पीथमपुर/ नगर पालिका परिषद पीथमपुर के...

पीथमपुर में ‘बुंदेलखंड सांस्कृतिक...

( संवाददाता प्रफुल्ल तंवर )एनटीवी टाइम न्यूज पीथमपुर/ औद्योगिक नगरी पीथमपुर में बुंदेलखंड...

बीसलपुर में बच्चों को...

बीसलपुर। सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में ‘साक्षर बचपन, सुरक्षित बचपन’ अभियान के...

धार में राणी सती...

'ब्रज रसामृत' के रंग, बेटियों को मिलेगा कलारीपयट्टू युद्ध कला का प्रशिक्षण; अंतिम...
Homeदेशदेश के 326 सांसदों और 14 राज्यों के CM पर आपराधिक केस...

देश के 326 सांसदों और 14 राज्यों के CM पर आपराधिक केस दर्ज, सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

माननीयों’ का रिकॉर्ड: पूर्व और वर्तमान सांसदों-विधायकों को मिलाकर देशभर की अदालतों में कुल 4,192 मामले लंबित हैं।

मुख्यमंत्री भी फेहरिस्त में: देश के 28 राज्यों में से 14 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने स्वयं अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की घोषणा की है।

सुप्रीम कोर्ट में खुली राजनीति के अपराधीकरण की पोल

भारतीय लोकतंत्र और राजनीति के अपराधीकरण को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) के समक्ष एक बेहद चौंकाने वाली और गंभीर रिपोर्ट पेश की गई है। कोर्ट की सहायता के लिए नियुक्त वरिष्ठ अधिवक्ता और एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) विजय हंसारिया द्वारा सोमवार (17 अगस्त 2026) को दाखिल किए गए ताजा हलफनामे ने देश के नीति निर्माताओं के दामन पर लगे दागों को उजागर कर दिया है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों से जुटाए गए अधिकृत आंकड़ों के मुताबिक, देश की संसद के दोनों सदनों के कुल 326 मौजूदा सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, लोकसभा के कुल 543 निर्वाचित सदस्यों में से 251 (लगभग 46 प्रतिशत) सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन 251 सांसदों में से 170 सांसदों पर बेहद गंभीर किस्म के मामले दर्ज हैं, जिनमें दोषी पाए जाने पर 5 साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है। वहीं, अगर संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा की बात करें, तो कुल 233 सदस्यों में से 75 सांसदों (33 प्रतिशत) के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज हैं। राज्यसभा के इन 75 दागी सांसदों में से 40 सदस्य ऐसे हैं जो पांच साल से अधिक की सजा वाले गंभीर आपराधिक मुकदमों का सामना कर रहे हैं।

14 राज्यों के मुख्यमंत्री भी जद में, ये नाम हैं सबसे ऊपर

हलफनामे में राज्यों की कमान संभाल रहे मुख्यमंत्रियों के चुनावी हलफनामों का भी विश्लेषण किया गया है। देश के 28 राज्यों में से 14 मुख्यमंत्रियों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की पुष्टि की है, जिनमें कई गंभीर मामले भी शामिल हैं। मामलों की संख्या के लिहाज से तेलंगाना के मुख्यमंत्री अनुमुला रेवंत रेड्डी सूची में सबसे ऊपर हैं, जिन पर कुल 89 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल के कद्दावर नेता सुवेंदु अधिकारी पर 29 मामले और कर्नाटक के डीके शिवकुमार पर 19 मामले दर्ज दर्शाए गए हैं।

राज्यों की सूची: केरल के 95% सांसद दागी

एमिकस क्यूरी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की रिपोर्ट न मिल पाने के कारण उत्तर प्रदेश को छोड़कर बाकी राज्यों के उच्च न्यायालयों से मिले आंकड़ों का तुलनात्मक विश्लेषण भी रखा है। इस विश्लेषण में प्रतिशत के मामले में केरलम (केरल) के सांसद सबसे आगे हैं, जहां के 20 में से 19 सांसदों (95 प्रतिशत) पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसके बाद तेलंगाना के 17 में से 14 सांसदों (82 प्रतिशत), ओडिशा के 21 में से 16 सांसदों (76 प्रतिशत), झारखंड के 14 में से 10 सांसदों (71 प्रतिशत) और तमिलनाडु के 39 में से 26 सांसदों (67 प्रतिशत) पर मुकदमे चल रहे हैं। मध्य प्रदेश के 29 में से 9 सांसदों और राजस्थान के 25 में से 4 सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। वहीं, हरियाणा और छत्तीसगढ़ इस सूची में सबसे स्वच्छ राज्यों के रूप में उभरे हैं, जहां के क्रमशः 10 और 11 सांसदों में से केवल 1-1 सांसद पर ही मामले दर्ज हैं।

सुप्रीम कोर्ट से ‘माइक्रो-मॉनिटरिंग’ और 1 साल में फैसले की मांग

वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया ने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट्स द्वारा साल 2018 से लगातार निगरानी किए जाने के बावजूद सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों की कुल संख्या में कोई खास कमी नहीं आई है। साल 2025 में जहां विशेष अदालतों ने सांसदों-विधायकों से जुड़े 1,243 मामलों का निपटारा किया, वहीं इसी दौरान 1,050 नए मामले दर्ज भी हो गए। वर्तमान में पूर्व और मौजूदा जनप्रतिनिधियों के खिलाफ कुल 4,192 मामले अदालतों में धूल फांक रहे हैं। न्याय मित्र ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है कि सभी राज्यों के उच्च न्यायालयों को इन मामलों की हर महीने ‘न्यायिक स्तर पर माइक्रो-मॉनिटरिंग’ करने के निर्देश दिए जाएं ताकि चार्जशीट (आरोप तय) होने के अधिकतम 1 वर्ष के भीतर मुकदमों का अंतिम फैसला अनिवार्य रूप से आ सके।



RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments