16वीं सदी के ‘मर्केटर मैप’ को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने किया रिटायर, नए ‘इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन’ को दी मंजूरी; विरोध में अकेला पड़ा अमेरिका।
न्यूयॉर्क (न्यूज़ डेस्क): संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने सदियों पुराने भौगोलिक भ्रम और औपनिवेशिक मानसिकता के प्रतीक माने जाने वाले दुनिया के पारंपरिक नक्शे को बदलने के लिए एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया है। इस नए फैसले के तहत अब पूरी दुनिया में ‘इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन’ (Equal Earth Projection) नक्शे को बढ़ावा दिया जाएगा। नए नक्शे में अफ्रीका महाद्वीप अपने वास्तविक और बेहद विशाल रूप में दिखाई देगा, जबकि उत्तरी अमेरिका,遗 यूरोप और रूस का आकार पहले की तुलना में काफी छोटा (अपने वास्तविक अनुपात में) नजर आएगा।
🗳️ वोटिंग में अकेला पड़ा अमेरिका
इस ऐतिहासिक प्रस्ताव को पश्चिमी अफ्रीकी देश टोगो (Togo) ने अफ्रीकी संघ (AU) की ओर से संयुक्त राष्ट्र में पेश किया था।
- समर्थन: दुनिया के 164 देशों ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। फ्रांस और ब्रिटेन जैसे बड़े देशों ने भी इसका समर्थन किया है।
- विरोध: संयुक्त राज्य अमेरिका (US) इस प्रस्ताव के विरोध में वोट करने वाला एकमात्र देश रहा। अमेरिकी प्रतिनिधि ने इसे ‘गैर-जरूरी’ और ‘वैचारिक’ बताते हुए खारिज कर दिया।
- अनुपस्थित: यूक्रेन, सर्बिया, एस्टोनिया, लिथुआनिया, जॉर्जिया और मोल्डोवा सहित 6 देश मतदान से दूर रहे।
टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डसी (Robert Dussey) ने मतदान से ठीक पहले कहा, “एक निष्पक्ष दुनिया की शुरुआत एक निष्पक्ष नक्शे से होती है।”
🗺️ क्या था पुराने ‘मर्केटर नक्शे’ का विवाद?
हम स्कूलों और किताबों में जिस पारंपरिक नक्शे को देखते आ रहे हैं, उसे 1569 में फ्लेमिश कार्टोग्राफर गेरहार्डस मर्केटर ने समुद्री नाविकों की मदद के लिए डिजाइन किया था। 3D धरती को 2D कागज पर उतारने की इस तकनीक में ध्रुवों (Poles) के पास के देशों का आकार बहुत बड़ा और भूमध्य रेखा (Equator) के पास के देशों का आकार काफी छोटा हो गया था।
- ग्रीनलैंड बनाम अफ्रीका का भ्रम: पुराने नक्शे में ग्रीनलैंड और अफ्रीका लगभग एक ही आकार के दिखते हैं। जबकि हकीकत यह है कि अफ्रीका का क्षेत्रफल ग्रीनलैंड से 14 गुना बड़ा है。
- दशकों का ‘कोग्निटिव इम्पैक्ट’: टोगो और अफ्रीकी देशों का तर्क है कि इस गलत नक्शे ने दुनिया की सोच में पश्चिमी और यूरोपीय श्रेष्ठता को बढ़ावा दिया और अफ्रीका के वैश्विक महत्व, उसकी अर्थव्यवस्था और उसकी विशालता को हमेशा छोटा करके आंका।
🆕 कैसा है नया ‘इक्वल अर्थ’ नक्शा और क्या बदलेगा?
नया नक्शा साल 2018 में तीन प्रसिद्ध कार्टोग्राफर्स (टॉम पैटरसन, बर्नहार्ड जेनी और बोजन शावरिच) द्वारा तैयार किया गया था। यह पूरी तरह से वैज्ञानिक है और ज़मीन के वास्तविक क्षेत्रफल (Landmass) को आनुपातिक रूप से बिल्कुल सटीक दर्शाता है।
- अफ्रीका का महा-आकार: नए नक्शे में अफ्रीका इतना बड़ा दिखेगा कि उसमें अमेरिका, चीन, भारत, जापान और लगभग पूरा यूरोप एक साथ समा सकते हैं।
- ग्लोबल साउथ को मजबूती: नए नक्शे में दक्षिण अमेरिका, ब्राजील, भारत और ओशिनिया (ऑस्ट्रेलियाई क्षेत्र) का आकार भी उनकी वास्तविक सीमाओं के अनुसार बड़ा और स्पष्ट दिखाई देगा।
- नेविगेशन पर असर नहीं: संयुक्त राष्ट्र ने साफ किया है कि यह नक्शा शिक्षा, शासन और सांस्कृतिक समझ के लिए है। समुद्री जहाजों और हवाई जहाजों के नेविगेशन के लिए मर्केटर मैप का इस्तेमाल जारी रहेगा, क्योंकि दिशाओं के मामले में वह सटीक है।
🏫 क्या यह फैसला अनिवार्य है?
संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी (Mandatory) नहीं होते हैं। हालांकि, UN ने दुनिया भर की सरकारों, शैक्षणिक संस्थानों, टेक कंपनियों (जैसे Google Maps) और पाठ्यपुस्तक प्रकाशकों से अपील की है कि वे स्कूली पाठ्यक्रमों और रोजमर्रा की तकनीक में पुराने नक्शे को हटाकर इस नए ‘इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन’ को शामिल करें। फ्रांस ने पहले ही घोषणा कर दी है कि वह अपने देश में मर्केटर प्रोजेक्शन का इस्तेमाल बंद कर रहा है।
न्यूयॉर्क (न्यूज़ डेस्क): संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने सदियों पुराने भौगोलिक भ्रम और औपनिवेशिक मानसिकता के प्रतीक माने जाने वाले दुनिया के पारंपरिक नक्शे को बदलने के लिए एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया है। इस नए फैसले के तहत अब पूरी दुनिया में ‘इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन’ (Equal Earth Projection) नक्शे को बढ़ावा दिया जाएगा। नए नक्शे में अफ्रीका महाद्वीप अपने वास्तविक और बेहद विशाल रूप में दिखाई देगा, जबकि उत्तरी अमेरिका,遗 यूरोप और रूस का आकार पहले की तुलना में काफी छोटा (अपने वास्तविक अनुपात में) नजर आएगा।
🗳️ वोटिंग में अकेला पड़ा अमेरिका
इस ऐतिहासिक प्रस्ताव को पश्चिमी अफ्रीकी देश टोगो (Togo) ने अफ्रीकी संघ (AU) की ओर से संयुक्त राष्ट्र में पेश किया था।
- समर्थन: दुनिया के 164 देशों ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। फ्रांस और ब्रिटेन जैसे बड़े देशों ने भी इसका समर्थन किया है।
- विरोध: संयुक्त राज्य अमेरिका (US) इस प्रस्ताव के विरोध में वोट करने वाला एकमात्र देश रहा। अमेरिकी प्रतिनिधि ने इसे ‘गैर-जरूरी’ और ‘वैचारिक’ बताते हुए खारिज कर दिया।
- अनुपस्थित: यूक्रेन, सर्बिया, एस्टोनिया, लिथुआनिया, जॉर्जिया और मोल्डोवा सहित 6 देश मतदान से दूर रहे।
टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डसी (Robert Dussey) ने मतदान से ठीक पहले कहा, “एक निष्पक्ष दुनिया की शुरुआत एक निष्पक्ष नक्शे से होती है।”
🗺️ क्या था पुराने ‘मर्केटर नक्शे’ का विवाद?
हम स्कूलों और किताबों में जिस पारंपरिक नक्शे को देखते आ रहे हैं, उसे 1569 में फ्लेमिश कार्टोग्राफर गेरहार्डस मर्केटर ने समुद्री नाविकों की मदद के लिए डिजाइन किया था। 3D धरती को 2D कागज पर उतारने की इस तकनीक में ध्रुवों (Poles) के पास के देशों का आकार बहुत बड़ा और भूमध्य रेखा (Equator) के पास के देशों का आकार काफी छोटा हो गया था।
- ग्रीनलैंड बनाम अफ्रीका का भ्रम: पुराने नक्शे में ग्रीनलैंड और अफ्रीका लगभग एक ही आकार के दिखते हैं। जबकि हकीकत यह है कि अफ्रीका का क्षेत्रफल ग्रीनलैंड से 14 गुना बड़ा है。
- दशकों का ‘कोग्निटिव इम्पैक्ट’: टोगो और अफ्रीकी देशों का तर्क है कि इस गलत नक्शे ने दुनिया की सोच में पश्चिमी और यूरोपीय श्रेष्ठता को बढ़ावा दिया और अफ्रीका के वैश्विक महत्व, उसकी अर्थव्यवस्था और उसकी विशालता को हमेशा छोटा करके आंका।
🆕 कैसा है नया ‘इक्वल अर्थ’ नक्शा और क्या बदलेगा?
नया नक्शा साल 2018 में तीन प्रसिद्ध कार्टोग्राफर्स (टॉम पैटरसन, बर्नहार्ड जेनी और बोजन शावरिच) द्वारा तैयार किया गया था। यह पूरी तरह से वैज्ञानिक है और ज़मीन के वास्तविक क्षेत्रफल (Landmass) को आनुपातिक रूप से बिल्कुल सटीक दर्शाता है।
- अफ्रीका का महा-आकार: नए नक्शे में अफ्रीका इतना बड़ा दिखेगा कि उसमें अमेरिका, चीन, भारत, जापान और लगभग पूरा यूरोप एक साथ समा सकते हैं।
- ग्लोबल साउथ को मजबूती: नए नक्शे में दक्षिण अमेरिका, ब्राजील, भारत और ओशिनिया (ऑस्ट्रेलियाई क्षेत्र) का आकार भी उनकी वास्तविक सीमाओं के अनुसार बड़ा और स्पष्ट दिखाई देगा।
- नेविगेशन पर असर नहीं: संयुक्त राष्ट्र ने साफ किया है कि यह नक्शा शिक्षा, शासन और सांस्कृतिक समझ के लिए है। समुद्री जहाजों और हवाई जहाजों के नेविगेशन के लिए मर्केटर मैप का इस्तेमाल जारी रहेगा, क्योंकि दिशाओं के मामले में वह सटीक है।
🏫 क्या यह फैसला अनिवार्य है?
संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी (Mandatory) नहीं होते हैं। हालांकि, UN ने दुनिया भर की सरकारों, शैक्षणिक संस्थानों, टेक कंपनियों (जैसे Google Maps) और पाठ्यपुस्तक प्रकाशकों से अपील की है कि वे स्कूली पाठ्यक्रमों और रोजमर्रा की तकनीक में पुराने नक्शे को हटाकर इस नए ‘इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन’ को शामिल करें। फ्रांस ने पहले ही घोषणा कर दी है कि वह अपने देश में मर्केटर प्रोजेक्शन का इस्तेमाल बंद कर रहा है।
16वीं सदी के ‘मर्केटर मैप’ को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने किया रिटायर, नए ‘इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन’ को दी मंजूरी; विरोध में अकेला पड़ा अमेरिका।
न्यूयॉर्क (न्यूज़ डेस्क): संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने सदियों पुराने भौगोलिक भ्रम और औपनिवेशिक मानसिकता के प्रतीक माने जाने वाले दुनिया के पारंपरिक नक्शे को बदलने के लिए एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया है। इस नए फैसले के तहत अब पूरी दुनिया में ‘इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन’ (Equal Earth Projection) नक्शे को बढ़ावा दिया जाएगा। नए नक्शे में अफ्रीका महाद्वीप अपने वास्तविक और बेहद विशाल रूप में दिखाई देगा, जबकि उत्तरी अमेरिका,遗 यूरोप और रूस का आकार पहले की तुलना में काफी छोटा (अपने वास्तविक अनुपात में) नजर आएगा।
वोटिंग में अकेला पड़ा अमेरिका
इस ऐतिहासिक प्रस्ताव को पश्चिमी अफ्रीकी देश टोगो (Togo) ने अफ्रीकी संघ (AU) की ओर से संयुक्त राष्ट्र में पेश किया था।
- समर्थन: दुनिया के 164 देशों ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। फ्रांस और ब्रिटेन जैसे बड़े देशों ने भी इसका समर्थन किया है।
- विरोध: संयुक्त राज्य अमेरिका (US) इस प्रस्ताव के विरोध में वोट करने वाला एकमात्र देश रहा। अमेरिकी प्रतिनिधि ने इसे ‘गैर-जरूरी’ और ‘वैचारिक’ बताते हुए खारिज कर दिया।
- अनुपस्थित: यूक्रेन, सर्बिया, एस्टोनिया, लिथुआनिया, जॉर्जिया और मोल्डोवा सहित 6 देश मतदान से दूर रहे।
टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डसी (Robert Dussey) ने मतदान से ठीक पहले कहा, “एक निष्पक्ष दुनिया की शुरुआत एक निष्पक्ष नक्शे से होती है।”
क्या था पुराने ‘मर्केटर नक्शे’ का विवाद?
हम स्कूलों और किताबों में जिस पारंपरिक नक्शे को देखते आ रहे हैं, उसे 1569 में फ्लेमिश कार्टोग्राफर गेरहार्डस मर्केटर ने समुद्री नाविकों की मदद के लिए डिजाइन किया था। 3D धरती को 2D कागज पर उतारने की इस तकनीक में ध्रुवों (Poles) के पास के देशों का आकार बहुत बड़ा और भूमध्य रेखा (Equator) के पास के देशों का आकार काफी छोटा हो गया था।
- ग्रीनलैंड बनाम अफ्रीका का भ्रम: पुराने नक्शे में ग्रीनलैंड और अफ्रीका लगभग एक ही आकार के दिखते हैं। जबकि हकीकत यह है कि अफ्रीका का क्षेत्रफल ग्रीनलैंड से 14 गुना बड़ा है。
- दशकों का ‘कोग्निटिव इम्पैक्ट’: टोगो और अफ्रीकी देशों का तर्क है कि इस गलत नक्शे ने दुनिया की सोच में पश्चिमी और यूरोपीय श्रेष्ठता को बढ़ावा दिया और अफ्रीका के वैश्विक महत्व, उसकी अर्थव्यवस्था और उसकी विशालता को हमेशा छोटा करके आंका।
कैसा है नया ‘इक्वल अर्थ’ नक्शा और क्या बदलेगा?
नया नक्शा साल 2018 में तीन प्रसिद्ध कार्टोग्राफर्स (टॉम पैटरसन, बर्नहार्ड जेनी और बोजन शावरिच) द्वारा तैयार किया गया था। यह पूरी तरह से वैज्ञानिक है और ज़मीन के वास्तविक क्षेत्रफल (Landmass) को आनुपातिक रूप से बिल्कुल सटीक दर्शाता है।
- अफ्रीका का महा-आकार: नए नक्शे में अफ्रीका इतना बड़ा दिखेगा कि उसमें अमेरिका, चीन, भारत, जापान और लगभग पूरा यूरोप एक साथ समा सकते हैं।
- ग्लोबल साउथ को मजबूती: नए नक्शे में दक्षिण अमेरिका, ब्राजील, भारत और ओशिनिया (ऑस्ट्रेलियाई क्षेत्र) का आकार भी उनकी वास्तविक सीमाओं के अनुसार बड़ा और स्पष्ट दिखाई देगा।
- नेविगेशन पर असर नहीं: संयुक्त राष्ट्र ने साफ किया है कि यह नक्शा शिक्षा, शासन और सांस्कृतिक समझ के लिए है। समुद्री जहाजों और हवाई जहाजों के नेविगेशन के लिए मर्केटर मैप का इस्तेमाल जारी रहेगा, क्योंकि दिशाओं के मामले में वह सटीक है।
क्या यह फैसला अनिवार्य है?
संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी (Mandatory) नहीं होते हैं। हालांकि, UN ने दुनिया भर की सरकारों, शैक्षणिक संस्थानों, टेक कंपनियों (जैसे Google Maps) और पाठ्यपुस्तक प्रकाशकों से अपील की है कि वे स्कूली पाठ्यक्रमों और रोजमर्रा की तकनीक में पुराने नक्शे को हटाकर इस नए ‘इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन’ को शामिल करें। फ्रांस ने पहले ही घोषणा कर दी है कि वह अपने देश में मर्केटर प्रोजेक्शन का इस्तेमाल बंद कर रहा है।


