Tuesday, September 15, 2026

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महाकाल लोक की तर्ज पर ओंकारेश्वर में बनना था ‘ममलेश्वर लोक’, आंदोलन के आगे झुकी सरकार, निरस्त

महाकाल लोक की तर्ज पर ओंकारेश्वर में प्रस्तावित ममलेश्वर लोक विस्तार योजना को लेकर उपजा विवाद मात्र दो दिन में समाप्त हो गया है. स्थानीय जन आंदोलन और साधु-संतों के मुखर विरोध के आगे झुकते हुए जिला प्रशासन को तत्काल प्रभाव से योजना को निरस्त करने का आदेश जारी करना पड़ा.

एनटीवी टाइम न्यूज/ ओंकारेश्वर में दो दिन से चल रहे बंद का बड़ा असर हुआ और महज दो दिन में ही सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ा. जिला प्रशासन ने आदेश जारी कर स्वीकार किया कि लोक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है कि वर्तमान में जिस स्थान पर ममलेश्वर लोक का विस्तार प्रस्तावित था, उसे तत्काल निरस्त किया जाता है. अगर भविष्य में जनभावनाओं के अनुरूप दूसरी ममलेश्वर लोक का निर्माण किया जाएगा तो सभी की सर्वसम्मति से निर्णय लिया जाएगा. किसी जन आंदोलन के आगे शासन-प्रशासन इतनी जल्दी झुक जाए, यह अप्रत्याशित ही था.

दरअसल, उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर सिंहस्थ से पहले ओंकारेश्वर में भी ममलेश्वर लोक बनाने की तैयारी चल रही थी. ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग वाली पहाड़ी पर पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण मंदिर के ठीक सामने यानी नर्मदा के दूसरे तट पर स्थित ममलेश्वर मंदिर क्षेत्र (ब्रह्मपुरी) में इसे प्रस्तावित किया गया था.

यह क्षेत्र बहुत पुरानी और सघन बस्ती है. जब प्रशासन से संकेत मिले कि ममलेश्वर लोक के लिए इस बस्ती के लोगों को बेदखल करना पड़ेगा और उनकी दुकानें और मकान हटाने पड़ेंगे, तो तीव्र विरोध शुरू हो गया.

जब पीड़ितों ने तीन दिन के ओंकारेश्वर बंद का आह्वान किया तो इसका इतना व्यापक असर हुआ कि सभी व्यापारियों ने स्वतःस्फूर्त अपने कारोबार बंद रखे. पूरा बाजार स्वैच्छिक रूप से बंद रहा; चाय-नाश्ते की दुकानें तक नहीं खुलीं. स्थानीय परिवहन के साथ-साथ घाटों पर नौकायन भी ठप हो गया. दो दिन में ही प्रशासन को घुटने टेकने पड़े और मंगलवार शाम ममलेश्वर लोक प्रस्ताव को ही निरस्त करने का आदेश जारी करना पड़ा.

खास बात यह है कि बंद के दौरान आए तीर्थयात्रियों को असुविधा हुई, लेकिन उन्होंने भी स्थानीय लोगों की पीड़ा के प्रति सहानुभूति ही दिखाई. अधिकांश यात्रियों का मत था कि लोगों को उजाड़कर कोई विकास स्वीकार नहीं किया जा सकता. आंदोलन खत्म करने के प्रशासन के सभी प्रयास नाकाम रहे, तब उसे कदम पीछे खींचने पड़े.

अपर कलेक्टर कार्यालय से जारी आदेश में लिखा है, ”ओंकारेश्वर में ममलेश्वर क्षेत्र को लेकर ममलेश्वर लोक बनाया जाना प्रस्तावित था. इसी क्रम में विगत दिनों सर्वे कार्य किया गया था. उक्त सर्वे के दौरान आम जनता ने विरोधस्वरूप बंद का आह्वान किया. प्रशासन द्वारा लोक भावनाओं को दृष्टिगत रखते हुए निर्णय लिया गया है कि वर्तमान में जिस स्थान पर ममलेश्वर लोक का विस्तार किया जाना प्रस्तावित है, उसे तत्काल निरस्त किया जाता है. यदि जनभावनाओं के अनुसार अन्यत्र इसका निर्माण किया जाएगा तो सर्वसहमति से निर्णय लिया जाएगा.”

अपर कलेक्टर के.आर. बड़ोले ने मीडिया को बताया कि सर्वे के दौरान कई लोग विस्थापित होने की स्थिति में थे, कुछ आश्रम भी प्रभावित हो रहे थे.इससे लोगों की रोजी-रोटी पर असर पड़ रहा था और संत समाज भी नाराज था. जनभावनाओं समेत संत समाज की भावनाओं को देखते हुए ममलेश्वर लोक का निर्माण निरस्त कर दिया गया है. भविष्य में यदि निर्माण होगा तो सभी को साथ लेकर सहभागिता से किया जाएगा.

प्रशासन के इस आदेश पर पहले तो ओंकारेश्वर वासियों को विश्वास ही नहीं हुआ कि इतनी जल्दी निर्णय हो सकता है, लेकिन पुष्टि होते ही उनकी खुशी का ठिकाना न रहा.कुछ देर पहले तक सन्नाटे में डूबी सड़कें पटाखों से गूंज उठीं. साधु-संतों ने भी मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया.

प्रमुख संत मंगलदास त्यागी ने कहा, ”कुछ दिनों से ममलेश्वर लोक को लेकर जो दुविधा थी, वह आज साफ हो गई.मुख्यमंत्री मोहन यादव ने योजना निरस्त कर दी. अब कोई भी योजना बनेगी तो नगरवासियों और संत-महात्माओं को साथ बैठाकर चर्चा की जाएगी.” संत समाज का मुखर विरोध भी शासन के लिए बड़ी चिंता का कारण बना था.इस प्रकार जन आंदोलन और संत समाज की एकजुटता के आगे सरकार को मात्र दो दिन में झुकना पड़ा.

नारायण शर्मा
नारायण शर्मा
एन टी वी टाइम न्यूज में मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ के लिए काम करता हूं।
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