Saturday, October 10, 2026

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हिजाब पहनने की याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट से खारिज, कोर्ट बोला- धर्मनिरपेक्षता के लिए स्कूल यूनिफॉर्म का पालन अनिवार्य

इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: स्कूलों में हिजाब पहनने की इजाजत देने से इनकार, कहा- धर्मनिरपेक्षता के लिए यूनिफॉर्म का पालन जरूरी

​प्रयागराज: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शिक्षण संस्थानों में धार्मिक पोशाक और यूनिफॉर्म को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि स्कूल परिसर में निर्धारित ड्रेस कोड का पालन करना हर छात्र के लिए अनिवार्य है और धर्मनिरपेक्षता (Secularism) के सिद्धांत को बनाए रखने के लिए यूनिफॉर्म लागू करना संवैधानिक रूप से सही है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने एक नाबालिग मुस्लिम छात्रा द्वारा स्कूल में हिजाब पहनने की अनुमति मांगने वाली याचिका को खारिज कर दिया।

​क्या है पूरा मामला?

​यह मामला जौनपुर जिले के एक निजी स्कूल से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता छात्रा के परिजनों ने स्कूल प्रशासन के उस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें यूनिफॉर्म कोड का हवाला देते हुए छात्रा को कक्षा के भीतर हिजाब पहनकर बैठने से रोका गया था। याचिका में तर्क दिया गया था कि हिजाब पहनना उनके धार्मिक अधिकारों के अंतर्गत आता है और यह संविधान के अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार) द्वारा संरक्षित है।

​हाईकोर्ट की मुख्य टिप्पणियां

  • ​यूनिफॉर्म का उद्देश्य समानता: अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि शिक्षण संस्थानों में यूनिफॉर्म लागू करने का मुख्य उद्देश्य छात्रों के बीच जाति, धर्म या आर्थिक असमानता को भुलाकर अनुशासन और समानता का माहौल तैयार करना है।
  • ​संस्थान के नियमों का सम्मान: पीठ ने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान को अपनी अनुशासन संहिता और ड्रेस कोड तय करने का पूरा अधिकार है। जब कोई छात्र किसी स्कूल में प्रवेश लेता है, तो उसे वहां के नियमों का पालन करना होता है।
  • ​धर्मनिरपेक्षता सर्वोपरि: कोर्ट ने कहा कि धर्मनिरपेक्ष माहौल बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि कक्षा के भीतर किसी भी प्रकार की धार्मिक पहचान या पोशाक को यूनिफॉर्म से ऊपर न रखा जाए।

​निर्णय का प्रभाव

​हाईकोर्ट के इस फैसले से साफ हो गया है कि स्कूलों में यूनिफॉर्म कोड ही सर्वोपरि रहेगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि मौलिक अधिकार असीमित नहीं हैं और शिक्षण संस्थानों के अनुशासन एवं सार्वजनिक व्यवस्था के तहत इन पर तर्कसंगत प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

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