एफसीआर डॉ. सुमिता मिश्रा ने उपायुक्तों को छूटे हुए लोगों और दोहरी गणना रोकने के निर्देश दिए; राज्य में लगभग 70,000 प्रगणना ब्लॉक बनाए जाने की योजना
मनोज शर्मा,चंडीगढ़ । हरियाणा सरकार ने जनगणना 2027 के तहत 100 प्रतिशत जनसंख्या कवरेज सुनिश्चित करने का लक्ष्य निर्धारित करते हुए जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि कोई भी व्यक्ति अथवा परिवार जनगणना से छूट न जाए। इसके लिए सख्त जवाबदेही, गहन फील्ड निगरानी और समयबद्ध तैयारियों पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि जनगणना के दौरान किसी प्रकार की चूक, दोहरी गणना या आंकड़ों में त्रुटि की संभावना न रहे।
जनगणना के प्रथम चरण में राज्य के 51,907 हाउस लिस्टिंग ब्लॉकों को सफलतापूर्वक कवर किया जा चुका है। अब हरियाणा दूसरे चरण में जनसंख्या गणना की तैयारियों में जुट गया है। इस चरण में रिजर्व कर्मियों सहित लगभग 87,450 प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों की तैनाती की संभावना है, जो लगभग 70,000 प्रगणना ब्लॉकों में कार्य करेंगे।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तीय आयुक्त एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा, जो जनगणना 2027 के लिए राज्य नोडल अधिकारी भी हैं, ने आज यहां हरियाणा निवास में आयोजित प्रधान जनगणना अधिकारियों के एक दिवसीय सम्मेलन में ये निर्देश दिए।
जनगणना 2027 को राष्ट्र निर्माण, विकास योजना और प्रभावी सुशासन से सीधे जुड़ी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय जिम्मेदारी बताते हुए डॉ. मिश्रा ने कहा कि जनगणना की विश्वसनीयता सटीक गणना, प्रशासनिक जिम्मेदारियों के स्पष्ट निर्धारण और जिला स्तर पर प्रभावी निगरानी पर निर्भर करेगी।
उन्होंने कहा, “जनगणना के आंकड़ों की गुणवत्ता काफी हद तक जिला स्तर पर गंभीरता, नेतृत्व और फील्ड पर्यवेक्षण पर निर्भर करती है।” उन्होंने उपायुक्तों को जनगणना की तैयारियों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने, चार्ज अधिकारियों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें करने तथा जनसंख्या गणना शुरू होने से पहले संभावित परिचालन संबंधी समस्याओं की पहचान करने के निर्देश दिए।
डॉ. मिश्रा ने स्पष्ट किया कि जनगणना के कार्य को अतिरिक्त विभागीय जिम्मेदारी के बजाय प्राथमिकता वाले कार्य के रूप में लिया जाना चाहिए। उन्होंने तैयारियों में अधिक स्वामित्व, जिम्मेदारियों के स्पष्ट निर्धारण और निर्धारित समयसीमा का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा।
उन्होंने कहा, “कवरेज, सटीकता और गोपनीयता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।” उन्होंने जिला प्रशासन को दुर्गम क्षेत्रों, तेजी से विकसित हो रही आवासीय बस्तियों, बहुमंजिला इमारतों, शहरी झुग्गी-बस्तियों तथा बड़ी संख्या में प्रवासी आबादी वाले क्षेत्रों के लिए विशेष परिचालन योजनाएं तैयार करने के निर्देश दिए।
उन्होंने संभावित कवरेज गैप की पहचान करने, दोहरी गणना रोकने और फील्ड स्तर पर निगरानी मजबूत करने के लिए तकनीक तथा उपलब्ध प्रशासनिक सूचनाओं के प्रभावी उपयोग पर भी जोर दिया।
सम्मेलन में प्रस्तुत परिचालन रोडमैप के अनुसार, जनसंख्या गणना के दूसरे चरण में हरियाणा के 23 जिलों, 6,522 गांवों और 88 कस्बों को शामिल करते हुए लगभग 70,000 प्रगणना ब्लॉकों में कार्य किया जाएगा। इस दौरान लगभग 74,800 प्रगणक और 12,650 पर्यवेक्षक, जिसमें रिजर्व कर्मी भी शामिल हैं, 203 जनगणना चार्जों में कार्य करेंगे। इनकी निगरानी 34 प्रधान जनगणना अधिकारियों द्वारा की जाएगी।
आगामी जनगणना की प्रमुख विशेषता डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग होगा। जनसंख्या गणना के लिए समर्पित मोबाइल एप्लिकेशन, ऑनलाइन स्व-गणना (Self-Enumeration) और केंद्रीकृत निगरानी प्रणाली का उपयोग किया जाएगा, जिससे कार्य में दक्षता, पारदर्शिता और आंकड़ों की सटीकता बढ़ाई जा सके।
डॉ. मिश्रा ने जनगणना ड्यूटी से छूट मांगने वाले आवेदनों की भी कड़ाई से जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से उन कर्मियों के मामलों की भी समीक्षा करने को कहा, जिन्होंने जनगणना के पहले चरण में ड्यूटी निभाई थी।
उन्होंने कहा कि सक्षम कर्मियों का चयन, समय पर नियुक्तियां और व्यापक प्रशिक्षण जनगणना की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। प्रधान जनगणना अधिकारियों के सम्मेलन के साथ प्रशिक्षण गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं और इसके बाद चार्ज अधिकारियों, मास्टर ट्रेनरों, फील्ड ट्रेनरों, प्रगणकों तथा पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में निर्धारित प्रक्रियाओं, डिजिटल एप्लिकेशन और परिचालन संबंधी जिम्मेदारियों से कर्मियों को परिचित कराया जाएगा।
उन्होंने चार्ज अधिकारियों को फील्ड कर्मियों के साथ नियमित संवाद बनाए रखने तथा पर्यवेक्षकों के साथ साप्ताहिक बैठकें आयोजित कर परिचालन संबंधी समस्याओं की पहचान और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
एफसीआर ने जनगणना कर्मियों के कल्याण और परिचालन संबंधी तैयारियों पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने जिला प्रशासन को पर्याप्त प्रशिक्षण सुविधाएं, सुरक्षा व्यवस्था, लॉजिस्टिक सहायता और आवश्यक प्रशासनिक सहयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) के माध्यम से लंबित मानदेय भुगतान शीघ्र जारी करने पर जोर दिया, ताकि जनगणना कार्य में लगे कर्मियों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी न हो। सम्मेलन में प्रस्तुत वित्तीय प्रावधानों के अनुसार, प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को दोनों चरणों के लिए कुल 25,000 रुपये का मानदेय मिलेगा, जिसमें हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन के लिए 9,000 रुपये और जनसंख्या गणना के लिए 16,000 रुपये शामिल हैं।
जनगणना की सफलता में आम जनता की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए डॉ. मिश्रा ने उपायुक्तों को व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने तथा अफवाहों और गलत सूचनाओं का तथ्यों के आधार पर तत्काल खंडन करने के निर्देश दिए।
सरकार द्वारा शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के परिवारों तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया, शिक्षण संस्थानों, ग्राम पंचायतों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWAs), दीवार लेखन तथा पारंपरिक जन उद्घोषणा माध्यमों का उपयोग किया जाएगा। गीता जयंती और सूरजकुंड मेले जैसे प्रमुख जनसमागमों का उपयोग भी जनगणना 2027 के प्रति जागरूकता बढ़ाने और नागरिकों को स्व-गणना के लिए प्रोत्साहित करने हेतु किया जाएगा।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि जनगणना के दौरान एकत्र की गई व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता का Census Act, 1948 तथा निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुरूप कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए।
उन्होंने जनगणना के सुचारू संचालन के लिए राजस्व, शिक्षा, पुलिस, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, शहरी स्थानीय निकाय, पंचायती राज संस्थाओं, सूचना प्रौद्योगिकी तथा जनसंपर्क विभागों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि प्रशासनिक बाधाओं को दूर कर फील्ड कार्य निर्बाध रूप से संचालित किया जा सके।
उन्होंने कहा, “जनगणना 2027 की सफलता अंततः तैयार किए गए आंकड़ों की गुणवत्ता में दिखाई देगी।” उन्होंने रेखांकित किया कि जिला स्तर पर प्रभावी नेतृत्व ही जनगणना की विश्वसनीयता निर्धारित करेगा।
हरियाणा के जनगणना निदेशक डॉ. ललित जैन ने अधिकारियों को तकनीकी एवं परिचालन संबंधी तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि जनगणना 2027 भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी। उन्होंने बताया कि प्रगणक स्मार्टफोन पर समर्पित मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से जनसंख्या संबंधी जानकारी दर्ज करेंगे। वहीं, Census Management and Monitoring System (CMMS) के माध्यम से फील्ड संचालन, प्रशासनिक प्रगति और जनगणना से जुड़े अधिकारियों के बीच समन्वय की निगरानी की जाएगी।
सम्मेलन में प्रस्तुत कार्यक्रम के अनुसार, नागरिक 10 जनवरी से 24 जनवरी 2027 तक Self-Enumeration Portal के माध्यम से ऑनलाइन अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक घर-घर जाकर जनसंख्या गणना की जाएगी। इसके पश्चात 1 मार्च से 5 मार्च 2027 तक पांच दिवसीय पुनरीक्षण दौर आयोजित किया जाएगा, जिसमें छूटे हुए व्यक्तियों की पहचान, विसंगतियों का सुधार और पूर्ण कवरेज सुनिश्चित किया जाएगा।
जनगणना की संदर्भ तिथि एवं समय 1 मार्च 2027 को 00:00 बजे निर्धारित किया गया है। स्व-गणना का विकल्प चुनने वाले परिवारों का भी प्रगणकों द्वारा घर जाकर सत्यापन किया जाएगा। पर्यवेक्षक 20 प्रतिशत रिकॉर्ड का सत्यापन करेंगे, जबकि चार्ज अधिकारियों को ऐसे रिकॉर्ड चिन्हित करने की सुविधा होगी, जिनमें अतिरिक्त फील्ड सत्यापन की आवश्यकता हो।
सम्मेलन में जनसंख्या गणना की प्रक्रियाओं, प्रश्नावली, डिजिटल एप्लिकेशन, Self-Enumeration Portal, वैधानिक प्रावधानों तथा विशेष क्षेत्रों में जनगणना की व्यवस्थाओं से संबंधित तकनीकी सत्र भी आयोजित किए गए।
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव, सेवा विभाग, डॉ. जी. अनुपमा; अतिरिक्त मुख्य सचिव, विकास एवं पंचायत विभाग, विजयेंद्र कुमार; निदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग, डॉ. प्रियंका सोनी; मंडल आयुक्तों, उपायुक्तों तथा जनगणना विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


