नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस के असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) विवेक भगत को पदोन्नत (Promote) कर एडिशनल डीसीपी (ADCP) बना दिया गया है। जंतर-मंतर पर महिला पत्रकारों के साथ हुई कथित बदसलूकी के विवाद के ठीक बाद आए इस फैसले पर अब बड़ा राजनीतिक और सामाजिक घमासान शुरू हो गया है। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इस प्रमोशन को लेकर दिल्ली पुलिस और प्रशासन पर तीखे सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
इस पूरे मामले पर सीजेपी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर कड़ा ऐतराज जताते हुए तंज कसा है। उन्होंने सवाल उठाया, “क्या यह छेड़छाड़ का इनाम है?”
क्या है पूरा विवाद और आरोप?
हाल ही में जंतर-मंतर पर आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कवरेज कर रहीं कुछ महिला पत्रकारों ने एसीपी विवेक भगत पर गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायतों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान ड्यूटी पर तैनात अधिकारी ने महिला पत्रकारों के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की की, गलत तरीके से छुआ और दुर्व्यवहार किया। इस घटना के बाद तीन महिला पत्रकारों की तरफ से मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद से ही यह मामला लगातार तूल पकड़ रहा है।
नियमित प्रक्रिया या गलत टाइमिंग?
दिल्ली सरकार के गृह विभाग और उपराज्यपाल कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, वर्ष 2017 बैच के DANIPS अधिकारी विवेक भगत समेत कुल 12 अधिकारियों को एडिशनल डीसीपी के पद पर पदोन्नत किया गया है।
प्रशासनिक सूत्रों और दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह एक रूटीन (नियमित) प्रमोशन प्रक्रिया है। इसके लिए विभागीय औपचारिकताएं और प्रस्ताव काफी समय पहले ही तैयार कर लिए गए थे। हालांकि, आलोचकों और विपक्षी संगठनों का कहना है कि इतने गंभीर आरोपों की जांच पूरी होने तक इस तरह का फैसला टाल दिया जाना चाहिए था।
दिल्ली पुलिस का रुख और जांच की स्थिति
शुरुआती तौर पर दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे कुछ वीडियो क्लिप्स भ्रामक और संदर्भ से बाहर (Manipulated) हैं।
हालांकि, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए इस पूरी शिकायत की जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है। अब क्राइम ब्रांच इस बात की पड़ताल कर रही है कि प्रदर्शन स्थल पर वास्तव में क्या हुआ था और आरोपों में कितनी सच्चाई है।


