नई दिल्ली:
देश की राजधानी दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में महिलाओं व नाबालिगों के खिलाफ हाल ही में हुए दर्दनाक यौन शोषण और गैंगरेप के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बेहद सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने इन घटनाओं को कानून व्यवस्था की “सिस्टमैटिक विफलता” (Systemic Failure) करार देते हुए दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है.
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने इस मामले पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए स्पष्ट कहा कि पुलिस का मुख्य फोकस अपराध होने के बाद अपराधियों को पकड़ने पर नहीं, बल्कि अपराध को रोकने (Crime Prevention) पर होना चाहिए.
“हर पीड़ित लड़की हमारी बहन और मां है”
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान बेहद भावुक और सख्त टिप्पणी करते हुए दिल्ली पुलिस से कहा, “हम आपसे बड़ी उम्मीद के साथ यह कह रहे हैं। आपको इस चुनौती पर खरा उतरना होगा। हर लड़की जिसके साथ छेड़छाड़ या रेप होता है, वह हमारी बहन है, हमारी मां है।” कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि जो लोग भी महिलाओं के खिलाफ अपराध करने की मानसिकता रखते हैं, उनके मन में कानून और पुलिस का ऐसा खौफ होना चाहिए कि वे अपराध करने से डरें.
पार्क और बसें ‘हाई-रिस्क ज़ोन’ नहीं बन सकते
अदालत ने दिल्ली के कालकाजी में आस्था कुंज पार्क में हुई गैंगरेप की घटना, स्वरूप नगर में नाबालिग की गैंगरेप के बाद हत्या और ग्रेटर नोएडा से दिल्ली आ रही चलती स्लीपर बस में हुए यौन उत्पीड़न का प्रमुखता से जिक्र किया.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि खराब रोशनी (Dark Spots), ढीली गश्त (Lax Patrolling) और प्रशासनिक खामियों के कारण सार्वजनिक स्थल, पार्क या बसें महिलाओं के लिए ‘हाई-रिस्क ज़ोन’ (खतरनाक इलाके) नहीं बन सकते.
सुप्रीम कोर्ट के बड़े निर्देश और टिप्पणियां:
- रात 11 बजे भी सुरक्षित महसूस करें महिलाएं: अदालत ने कहा कि सरकार और पुलिस को दिल्ली में ऐसा माहौल सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी महिला रात को 10 या 11 बजे भी सड़कों या मेट्रो में सफर करते समय पूरी तरह सुरक्षित महसूस कर सके.
- कड़े कदम उठाने से न हिचकिचाए पुलिस: जस्टिस पारदीवाला ने कहा, “सिर्फ कागजों पर नीतियां बनाना काफी नहीं है, जमीन पर एक्शन चाहिए। अगर कानून-व्यवस्था के लिए पुलिस को थोड़ा सख्त या कड़ा रुख अपनाना पड़े, तो हिचकिचाएं नहीं। कुछ लोग मानवाधिकारों (Article 21) का हवाला देकर हंगामा करेंगे, लेकिन पुलिस को अपनी ड्यूटी करनी होगी।”
- नेताओं के खोखले बयानों पर नाराजगी: कोर्ट ने घटनाओं के बाद नेताओं द्वारा दिए जाने वाले केवल ‘चिंताजनक’ बयानों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि बिना जवाबदेही की संवेदनाओं से जनता को सुरक्षा नहीं मिलती।
- मीडिया को भी दी नसीहत: शीर्ष अदालत ने मीडिया और पब्लिशिंग प्लेटफॉर्म्स को भी जिम्मेदार पत्रकारिता करने की सलाह दी। कोर्ट ने कहा कि रेप मामलों की रिपोर्टिंग करते समय सनसनीखेज हेडलाइंस और वीभत्स विवरण देने से बचना चाहिए, ताकि पीड़िता और उसके परिवार को दोबारा मानसिक आघात (Secondary Trauma) न पहुंचे.
4 हफ्ते में सुरक्षा ऑडिट की रिपोर्ट तलब
सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए दिल्ली पुलिस, नागरिक निकायों (Civic Authorities) और गृह मंत्रालय को दिल्ली-NCR के सार्वजनिक स्थानों पर स्ट्रीट लाइट्स, सीसीटीवी कैमरों और सुरक्षा इंतजामों का तुरंत ‘विजुअल और सेफ्टी ऑडिट’ करने का आदेश दिया है।
अदालत ने प्राधिकारियों को 4 हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने का समय दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई के दौरान पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है।


