भोजशाला के बाद अब धार की लाट मस्जिद पर नया विवाद, विजय मंदिर होने का दावा; 15 सितंबर को ‘वराह मार्च’ का एलान
धार। मध्य प्रदेश के धार जिले में भोजशाला परिसर को लेकर चल रहे विवादों के बीच अब एक और ऐतिहासिक स्थल को लेकर तनावपूर्ण स्थिति बन गई है। हिंदू संगठनों और ‘सनातन प्रहरी समिति’ ने धार स्थित प्रसिद्ध लाट मस्जिद पर अपना दावा पेश किया है। हिंदू पक्ष का कहना है कि यह परिसर मूल रूप से परमार राजवंश के समय का ऐतिहासिक ‘विजय मंदिर’ (मार्तंड प्रसाद) है।
इस दावे को लेकर जनजागृति फैलाने और मंदिर की मुक्ति की मांग को लेकर संगठनों द्वारा 15 सितंबर को एक विशाल ‘वराह मार्च’ (पैदल यात्रा) निकालने की घोषणा की गई है। हालांकि, इस एलान के बाद से ही क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं।
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क्या है हिंदू पक्ष का दावा?
‘सनातन प्रहरी समिति’ के पदाधिकारियों का दावा है कि वर्तमान में जिसे लाट मस्जिद कहा जाता है, वह असल में राजा भोज के काल का विजय मंदिर है। हिंदू पक्ष के मुताबिक:
- इस परिसर के खंभों, पत्थरों और दीवारों पर प्राचीन सनातन संस्कृति के स्पष्ट साक्ष्य और कलाकृतियां मौजूद हैं।
- परिसर के भीतर भगवान वराह की आकृति/चित्र होने की बात भी कही जा रही है।
- इतिहास का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि प्राचीन काल में मूल मंदिर को क्षति पहुंचाकर उसके अवशेषों से इसका स्वरूप बदला गया था।
कानून-व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने लगाई रोक
इस मार्च के एलान के बाद धार शहर में सांप्रदायिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस बेहद सख्त रुख अपनाए हुए हैं:
- अनुमति निरस्त: प्रशासन ने आगामी 15 सितंबर को प्रस्तावित ‘वराह मार्च’ की अनुमति को सुरक्षा कारणों से तत्काल प्रभाव से निरस्त (Cancel) कर दिया है।
- प्रचार सामग्री पर कार्रवाई: पुलिस और नगर पालिका की टीमों ने शहर में वराह मार्च को लेकर लगाए गए पोस्टर, बैनर और पैम्फलेट्स को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
- सुरक्षा बल तैनात: संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है और सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की भड़काऊ या अफवाह फैलाने वाली पोस्ट पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी
भोजशाला मामले में आए न्यायिक मोड़ों से उत्साहित हिंदू संगठनों का कहना है कि वे लाट मस्जिद के मामले को भी कानूनी दायरे में आगे बढ़ाएंगे। इसके लिए हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस और अन्य कानूनी विशेषज्ञों के माध्यम से अदालत में एक नई याचिका (Petition) दायर करने की तैयारी की जा रही है, ताकि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से इस पूरे परिसर का भी वैज्ञानिक सर्वे कराया जा सके।
प्रशासन की रोक के बाद अब 15 सितंबर को लेकर हिंदू संगठनों का अगला कदम क्या होगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
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