जर्मनी में पहली बार दक्षिणपंथी AfD पार्टी ने जीता चुनाव: यूरोप में बढ़ा राइट विंग का दबदबा; फ्रांस में ले-पेन और ब्रिटेन में नाइजल फराज मजबूत
बर्लिन। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार जर्मनी के राजनीतिक इतिहास में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। जर्मनी के प्रांतीय चुनावों में कट्टरपंथी और अप्रवासी विरोधी विचारधारा वाली दक्षिणपंथी पार्टी ‘अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी’ (AfD) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। AfD की इस सफलता ने न सिर्फ जर्मनी बल्कि पूरे यूरोप की राजनीति में हलचल मचा दी है। यह जीत इस बात का साफ संकेत है कि पूरे यूरोपीय महाद्वीप में दक्षिणपंथी (Right-Wing) पार्टियों का दबदबा तेजी से बढ़ रहा है।
जर्मनी में AfD की ऐतिहासिक जीत
जर्मनी के थुरिंगिया (Thuringia) राज्य में हुए चुनावों में AfD ने सबसे अधिक वोट हासिल कर पहली बार किसी प्रांतीय चुनाव में पहला स्थान पाया है, जबकि पड़ोसी राज्य सेक्सनी (Saxony) में भी पार्टी मामूली अंतर से दूसरे नंबर पर रही। चांसलर ओलाफ शोल्ज की गठबंधन सरकार को इन चुनावों में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। AfD की इस जीत को जर्मनी की पारंपरिक राजनीति के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि दक्षिणपंथी राष्ट्रवाद को वहां लंबे समय तक मुख्यधारा से दूर रखा गया था।
यह भी पढ़े
जो बाइडन के बेटे हंटर बाइडन ला रहे हैं ‘$LAPTOP’ क्रिप्टो कॉइन; ट्रंप के घाटे वाले निवेशकों को मिलेगा फ्री टोकन
यूरोप में ‘राइट विंग’ की लहर: फ्रांस और ब्रिटेन भी शामिल
यह बदलाव सिर्फ जर्मनी तक सीमित नहीं है। यूरोप के अन्य प्रमुख देशों में भी दक्षिणपंथी नेताओं और पार्टियों का ग्राफ तेजी से ऊपर जा रहा है:
- फ्रांस में मरीन ले-पेन मजबूत: फ्रांस की फायरब्रांड दक्षिणपंथी नेता मरीन ले-पेन (Marine Le Pen) की पार्टी ‘नेशनल रैली’ देश में सबसे मजबूत राजनीतिक ताकत बनकर उभरी है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की नीतियों के खिलाफ जनता के गुस्से का सीधा फायदा ले-पेन को मिल रहा है और वे देश की अगली राष्ट्रपति बनने की दौड़ में सबसे आगे दिखाई दे रही हैं।
- ब्रिटेन में नाइजल फराज का उदय: ब्रिटेन में ब्रेक्सिट (Brexit) के सूत्रधार रहे नाइजल फराज (Nigel Farage) की नई पार्टी ‘रिफॉर्म यूके’ ने ब्रिटिश संसद में एंट्री मारकर सबको चौंका दिया है। अप्रवासियों और वैश्विक नीतियों के मुखर विरोधी फराज अब ब्रिटेन की मुख्यधारा की राजनीति में किंगमेकर की भूमिका में आ चुके हैं।
- अन्य देशों का हाल: इटली में पहले से ही जियोर्जिया मेलोनी के नेतृत्व में दक्षिणपंथी सरकार चल रही है, जबकि नीदरलैंड और ऑस्ट्रिया जैसे देशों में भी राइट-विंग पार्टियों ने हालिया चुनावों में अभूतपूर्व जीत हासिल की है।
बदलाव के मुख्य कारण
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पूरे यूरोप में दक्षिणपंथ के उभार के पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
- अवैध अप्रवासन (Immigration): बाहरी देशों से आने वाले शरणार्थियों को लेकर स्थानीय जनता में भारी असंतोष है।
- आर्थिक मंदी और महंगाई: यूक्रेन युद्ध के बाद बढ़े ऊर्जा संकट और महंगाई से आम नागरिक परेशान हैं।
- पारंपरिक पार्टियों से मोहभंग: जनता को लगता है कि पुरानी पार्टियां उनकी सुरक्षा और संस्कृति की रक्षा करने में विफल रही हैं।
यूरोप का यह राजनीतिक झुकाव आने वाले समय में वैश्विक नीतियों, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर सकता है।


