स्मार्टफोन क्रांति: भारत सरकार ने नोटिफाई की ₹62,500 करोड़ की नई मोबाइल मैन्युफैक्चरing स्कीम, कंपनियों को मिलेगा 5% तक का इंसेंटिव
भारत सरकार ने देश में इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) ने ₹62,500 करोड़ के भारी-भरकम बजट वाली ‘मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम’ (MPMS) को आधिकारिक तौर पर नोटिफाई कर दिया है। यह नई योजना 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएगी और अगले पांच वर्षों (वित्त वर्ष 2030-31) तक लागू रहेगी।
इस ऐतिहासिक योजना का मुख्य उद्देश्य भारत को दुनिया का सबसे बड़ा मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब बनाना है। आइए जानते हैं इस स्कीम की सभी बड़ी बातें, जो भारतीय टेक इंडस्ट्री की तस्वीर बदल सकती हैं।
5% तक का बेस इंसेंटिव और कंपोनेंट्स पर अतिरिक्त फायदा
इस योजना के तहत सरकार भारत में मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियों को वित्तीय प्रोत्साहन (Incentives) देगी। सरकार ने इसके स्ट्रक्चर को दो हिस्सों में बांटा है:
- 2.25% से 5% तक का बेस इंसेंटिव: भारत में निर्मित मोबाइल फोन की बढ़ती सेल (Incremental Sales) के आधार पर कंपनियों को 5% तक का नकद इंसेंटिव दिया जाएगा।
- 1.5% का कंपोनेंट बोनस: यदि कंपनियां मोबाइल में इस्तेमाल होने वाले पार्ट्स (जैसे डिस्प्ले, कैमरा मॉड्यूल या पीसीबी) भारत में ही बने सोर्स से खरीदती हैं, तो उन्हें 1.5% का अतिरिक्त इंसेंटिव मिलेगा। यानी कंपनियों को कुल 6.5% तक का फायदा मिल सकता है।
भारतीय और ग्लोबल ब्रांड्स के लिए अलग-अलग नियम
सरकार ने इस स्कीम को इस तरह डिजाइन किया है कि वैश्विक दिग्गजों के साथ-साथ घरेलू (भारतीय) कंपनियों को भी आगे बढ़ने का पूरा मौका मिले:
- ग्लोबल कंपनियों के लिए: वैश्विक स्तर की बड़ी कंपनियों को इस स्कीम का लाभ उठाने के लिए ₹15,000 या उससे अधिक कीमत (Invoiced Value) वाले स्मार्टफोन भारत में बनाने होंगे। साथ ही, उन्हें देश में बड़ा निवेश भी करना होगा।
- घरेलू कंपनियों के लिए नियम में ढील: भारतीय मूल के ब्रांड्स को बढ़ावा देने के लिए ₹15,000 से कम कीमत वाले स्मार्टफोन्स पर भी इंसेंटिव दिया जाएगा, ताकि वे बजट सेगमेंट में चीनी ब्रांड्स को कड़ी टक्कर दे सकें।
₹39 लाख करोड़ का प्रोडक्शन और रोजगार का बड़ा लक्ष्य
सरकार ने इस मेगा स्कीम के जरिए बेहद महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए हैं:
- रिकॉर्ड प्रोडक्शन: अगले 5 वर्षों में सरकार का लक्ष्य देश के भीतर ₹39 लाख करोड़ मूल्य के मोबाइल फोन और उनके कंपोनेंट्स का उत्पादन करना है।
- रोजगार के बंपर अवसर: इस योजना से इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में 60,000 से अधिक डायरेक्ट नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है। इसके अलावा, सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स में लाखों इनडायरेक्ट रोजगार भी मिलेंगे।
एक्सपर्ट्स की राय: भारत बनेगा पूरी तरह ‘आत्मनिर्भर’
बिजनेस और टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह स्कीम भारत को सिर्फ एक ‘असेंबली हब’ (जहां कलपुर्जे जोड़कर फोन बनता है) से बदलकर एक वास्तविक ‘मैन्युफैक्चरिंग हब’ बनाएगी। कंपोनेंट्स पर मिलने वाले अतिरिक्त 1.5% के बोनस के कारण अब दुनिया की बड़ी कंपनियां भारत में ही अपने पार्ट्स के कारखाने लगाने को प्रेरित होंगी, जिससे भारत की चीन पर निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी।


