देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में केंद्र सरकार ने एक युग बदलने वाला ऐतिहासिक फैसला लिया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों (CMVR) में बड़ा संशोधन करते हुए 100% शुद्ध इथेनॉल (E100) को एक आधिकारिक ऑटोमोटिव ईंधन के रूप में हरी झंडी दे दी है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के लंबे समय से चल रहे ड्रीम प्रोजेक्ट और विज़न को अब कानूनी और तकनीकी रूप से पूरी मंजूरी मिल गई है। सरकार के इस कदम से देश में फ्लेक्स-फ्यूल (Flex-Fuel) आधारित हरित गतिशीलता (Green Mobility) के एक नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है।
कच्चे तेल के आयात बिल और प्रदूषण पर लगेगी लगाम
सरकार द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, इस अभूतपूर्व फैसले का सबसे बड़ा उद्देश्य देश की विदेशी तेल पर निर्भरता को खत्म करना है। भारत हर साल लगभग 22 लाख करोड़ रुपये का कच्चा तेल आयात करता है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ पड़ता है। E100 ईंधन के बाजार में आने से इस आयात बिल में भारी कटौती होगी। इसके साथ ही, पारंपरिक पेट्रोल और डीजल की तुलना में इथेनॉल के जलने से बेहद कम कार्बन उत्सर्जन होता है, जिससे मेट्रो शहरों में जानलेवा बन चुके वायु प्रदूषण से बहुत बड़ी राहत मिलेगी।
क्या है E100 ईंधन और यह कैसे काम करेगा?
E100 का सीधा मतलब है लगभग 100 प्रतिशत शुद्ध इथेनॉल ईंधन। वर्तमान में देश में बिकने वाले पेट्रोल में 15 से 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाया जाता है, जिसे E20 ईंधन कहा जाता है। लेकिन सरकार का यह नया फैसला पूरी तरह से इथेनॉल पर चलने वाले वाहनों के रास्ते खोलेगा। यह ईंधन सामान्य या पुरानी पेट्रोल कारों के लिए बिल्कुल नहीं है। इसका उपयोग केवल विशेष रूप से प्रमाणित फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (FFVs) में किया जाएगा। इन गाड़ियों के इंजन और फ्यूल सिस्टम को इस तरह तैयार किया जाता है कि वे बिना किसी खराबी के 85% से लेकर 100% तक के शुद्ध इथेनॉल पर आसानी से दौड़ सकें।
आम गाड़ी मालिकों पर क्या असर होगा?
इस फैसले से उन आम उपभोक्ताओं और गाड़ी मालिकों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा जिनके पास मौजूदा समय में सामान्य पेट्रोल या E20 क्षमता वाली गाड़ियां हैं। उन्हें अपनी गाड़ियों के इंजन में किसी भी तरह का बदलाव कराने की कोई जरूरत नहीं है। वे अपनी गाड़ियों में पहले की तरह ही पेट्रोल भरवाते रहेंगे, क्योंकि वे सीधे अपनी पारंपरिक गाड़ियों में E100 ईंधन का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।
अन्नदाता बनेगा ऊर्जादाता: किसानों को सीधा फायदा
इथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने के रस, शीरे (Molasses), मक्के, टूटे हुए चावल और अन्य खराब हो चुके अनाजों से किया जाता है। ऐसे में देश के भीतर E100 ईंधन की मांग और खपत बढ़ने का सीधा और सबसे बड़ा फायदा भारत के किसानों को मिलेगा। कृषि कचरे और फसलों से ईंधन बनने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और किसानों की आमदनी में रिकॉर्ड बढ़ोतरी होगी। सरकार का स्पष्ट मानना है कि इस नीति से देश का अन्नदाता अब ‘ऊर्जादाता’ की भूमिका में सामने आएगा।
ऑटोमोबाइल कंपनियों ने कसी कमर
सरकार से कानूनी और उत्सर्जन मानकों की अंतिम मंजूरी मिलने के बाद, भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में हलचल तेज हो गई है। मारुति सुजुकी, टोयोटा, टीवीएस और बजाज जैसी दिग्गज कंपनियां पहले से ही फ्लेक्स-फ्यूल इंजन वाली कारों और दोपहिया वाहनों के प्रोटोटाइप पर काम कर रही थीं। अब इस आधिकारिक अधिसूचना के बाद कंपनियां बहुत जल्द भारतीय बाजार में अपनी पहली पूरी तरह से इथेनॉल संचालित (E100) गाड़ियां और मोटरसाइकिलें व्यावसायिक रूप से लॉन्च करने के लिए तैयार हैं।


