Wednesday, October 7, 2026

TOP NEWS

7, 8 और 9...

इंदौर में मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए 7 से 9 अक्टूबर तक सभी मतदान केंद्रों पर विशेष शिविर लगेंगे। कलेक्टर शिवम वर्मा ने नियमों को आसान करते हुए घोषणा पत्र की अनिवार्यता खत्म की है। पूरी खबर पढ़ें।

MP News: उज्जैन-इंदौर रोड...

उज्जैन-इंदौर रोड पर 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा' की चलती बस में लगी भीषण आग। यात्रियों ने खिड़की से कूदकर बचाई जान। जानिए सुगम या सूत्र सेवा का पूरा विवाद।

8 सूत्रीय मांगों को...

( संवाददाता प्रफुल्ल तंवर )एनटीवी टाइम न्यूज पीथमपुर/ औद्योगिक शहर पीथमपुर में नगर...

अखिल भारत हिंदू महासभा...

अखिल भारत हिंदू महासभा ने सतीश दीक्षित को बनाया नगर उपाध्यक्षबीसलपुर। अखिल भारत...
Homeधर्महरतालिका तीज 2026 पर बन रहा है दुर्लभ महासंयोग, इस विधि से...

हरतालिका तीज 2026 पर बन रहा है दुर्लभ महासंयोग, इस विधि से पूजा करने पर मिलेगा अखंड सौभाग्य का वरदान

सनातन परंपरा में अखंड सौभाग्य के प्रतीक माने जाने वाले हरतालिका तीज के महापर्व पर इस बार एक बेहद दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहा है। पंचांग के अनुसार, इस साल हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी दोनों त्योहार एक ही दिन यानी 14 सितंबर 2026 (सोमवार) को मनाए जा रहे हैं। सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है, इसलिए इस दिन तृतीया तिथि और चतुर्थी का यह मिलन व्रती महिलाओं के लिए अत्यंत फलदायी और समृद्धि कारक माना जा रहा है।

क्यों मनाई जाती है हरतालिका तीज और पूजा विधि?

पौराणिक मान्यताओं (शिव पुराण) के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए गंगा तट पर बेहद कठिन और निराहार तपस्या की थी।

  • नाम का महत्व: ‘हरतालिका’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है— ‘हरत’ (हरण) और ‘आलिका’ (सखी)। जब माता पार्वती के पिता उनका विवाह भगवान विष्णु से करना चाहते थे, तब पार्वती जी की सखियां उनका हरण करके घने जंगल में ले गई थीं ताकि वे अपनी इच्छा से भगवान शिव के लिए तपस्या कर सकें।
  • पूजा की मुख्य विधि: इस दिन सुहागिन महिलाएं और अविवाहित कन्याएं पूरे 24 घंटे का कठिन निर्जला व्रत (बिना अन्न और जल के) रखती हैं। शाम के समय (प्रदोष काल में) मिट्टी या बालू रेत से भगवान शिव, माता पार्वती और श्री गणेश की मूर्तियां बनाई जाती हैं। इसके बाद उनका विधि-विधान से ‘सोलह श्रृंगार’ कर पूजन किया जाता है और रात भर जागकर भजन-कीर्तन व व्रत कथा का पाठ होता है।

क्या है इस बार का विशेष महासंयोग?

ज्योतिषचार्यों के अनुसार, 13 सितंबर को सुबह 07:08 बजे से तृतीया तिथि शुरू हो चुकी है, जो 14 सितंबर 2026 को सुबह 07:06 बजे तक रहेगी। उदयातिथि की मान्यता के अनुसार, मुख्य व्रत और पूजा 14 सितंबर (सोमवार) को की जा रही है।

  1. सोमवार और शिव योग का मिलन: भोलेनाथ के प्रिय दिन ‘सोमवार’ को ही माता पार्वती के व्रत का पूर्ण होना अपने आप में अद्भुत है।
  2. गणेश जी का साथ: तृतीया तिथि समाप्त होते ही चतुर्थी लग रही है, जिससे शिव-पार्वती पूजा के साथ-साथ गणपति बप्पा का आगमन भी एक ही दिन हो रहा है। इस संयोग में पूजा करने से वैवाहिक जीवन के सारे कष्ट दूर होते हैं और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments