Friday, October 30, 2026

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हरतालिका तीज 2026 पर बन रहा है दुर्लभ महासंयोग, इस विधि से पूजा करने पर मिलेगा अखंड सौभाग्य का वरदान

सनातन परंपरा में अखंड सौभाग्य के प्रतीक माने जाने वाले हरतालिका तीज के महापर्व पर इस बार एक बेहद दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहा है। पंचांग के अनुसार, इस साल हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी दोनों त्योहार एक ही दिन यानी 14 सितंबर 2026 (सोमवार) को मनाए जा रहे हैं। सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है, इसलिए इस दिन तृतीया तिथि और चतुर्थी का यह मिलन व्रती महिलाओं के लिए अत्यंत फलदायी और समृद्धि कारक माना जा रहा है।

क्यों मनाई जाती है हरतालिका तीज और पूजा विधि?

पौराणिक मान्यताओं (शिव पुराण) के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए गंगा तट पर बेहद कठिन और निराहार तपस्या की थी।

  • नाम का महत्व: ‘हरतालिका’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है— ‘हरत’ (हरण) और ‘आलिका’ (सखी)। जब माता पार्वती के पिता उनका विवाह भगवान विष्णु से करना चाहते थे, तब पार्वती जी की सखियां उनका हरण करके घने जंगल में ले गई थीं ताकि वे अपनी इच्छा से भगवान शिव के लिए तपस्या कर सकें।
  • पूजा की मुख्य विधि: इस दिन सुहागिन महिलाएं और अविवाहित कन्याएं पूरे 24 घंटे का कठिन निर्जला व्रत (बिना अन्न और जल के) रखती हैं। शाम के समय (प्रदोष काल में) मिट्टी या बालू रेत से भगवान शिव, माता पार्वती और श्री गणेश की मूर्तियां बनाई जाती हैं। इसके बाद उनका विधि-विधान से ‘सोलह श्रृंगार’ कर पूजन किया जाता है और रात भर जागकर भजन-कीर्तन व व्रत कथा का पाठ होता है।

क्या है इस बार का विशेष महासंयोग?

ज्योतिषचार्यों के अनुसार, 13 सितंबर को सुबह 07:08 बजे से तृतीया तिथि शुरू हो चुकी है, जो 14 सितंबर 2026 को सुबह 07:06 बजे तक रहेगी। उदयातिथि की मान्यता के अनुसार, मुख्य व्रत और पूजा 14 सितंबर (सोमवार) को की जा रही है।

  1. सोमवार और शिव योग का मिलन: भोलेनाथ के प्रिय दिन ‘सोमवार’ को ही माता पार्वती के व्रत का पूर्ण होना अपने आप में अद्भुत है।
  2. गणेश जी का साथ: तृतीया तिथि समाप्त होते ही चतुर्थी लग रही है, जिससे शिव-पार्वती पूजा के साथ-साथ गणपति बप्पा का आगमन भी एक ही दिन हो रहा है। इस संयोग में पूजा करने से वैवाहिक जीवन के सारे कष्ट दूर होते हैं और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
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