भारतीय उच्च शिक्षा और करियर प्राथमिकताओं में एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मंडी और बेंगलुरु की रेवा यूनिवर्सिटी द्वारा संयुक्त रूप से जारी की गई ‘GUESSS इंडिया राष्ट्रीय सर्वेक्षण रिपोर्ट’ के अनुसार, भारत में हर पांच में से एक कॉलेज छात्र (लगभग 22 प्रतिशत) अपनी पढ़ाई के दौरान ही उद्यमिता (Entrepreneurship) से जुड़ चुका है और अपना खुद का व्यवसाय संचालित कर रहा है।
यह निष्कर्ष वैश्विक औसत (23 प्रतिशत) के बेहद करीब है, जो यह दर्शाता है कि भारतीय छात्र अब केवल रोजगार की तलाश करने के बजाय कॉलेज के दिनों से ही आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।
25 हजार से अधिक छात्रों पर आधारित प्रामाणिक अध्ययन
“हम छात्र उद्यमी कैसे बनाएं?” शीर्षक से जारी की गई इस विस्तृत रिपोर्ट का नेतृत्व आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पूरन सिंह और प्रेरक शर्मा ने किया है। इस देशव्यापी अध्ययन के तहत भारत के 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 1,200 से अधिक उच्च शिक्षण संस्थानों के 25,783 छात्रों के डेटा का विश्लेषण किया गया है, जो इसे छात्र उद्यमिता पर देश का सबसे विश्वसनीय और बड़ा सर्वे बनाता है।
पारंपरिक नौकरियों के प्रति घटा आकर्षण
रिपोर्ट के तुलनात्मक आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले कुछ वर्षों में छात्रों के बीच पारंपरिक और निश्चित नौकरियों के प्रति प्राथमिकताएं बदली हैं:
- सरकारी नौकरियां: पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद सरकारी सेवा में जाने की इच्छा रखने वाले छात्रों का ग्राफ 12.7 प्रतिशत से घटकर अब 10.1 प्रतिशत रह गया है।
- कॉरपोरेट कंपनियां: किसी बड़ी निजी या मल्टीनेशनल कंपनी में सीधे नौकरी (Placement) पाने की चाहत रखने वाले छात्रों की संख्या भी 31.3 प्रतिशत से घटकर 27.4 प्रतिशत पर आ गई है।
- स्वयं का स्टार्टअप: इसके विपरीत, कॉलेज खत्म करते ही सीधे अपना नया बिजनेस या स्टार्टअप शुरू करने की योजना बनाने वाले छात्रों की तादाद 14 प्रतिशत से बढ़कर 16.2 प्रतिशत हो गई है।
वास्तविक राजस्व (Revenue) कमा रहे हैं छात्र
यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि छात्रों के प्रयास सिर्फ कागजी आइडिया तक सीमित नहीं हैं। बिजनेस संचालित कर रहे छात्रों में से 35.5 प्रतिशत छात्र ऐसे हैं जिनकी कंपनियों में नियमित बिक्री (Regular Sales) शुरू हो चुकी है। वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 33 प्रतिशत है, जिससे यह साफ है कि भारतीय छात्र बाजार की जमीनी जरूरतों के हिसाब से काम कर रहे हैं। इनमें से लगभग 31 प्रतिशत सफल बिजनेस हाल ही में शुरू किए गए हैं।
जोखिम लेने की क्षमता में बढ़ोतरी
अध्ययन में भारतीय छात्रों की ‘रिस्क टेकिंग एबिलिटी’ को लेकर भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। वर्तमान में व्यवसाय चला रहे छात्रों में से 41 प्रतिशत युवा ऐसे हैं जो पहले एक बार अपना कोई प्रोजेक्ट या बिजनेस बंद कर चुके हैं और दोबारा एक नई शुरुआत के साथ बाजार में उतरे हैं। इसके अतिरिक्त, करीब 42 प्रतिशत छात्र ऐसे हैं जो एक साथ दो या उससे अधिक छोटे-बड़े व्यावसायिक उपक्रम संभाल रहे हैं।
तकनीकी रुचि और जमीनी चुनौतियां
सर्वेक्षण के अनुसार, देश के 100 में से 43 छात्र भविष्य में बिजनेस शुरू करने की इच्छा रखते हैं, जिनमें से अधिकांश की पहली पसंद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), आईटी (IT) और डिजिटल सर्विसेज हैं। हालांकि, रिपोर्ट में एक अंतर भी रेखांकित किया गया है कि वर्तमान में जमीन पर चल रहे छात्र व्यवसायों में से केवल 10 प्रतिशत ही पूरी तरह से डिजिटल हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कॉलेज परिसरों में मिल रहे इनक्यूबेशन सपोर्ट और स्टार्टअप नीतियों के कारण सकारात्मक माहौल बना है। यदि इन छात्रों को शुरुआती स्तर पर बेहतर मेंटरशिप और वित्तीय सहायता (Funding) मिले, तो देश के आर्थिक विकास को और गति मिल सकती है।


