Wednesday, October 7, 2026

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हाईकोर्ट से इंदौर के भाजपा पार्षद कमलेश कालरा को बड़ी राहत, OBC प्रमाण पत्र को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

हाईकोर्ट से इंदौर के भाजपा पार्षद कमलेश कालरा को बड़ी राहत, OBC प्रमाण पत्र को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

इंदौर:मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने इंदौर नगर निगम के वार्ड क्रमांक 65 से भाजपा पार्षद कमलेश कालरा को एक बड़े कानूनी मामले में बड़ी राहत दी है। न्यायालय ने उनके अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) जाति प्रमाण पत्र की वैधता को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका को पूरी तरह से निरस्त कर दिया है। यह याचिका वर्ष 2022 के नगर निगम चुनाव में उनके निकटतम प्रतिद्वंदी रहे कांग्रेस प्रत्याशी सुनील यादव द्वारा दायर की गई थी, जिसके खारिज होने के बाद कालरा की सदस्यता पर मंडरा रहा कानूनी संकट पूरी तरह समाप्त हो गया है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022 के नगरीय निकाय चुनाव में इंदौर नगर निगम का वार्ड 65 अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित घोषित किया गया था, जहाँ से भाजपा के टिकट पर कमलेश कालरा ने जीत दर्ज की थी। चुनाव परिणाम आने के बाद पराजित कांग्रेस प्रत्याशी सुनील यादव ने हाईकोर्ट की शरण लेते हुए आरोप लगाया था कि कालरा ने चुनाव लड़ने के लिए ‘लोहार’ जाति का फर्जी OBC प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट के निर्देश पर एक उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति का गठन भी किया गया था, जिसने दस्तावेजों की लंबी और सूक्ष्मता से जांच की थी।

न्यायालय में सुनवाई के दौरान पार्षद कमलेश कालरा का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता प्रसन्ना आर. भटनागर ने रखा। उन्होंने अदालत के समक्ष पुख्ता राजस्व रिकॉर्ड और वैध सरकारी दस्तावेज प्रस्तुत कर प्रमाण पत्र को नियमानुसार सही ठहराया। माननीय न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद याचिकाकर्ता के आरोपों को निराधार पाया और याचिका को खारिज करने का आदेश सुनाया।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कमलेश कालरा हाल ही में इंदौर की स्थानीय राजनीति के एक बड़े विवाद के केंद्र में रहे हैं। दरअसल, कुछ दिन पहले ही महापौर-इन-काउंसिल (MIC) में पार्षद जीतू यादव की दोबारा नियुक्ति और अहम प्रभार दिए जाने के विरोध में कमलेश कालरा अपने परिवार सहित राजबाड़ा स्थित देवी अहिल्या प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठ गए थे। इसके बाद भाजपा की वरिष्ठ विधायक मालिनी गौड़ और संगठन पदाधिकारियों की मध्यस्थता व समझाइश के बाद ही उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया था। इस बड़े सियासी ड्रामे के तुरंत बाद आए अदालती फैसले को भाजपा खेमे और विशेषकर कालरा समर्थकों के लिए एक बड़ी नैतिक व कानूनी जीत माना जा रहा है।

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