KEDARNATH YATRA UPDATE: केदारनाथ पैदल मार्ग पर तड़के फटा बादल, चीरबासा में भारी भूस्खलन; रोकी गई यात्रा, DDMA ने शुरू किया रेस्क्यू
रुद्रप्रयाग (NTV Time):
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में मौसम के अचानक करवट लेने से एक बार फिर केदारनाथ धाम की यात्रा प्रभावित हुई है। शुक्रवार (11 सितंबर) तड़के रुद्रप्रयाग जिले में गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर चीरबासा हेलीपैड के समीप अचानक बादल फटने (Cloudburst) की खबर सामने आई है। बादल फटने के बाद पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आ गिरा, जिससे करीब 150 मीटर के दायरे में भारी भूस्खलन (Landslide) हुआ है। सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने केदारनाथ यात्रा को तुरंत रोक दिया है।
तड़के 3:30 बजे हुआ हादसा, बची बड़ी जनहानि
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह हादसा शुक्रवार तड़के करीब 3:30 बजे हुआ। गनीमत यह रही कि उस समय पैदल मार्ग पर श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू नहीं हुई थी, जिसके कारण एक बहुत बड़ा हादसा टल गया और किसी भी प्रकार की जनहानि या किसी यात्री के घायल होने की खबर नहीं है।
गौरीकुंड और सोनप्रयाग में रोके गए श्रद्धालु
भूस्खलन के बाद चीरबासा के पास रास्ते पर बड़े-बड़े बोल्डर (चट्टानें) और भारी मलबा जमा हो गया है। यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए पुलिस और प्रशासन ने तुरंत एक्शन लिया है:
- गौरीकुंड से केदारनाथ की तरफ जाने वाले श्रद्धालुओं को तुरंत रोक दिया गया है।
- सोनप्रयाग, लिनचोली और भीमबली जैसे प्रमुख पड़ावों पर यात्रियों को सुरक्षित ठहराया गया है।
- मार्ग पर चलने वाले घोड़े-खच्चरों और डंडियों के संचालन को भी फिलहाल पूरी तरह बंद रखा गया है।
युद्ध स्तर पर जारी है मलबा हटाने का काम
घटना की सूचना मिलते ही जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA), SDRF और लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीमें रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए मौके पर पहुंच गईं। मार्ग को सुचारू करने के लिए बोल्डर तोड़ने और मलबा साफ करने का काम तेजी से जारी है। हालांकि, पहाड़ी से अभी भी रुक-रुक कर छोटे पत्थर गिर रहे हैं, जिससे काम में थोड़ी रुकावट आ रही है।
NTV Time की अपील: मौसम देखकर ही आगे बढ़ें यात्री
केदारनाथ धाम और आस-पास की घाटी में लगातार हो रही हल्की बारिश और घने बादलों के कारण तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। धाम में वर्तमान तापमान 5 से 7 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है, जिससे कड़ाके की ठंड पड़ रही है। प्रशासन ने सभी तीर्थयात्रियों से अपील की है कि वे पहाड़ों में लगातार बदल रहे मौसम की सटीक जानकारी लेने के बाद ही अपनी आगे की यात्रा की योजना बनाएं।


