Wednesday, October 7, 2026

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मुंबई में हाई-प्रोफाइल ‘स्पर्म डोनेशन’ रैकेट का पर्दाफाश; वीआईपी दंपत्तियों से वसूल रहे थे करोड़ों रुपये, मुख्य महिला सरगना गिरफ्तार

मुंबई में हाई-प्रोफाइल ‘स्पर्म डोनेशन’ रैकेट का पर्दाफाश; वीआईपी दंपत्तियों से वसूल रहे थे करोड़ों रुपये, मुख्य महिला सरगना गिरफ्तार

मुंबई, 11 सितंबर 2026: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की कांदिवली पुलिस ने आज एक ऐसे बेहद शातिर और हाई-प्रोफाइल ब्लैकमेलिंग रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जो सरोगेसी, आईवीएफ (IVF) और स्पर्म डोनेशन के नाम पर अमीर महिलाओं और एलीट क्लास (VIP) के निसंतान दंपत्तियों को अपना शिकार बना रहा था। पुलिस ने आज सुबह एक गुप्त सूचना और तकनीकी सर्विलांस के आधार पर इस गिरोह की मुख्य महिला सरगना को गिरफ्तार कर लिया है।

कैसे काम करता था यह ‘डार्क रैकेट’?

पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह खुद को प्रतिष्ठित फर्टिलिटी क्लीनिक और मेडिकल कंसल्टेंसी फर्म का प्रतिनिधि बताकर सोशल मीडिया और डार्क वेब के जरिए अमीर परिवारों से संपर्क साधता था।

  • गोपनीयता का झांसा: गिरोह उन वीआईपी दंपत्तियों को निशाना बनाता था जो सामाजिक बदनामी या प्राइवेसी के डर से पूरी तरह गुप्त तरीके से स्पर्म डोनेशन या आईवीएफ प्रोसीजर चाहते थे।
  • फर्जी कॉन्ट्रैक्ट और डेटा चोरी: यह गिरोह पीड़ितों से भारी-भरकम फीस लेकर फर्जी मेडिकल एग्रीमेंट साइन करवाता था और उनके बेहद निजी मेडिकल रिकॉर्ड्स, पहचान पत्र और पारिवारिक जानकारी चुरा लेता था।

‘बदनामी का डर’ और करोड़ों की रंगदारी (Extortion)

प्रोसीजर पूरा होने या एडवांस स्टेज में पहुंचने के बाद इस गिरोह का असली चेहरा सामने आता था। गिरोह के सदस्य पीड़ितों को धमकी देते थे कि यदि उन्होंने मोटी रकम नहीं दी, तो उनके इस गुप्त मेडिकल प्रोसीजर, स्पर्म डोनर की पहचान और उनकी व्यक्तिगत तस्वीरों को डार्क वेब पर लीक कर दिया जाएगा या उनके रिश्तेदारों में सार्वजनिक कर दिया जाएगा।

सामाजिक प्रतिष्ठा और बदनामी के डर से कई वीआईपी पीड़ितों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बजाय चुपचाप लाखों-करोड़ों रुपये इस गिरोह को सौंप दिए। इसी वजह से यह मामला लंबे समय तक दबा रहा और मुख्यधारा के मीडिया की नजरों से छुपा रहा।

पुलिस की आज की बड़ी कार्रवाई

कांदिवली पुलिस को पिछले दिनों एक पीड़ित बिजनेसमैन की तरफ से गुप्त शिकायत मिली थी, जिनसे गिरोह ने ₹1.5 करोड़ की मांग की थी। पुलिस ने फौरन एक्शन लेते हुए डिजिटल फुटप्रिंट्स और बैंक अकाउंट ट्रांजैक्शंस को ट्रैक किया।

आज सुबह (11 सितंबर) पुलिस ने मुंबई के एक पॉश इलाके में छापेमारी कर गिरोह की मास्टरमाइंड महिला को धर दबोचा। पुलिस को उसके पास से कई वीआईपी क्लाइंट्स के गोपनीय मेडिकल दस्तावेज, जाली डॉक्टर सर्टिफिकेट और कई आपत्तिजनक डिजिटल डेटा मिले हैं। पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य डॉक्टरों, आईवीएफ क्लीनिक के कर्मचारियों और डार्क वेब एक्सपर्ट्स की तलाश में छापेमारी कर रही है।


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