Thursday, October 29, 2026

TOP NEWS

धार के मांडू में...

धार के मांडू में 18 वर्षीय युवती की मौत के बाद परिजनों ने शव रखकर चक्काजाम किया। पुलिस ने चंदन सहित 3 आरोपियों पर केस दर्ज किया। प्रशासन ने दिया 5 दिन में कार्रवाई का भरोसा।

जमालपुर कला खोकरा मुखिया...

जमालपुर कला खोकरा मुखिया मार्ग बदहाल, गड्ढों में भरा गंदा पानी बना मुसीबतअर्जुन...

रुड़की के नगला इमरती...

रुड़की के नगला इमरती में ग्राम सभा की जमीन पर कब्जे को लेकर...

सियासी भूचाल: देवास शराब...

देवास शराब कांड में कांग्रेस प्रवक्ता के बेटे अमन कासलीवाल की गिरफ्तारी से एमपी की सियासत गरमाई। मंत्री विश्वास सारंग ने जीतू पटवारी और पीसीसी फंडिंग पर उठाए गंभीर सवाल। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
Homeदेशब्रिक्स समिट 2026: दिल्ली में महामंथन, पर्दे के पीछे पश्चिमी देशों की...

ब्रिक्स समिट 2026: दिल्ली में महामंथन, पर्दे के पीछे पश्चिमी देशों की ‘सीक्रेट मॉनिटरिंग’ शुरू

नई दिल्ली | 11 सितंबर 2026

नई दिल्ली के ‘भारत मंडपम’ में आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन पर इस समय पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं। जहाँ एक ओर सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष वैश्विक आर्थिक व्यवस्था को नया आकार देने के लिए रणनीतिक विमर्श कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राजनयिक और खुफिया गलियारों से आ रही रिपोर्टों के अनुसार, पश्चिमी शक्तियां—विशेषकर अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ (EU)—इस सम्मेलन की व्यापक और गुप्त निगरानी (Strategic Monitoring) कर रही हैं।

राजनयिक विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिमी देशों की इस सक्रियता और चिंता के पीछे निम्नलिखित तीन मुख्य रणनीतिक कारण हैं:

1. गैर-डॉलर व्यापार प्रणाली (De-dollarisation) का उभरता ढांचा

पश्चिमी वित्तीय तंत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौती ब्रिक्स देशों द्वारा अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता को कम करने का ठोस प्रयास है। इस शिखर सम्मेलन में भारत द्वारा ‘सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी’ (CBDCs) को अंतर-संचालनीय (Interoperable) बनाने और स्थानीय मुद्राओं (रुपया-रूबल-युआन) में सीमा-पार भुगतान (Cross-border Payments) को सुगम करने का प्रस्ताव रखा गया है। यदि यह वित्तीय ढांचा सफल होता है, तो वैश्विक बैंकिंग नेटवर्क (SWIFT) पर पश्चिम का पारंपरिक एकाधिकार गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है।

2. आर्थिक प्रतिबंधों (Western Sanctions) की प्रभावशीलता का आकलन

रूस और ईरान इस समय पश्चिमी देशों के कड़े आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंधों के दायरे में हैं। पश्चिमी खुफिया एजेंसियां (जैसे CIA और MI6) नई दिल्ली में हो रही द्विपक्षीय बैठकों के परिणामों को बारीकी से ट्रैक कर रही हैं। उनका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सम्मेलन के दौरान कोई ऐसा वैकल्पिक बैंकिंग चैनल या ऊर्जा समझौता (Energy Deal) अस्तित्व में न आए, जो इन प्रतिबंधों की प्रभावशीलता को कमजोर या निष्प्रभावी कर दे।

3. विस्तारित ब्रिक्स (BRICS+) का नया आर्थिक संतुलन

ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), मिस्र और इथियोपिया के पूर्णकालिक प्रवेश के बाद, यह ब्लॉक अब वैश्विक आबादी के 50% से अधिक और कच्चे तेल के वैश्विक भंडार के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। पश्चिमी थिंक-टैंक्स का मानना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था का विनियामक केंद्र (Regulatory Center) अब धीरे-धीरे वाशिंगटन और ब्रुसेल्स से स्थानांतरित होकर ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) की ओर बढ़ रहा है।

भारत की कूटनीतिक भूमिका और रणनीतिक स्वायत्तता

इस वैश्विक रस्साकशी के बीच भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ‘क्वाड’ (QUAD) के माध्यम से अमेरिका का रणनीतिक साझेदार होने के बावजूद, भारत ब्रिक्स के मंच पर अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) को पूरी मजबूती से प्रदर्शित कर रहा है। नई दिल्ली का स्पष्ट रुख है कि वह किसी भी बाहरी दबाव के बिना, अपने राष्ट्रीय और आर्थिक हितों के अनुरूप ही वैश्विक मंचों पर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेगा।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments