मध्य प्रदेश के महेश्वर (खरगोन) में नर्मदा नदी के घाट पर बड़ी संख्या में इंदौर के मतदाताओं के वोटर आईडी कार्ड (Voter ID Cards) लावारिस हालत में मिलने से हड़कंप मच गया है। इस घटना के बाद मध्य प्रदेश की सियासत पूरी तरह गरमा गई है। कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र की हत्या और देशव्यापी स्तर पर चल रहे कथित ‘वोट चोरी’ के आरोपों का एक बड़ा और खुला सबूत बताया है। इस मामले में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इंदौर और खरगोन में बड़ा धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
घटना का मुख्य कारण और विवाद की शुरुआत
महेश्वर के प्रसिद्ध नर्मदा घाट पर अचानक स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों को प्लास्टिक में लिपटे हुए भारी मात्रा में वोटर आईडी कार्ड तैरते और किनारे पर पड़े हुए मिले। जब इन्हें इकट्ठा करके देखा गया, तो ये कुल 343 असली वोटर आईडी कार्ड निकले। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ये सभी कार्ड महेश्वर या खरगोन जिले के नहीं, बल्कि इंदौर के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के मतदाताओं के हैं। इतनी बड़ी संख्या में इंदौर के वोटरों के कार्ड्स का महेश्वर के घाट पर लावारिस मिलना कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
कांग्रेस का आरोप और मुख्य चुनाव आयुक्त पर FIR की मांग
घटना की भनक लगते ही कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए। कांग्रेस नेताओं का सीधा आरोप है कि यह चुनाव में धांधली करने और वैध मतदाताओं को वोट डालने से रोकने की एक सोची-समझी साजिश है। नेताओं का कहना है कि इंदौर में मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से गायब करने और विपक्ष को नुकसान पहुंचाने के लिए इन असली कार्डों को जानबूझकर गायब कर महेश्वर में ठिकाने लगाया गया है।
इस ‘वोट चोरी’ के विरोध में कांग्रेसियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ FIR दर्ज कराने के लिए थाने के बाहर धरना दे दिया है। प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं ने ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका और नारेबाज़ी करते हुए उनके तुरंत इस्तीफे की मांग की। कांग्रेस का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर राहुल गांधी और विपक्षी दल लगातार वोटर लिस्ट में हेरफेर का जो मुद्दा उठा रहे हैं, महेश्वर की यह घटना उसका जीता-जागता और सरेआम सबूत है।
प्रशासन और चुनाव आयोग का रुख
इस गंभीर मामले के सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन और जिला निर्वाचन अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए हैं। प्रारंभिक तौर पर अधिकारियों का कहना है कि यह कार्ड वहां कैसे पहुंचे, इसकी गहराई से जांच की जा रही है। वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे विवादों के बीच चुनाव आयोग पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि आयोग पूरी निष्पक्षता से काम करता है और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। हालांकि, महेश्वर के घाट पर मिले इन 343 कार्डों के रहस्य से पर्दा उठना अभी बाकी है।
कांग्रेस नेताओं के प्रमुख तीखे बयान
- वोटिंग अधिकारों से खिलवाड़: कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इंदौर के मतदाताओं के कार्ड महेश्वर के घाट पर फेंकना यह साबित करता है कि जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ किया जा रहा है।
- आर-पार की लड़ाई: नेताओं ने चेतावनी दी है कि भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर चुनाव आयोग की मिलीभगत से यह ‘वोट चोरी’ का खेल खेला जा रहा है और जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर एफआईआर दर्ज नहीं होती, उनका यह आंदोलन खत्म नहीं होगा।


