MP News: मध्य प्रदेश में छोटे अपराधियों को अब जेल नहीं, समाज सुधार के लिए करना होगा यह काम; नई गाइडलाइन जारी
भोपाल: मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने अपराधियों के सुधार और जेलों में कैदियों का बोझ कम करने की दिशा में एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। राज्य में अब छोटे और कम गंभीर अपराध करने वाले दोषियों को सीधे सलाखों के पीछे भेजने या आर्थिक जुर्माना लगाने के बजाय ‘सामुदायिक सेवा’ (Community Service) की सजा दी जाएगी।
गृह विभाग ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के प्रावधानों के तहत इसके क्रियान्वयन के लिए विस्तृत नियम और आधिकारिक गाइडलाइन जारी कर दी है। इस नए कानून के तहत अपराधियों को उनके क्राइम के नेचर (अपराध की प्रकृति) के आधार पर सार्वजनिक हित के काम सौंपे जाएंगे।
अपराध की प्रकृति देखकर कोर्ट तय करेगी काम
नए नियमों के अनुसार, दोषियों को मिलने वाली सजा का निर्धारण पूरी तरह से कोर्ट के विवेक पर निर्भर करेगा。 अदालतें फैसला सुनाते समय दोषी की उम्र, उसकी फिजिकल फिटनेस (शारीरिक क्षमता), पारिवारिक बैकग्राउंड और अपराध की परिस्थितियों का बारीकी से अध्ययन करेंगी。
दोषियों से कराए जा सकते हैं ये प्रमुख काम:
- ग्रीन एमपी अभियान (पौधरोपण): सरकारी जमीनों या सार्वजनिक स्थलों पर नए पौधे लगाना और उनकी देखरेख सुनिश्चित करना。
- स्वच्छता और सफाई कार्य: शासकीय अस्पतालों, स्कूलों, पुलिस थानों, पंचायत भवनों और नगरीय निकायों के परिसरों में सफाई व्यवस्था में हाथ बंटाना。
- दफ्तरों और रिकॉर्ड की सुरक्षा: सरकारी लाइब्रेरी (पुस्तकालयों) में जाकर अभिलेखागार (Records) को व्यवस्थित करना और सरकारी संपत्तियों की रखवाली करना。
महिला सुरक्षा और मानवीय गरिमा सर्वोपरि
राज्य सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन में साफ निर्देश दिए गए हैं कि कम्युनिटी सर्विस की इस पूरी प्रक्रिया के दौरान महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान का विशेष रूप से ध्यान रखा जाएगा。 इसके अलावा, दोषियों के साथ किसी भी प्रकार का अमानवीय या प्रताड़नापूर्ण व्यवहार नहीं किया जा सकेगा。 सजा के दौरान उनके साथ मानवीय और गरिमापूर्ण बर्ताव करना अनिवार्य होगा。
मॉनिटरिंग ऑफिसर रखेंगे पैनी नजर; लापरवाही पर सीधे जेल
अदालत जब कम्युनिटी सर्विस का आदेश जारी करेगी, तो उसमें सजा की कुल अवधि (समय), कार्य का स्थान और काम के प्रकार का स्पष्ट उल्लेख होगा।
- निगरानी की जिम्मेदारी: प्रत्येक मामले के लिए एक निगरानी अधिकारी (Monitoring Officer) नियुक्त किया जाएगा, जो दोषी की रोजाना की उपस्थिति और काम का पूरा रिकॉर्ड रखेगा।
- कोर्ट को रिपोर्ट: यह अधिकारी तय फॉर्मेट में अपनी रिपोर्ट सीधे संबंधित कोर्ट को सौंपेगा।
- नियम तोड़ा तो जेल: यदि कोई अपराधी काम करने से मना करता है, ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरतता है या नियम तोड़ता है, तो मॉनिटरिंग ऑफिसर इसकी शिकायत तुरंत कोर्ट से करेगा। ऐसी स्थिति में दोषी की कम्युनिटी सर्विस निरस्त कर उसे सीधे जेल भेज दिया जाएगा।
किन 6 अपराधों में लागू होगा यह नियम?
भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत शुरुआती चरण में इन 6 विशिष्ट अपराधों के लिए कम्युनिटी सर्विस का विकल्प रखा गया है:
- छोटी चोरी: ₹5,000 से कम की ऐसी चोरी, जिसमें आरोपी पहली बार पकड़ा गया हो और वह चोरी की गई रकम या माल वापस लौटाने को तैयार हो।
- पब्लिक प्लेस पर शराब पीकर हंगामा: सार्वजनिक स्थलों पर नशे की हालत में हुड़दंग मचाना या शांति भंग करना।
- मानहानि मामले: छोटे स्तर पर किसी की छवि धूमिल करने (Defamation) से जुड़े केस。
- सरकारी कर्मचारियों द्वारा अवैध व्यापार: कानून के विरुद्ध जाकर किसी लोक सेवक द्वारा बिजनेस गतिविधियों में लिप्त होना।
- दबाव बनाने का प्रयास: किसी सरकारी अधिकारी को उसकी ड्यूटी करने से रोकने या अनुचित दबाव बनाने के लिए खुदकुशी की कोशिश करना।
- अदालती आदेश की अवहेलना: कोर्ट द्वारा जारी की गई उद्घोषणा या समन के बावजूद नियत समय पर अदालत में हाजिर न होना।


