मॉडर्ना और मर्क की नई एमआरएनए (mRNA) वैक्सीन ने जगाई कैंसर से जंग में बड़ी उम्मीद, तीसरे चरण के ट्रायल में मिले क्रांतिकारी नतीजे
नई दिल्ली/न्यूयॉर्क:कैंसर के इलाज की दिशा में चिकित्सा जगत को आज एक बेहद ऐतिहासिक और बड़ी कामयाबी हाथ लगी है।
मशहूर वैश्विक फार्मा कंपनियों ‘मॉडर्ना’ (Moderna) और ‘मर्क’ (Merck) द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई एक प्रायोगिक एमआरएनए (mRNA) कैंसर वैक्सीन ने अपने तीसरे चरण (Phase 3) के क्लीनिकल ट्रायल में बेहद सकारात्मक और उत्साहजनक परिणाम दर्ज किए हैं।
यह नई वैक्सीन एडवांस स्किन कैंसर (यानी खतरनाक त्वचा कैंसर, मेलेनोमा) के मरीजों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है। ट्रायल के आंकड़ों के मुताबिक, यह वैक्सीन उन मरीजों में स्किन कैंसर को दोबारा लौटने (Recurrence) से रोकने में काफी हद तक मददगार पाई गई है, जिनकी पहले सर्जरी हो चुकी थी।
इम्यून सिस्टम को सिखाती है लड़ना
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, यह वैक्सीन कोरोना काल में इस्तेमाल की गई एमआरएनए (mRNA) तकनीक पर ही आधारित है। यह शरीर के भीतर जाकर मरीज के इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) को इस तरह प्रशिक्षित करती है कि वह कैंसर की कोशिकाओं को पहचानकर उन्हें शुरुआती स्टेज पर ही खत्म कर दे। सर्जरी के बाद कैंसर के दोबारा उभरने का खतरा हमेशा बना रहता है, लेकिन इस वैक्सीन के आने से उस खतरे को काफी हद तक टाला जा सकेगा।
यह कैंसर वैक्सीन (mRNA) काम कैसे करती है?
पारंपरिक टीके (जैसे बचपन में लगने वाले पोलियो या चेचक के टीके) शरीर में कमजोर या मृत वायरस डालकर इम्यून सिस्टम को सक्रिय करते हैं। लेकिन यह कैंसर वैक्सीन पूरी तरह अलग है। यह कोई आम टीका नहीं है, बल्कि एक “पर्सनलाइज्ड इम्यूनोथेरेपी” (Personalized Immunotherapy) है।
कैंसर का आनुवंशिक ब्लूप्रिंट (Genetic Blueprint): वैज्ञानिक सबसे पहले मरीज के ट्यूमर (कैंसर कोशिका) का एक सैंपल लेते हैं। इसके बाद वे उस कैंसर कोशिका के डीएनए (DNA) को स्कैन करके उसके विशिष्ट म्यूटेशन (बदलावों) की पहचान करते हैं।
एमआरएनए (mRNA) मैसेंजर तैयार करना: इस स्कैन के आधार पर एक कस्टमाइज्ड ‘मैसेंजर आरएनए’ (mRNA) तैयार किया जाता है। यह mRNA एक तरह का सॉफ्टवेयर कोड या निर्देश (Instruction Manual) होता है।
इम्यून सिस्टम को ‘टारगेट’ की जानकारी देना: जब यह वैक्सीन मरीज को लगाई जाती है, तो mRNA शरीर की कोशिकाओं को कैंसर कोशिकाओं की सतह पर मौजूद विशिष्ट प्रोटीन (Antigens) बनाने का निर्देश देता है।
किलर टी-सेल्स (Killer T-Cells) को एक्टिव करना: जैसे ही शरीर इन प्रोटीन्स को देखता है, मरीज का अपना इम्यून सिस्टम (विशेषकर टी-कॉशिकाएं) सतर्क हो जाता है। इम्यून सिस्टम को समझ आ जाता है कि यह प्रोटीन शरीर का दुश्मन है।
ढूंढकर हमला करना: अब मरीज का इम्यून सिस्टम पूरे शरीर में घूम-घूमकर उन सभी कैंसर कोशिकाओं को ढूंढ निकालता है जिनके पास वह विशिष्ट प्रोटीन होता है, और उन्हें पूरी तरह नष्ट कर देता है।
यह तकनीक इतनी क्रांतिकारी क्यों है?
- हर मरीज के लिए अलग वैक्सीन: यह वैक्सीन हर मरीज के कैंसर के हिसाब से “टेलर-मेड” (दर्जी की तरह सिली हुई) होती है। यानी जो वैक्सीन एक मरीज को दी जा रही है, वह हूबहू दूसरे मरीज पर काम नहीं करेगी क्योंकि दोनों के कैंसर का म्यूटेशन अलग होता है।
- कैंसर को दोबारा लौटने से रोकना: सर्जरी या कीमोथेरेपी के बाद भी शरीर में कैंसर की कुछ सूक्ष्म कोशिकाएं बची रह जाती हैं, जो बाद में दोबारा ट्यूमर का रूप ले लेती हैं। यह वैक्सीन उन बची हुई कोशिकाओं को पनपने ही नहीं देती।
- कम साइड इफेक्ट्स: कीमोथेरेपी शरीर की अच्छी और बुरी दोनों कोशिकाओं को मार देती है, जिससे बाल झड़ना और अत्यधिक कमजोरी जैसे साइड इफेक्ट होते हैं। इसके विपरीत, यह वैक्सीन केवल कैंसर कोशिकाओं को चुन-चुनकर निशाना बनाती है, जिससे स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान नहीं पहुँचता।
शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल
ट्रायल के नतीजे जैसे ही सार्वजनिक हुए, वैश्विक वित्तीय बाजारों में दोनों कंपनियों के प्रति निवेशकों का भरोसा सातवें आसमान पर पहुंच गया। अमेरिकी शेयर बाजार के खुलते ही मॉडर्ना और मर्क, दोनों ही फार्मा दिग्गजों के शेयरों में भारी तेजी (बंपर उछाल) देखी गई है। बाजार के जानकारों का मानना है कि मेडिकल साइंस में इस क्रांतिकारी सफलता के बाद आने वाले दिनों में इन कंपनियों के मूल्यांकन में और बड़ी बढ़त देखने को मिल सकती है।वैश्विक स्तर पर इस ट्रायल की सफलता को ऑन्कोलॉजी (कैंसर विज्ञान) के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है। अगर इसे जल्द ही नियामक मंजूरियां मिल जाती हैं, तो यह दुनिया की पहली सफल कैंसर रोधी एमआरएनए वैक्सीन बन सकती है।


