निजी तेल कंपनी नायरा ने बढ़ाए पेट्रोल और डीजल के दाम, जानिए क्यों हुआ ईंधन महंगा
नई दिल्ली।
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी का असर अब भारतीय उपभोक्ताओं पर पड़ना शुरू हो गया है। देश की सबसे बड़ी निजी ईंधन विक्रेता कंपनी नायरा एनर्जी ने देशव्यापी स्तर पर पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में बड़ा इजाफा कर दिया है। कंपनी ने पेट्रोल की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो चुकी है।
क्यों लिया गया कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और रिफाइंड प्रोडक्ट्स की कीमतों में लगातार उछाल आ रहा है। इससे तेल कंपनियों की लागत बढ़ रही थी और उनके मार्जिन पर भारी दबाव देखा जा रहा था। वैश्विक ऊर्जा संकट और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने भू-राजनीतिक तनाव के चलते रिटेल कीमतों और वास्तविक लागत के अंतर को कम करने के लिए निजी कंपनी को यह कदम उठाना पड़ा है। इससे पहले जुलाई के महीने में जब कच्चे तेल के दाम थोड़े कम हुए थे, तब कंपनी ने इसी अनुपात में कीमतें घटाई थीं, लेकिन बाजार के मौजूदा हालातों को देखते हुए इन्हें दोबारा बढ़ाना पड़ा है।
अलग-अलग राज्यों में कीमतों का गणित
कंपनी ने बेस प्राइस में पेट्रोल पर 5 रुपये और डीजल पर 3 रुपये की बढ़ोतरी की है। हालांकि, भारत के अलग-अलग राज्यों और शहरों में पेट्रोल-डीजल पर लगने वाला स्थानीय टैक्स और माल ढुलाई खर्च अलग होता है, इसलिए अंतिम कीमतों में थोड़ा अंतर देखने को मिलेगा। उदाहरण के लिए, मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में टैक्स दरें अधिक होने के कारण नायरा के पंपों पर अब एक लीटर पेट्रोल 120 रुपये और डीजल 103 रुपये के पार पहुंच गया है। देश के अन्य राज्यों में भी वहां की स्थानीय टैक्स व्यवस्था के आधार पर नए रेट लागू हो गए हैं।
केवल निजी क्षेत्र में बदलाव, सरकारी पंपों पर राहत बरकरार
राहत की बात यह है कि यह फैसला केवल निजी क्षेत्र की कंपनी नायरा एनर्जी के आउटलेट्स के लिए है। देश के करीब 90 फीसदी से ज्यादा पेट्रोल पंपों का संचालन करने वाली सरकारी तेल कंपनियों जैसे आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल ने अपनी कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। आम उपभोक्ता अभी भी सरकारी तेल कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर जाकर पुरानी और स्थिर दरों पर ही पेट्रोल-डीजल खरीद सकते हैं। हालांकि, जानकारों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम इसी तरह ऊंचे बने रहे, तो आने वाले समय में सरकारी कंपनियों पर भी कीमतें बढ़ाने का दबाव बेहद बढ़ जाएगा।


