Monday, September 14, 2026

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महंगे कर्ज का नया अलर्ट! SBI रिसर्च रिपोर्ट का दावा—अक्टूबर से बढ़ सकती हैं होम और कार लोन की दरें

लोन और EMI के मोर्चे पर आम जनता को जल्द ही बड़ा झटका लग सकता है। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक State Bank of India (SBI) की रिसर्च रिपोर्ट ‘Ecowrap’ में यह आशंका जताई गई है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आने वाले महीनों में रेपो रेट में 0.50% (50 बेसिस पॉइंट्स) तक की बढ़ोतरी कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें बढ़ जाएंगी, जिससे सीधे तौर पर आपकी जेब पर मंथली EMI का बोझ बढ़ेगा।

रेपो रेट में क्यों हो सकती है बढ़ोतरी

वैश्विक स्तर पर बदल रहे हालात के चलते अचानक ब्याज दरें बढ़ाने की जरूरत आन पड़ी है। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल (Crude Oil) 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है। आशंका है कि यह आने वाले दिनों में 123 डॉलर तक भी पहुंच सकता है।

भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा बाहर से इम्पोर्ट करता है। कच्चा तेल महंगा होने से माल ढुलाई बढ़ेगी, जिससे देश में रिटेल महंगाई (CPI) 6.5% या उससे ऊपर जा सकती है। एसबीआई रिसर्च ने सुझाव दिया है कि RBI को दो चरणों में (अक्टूबर की मीटिंग में 0.25% और फिर दिसंबर की मीटिंग में 0.25%) कुल मिलाकर 0.50% की बढ़ोतरी करनी चाहिए।

वर्तमान स्थिति और बदलाव की संभावना

अक्टूबर में होने वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की मीटिंग में इन दरों पर फैसला होगा। फिलहाल आरबीआई की रेपो रेट 5.25% के स्तर पर है। अगर एसबीआई के दावे के मुताबिक इसमें 0.50% की बढ़ोतरी की जाती है, तो नई रेपो रेट बढ़कर 5.75% हो जाएगी। रेपो रेट बढ़ते ही बैंकों की लोन देने की लागत बढ़ जाती है, जिससे वे ग्राहकों के लिए ब्याज दरों को तुरंत बढ़ा देते हैं।

उदाहरण 1: ₹30 लाख का होम लोन (अवधि: 20 साल)

होम लोन आमतौर पर लंबी अवधि के होते हैं, इसलिए ब्याज दरों में मामूली बदलाव का भी इस पर बड़ा असर पड़ता है।

  • मान लेते हैं मौजूदा ब्याज दर: 8.50%
  • मौजूदा मासिक EMI: ₹26,043
  • 0.50% बढ़ने के बाद नई ब्याज दर: 9.00%
  • नई मासिक EMI: ₹26,992
  • जेब पर अतिरिक्त बोझ: हर महीने ₹949 ज्यादा देने होंगे।
  • सालाना नुकसान: पूरे साल में आपको ₹11,388 अतिरिक्त चुकाने होंगे।

उदाहरण 2: ₹7 लाख का कार लोन (अवधि: 5 साल)

कार लोन की अवधि कम होती है, इसलिए इसमें मासिक EMI पर असर तो दिखता है, लेकिन कुल ब्याज का बोझ होम लोन जितना बड़ा नहीं होता।

  • मान लेते हैं मौजूदा ब्याज दर: 9.00%
  • मौजूदा मासिक EMI: ₹14,530
  • 0.50% बढ़ने के बाद नई ब्याज दर: 9.50%
  • नई मासिक EMI: ₹14,696
  • जेब पर अतिरिक्त बोझ: हर महीने ₹166 ज्यादा देने होंगे।
  • सालाना नुकसान: पूरे साल में आपको ₹1,992 अतिरिक्त चुकाने होंगे।

आम जनता पर इसका क्या असर होगा

यदि आपने फ्लोटिंग रेट पर होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन लिया है, तो बैंक आपकी मासिक किस्त (EMI) की राशि बढ़ा देंगे या फिर आपके लोन की अवधि (Tenure) को लंबा कर देंगे। इसके अलावा नया घर या कार खरीदने के लिए नया लोन लेना अब पहले के मुकाबले काफी ज्यादा खर्चीला हो जाएगा।

हालांकि कर्ज महंगा होने के साथ-साथ बैंकों में पैसा जमा करने वाले सीनियर सिटीजन्स और आम निवेशकों के लिए एक अच्छी खबर भी होगी। बैंकों द्वारा फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर दी जाने वाली ब्याज दरों में भी बढ़ोतरी की जाएगी, जिससे आपकी जमा राशि पर ज्यादा रिटर्न मिलेगा।

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