Wednesday, October 14, 2026

TOP NEWS

छात्राओं से कथित अनुचित...

छात्राओं से कथित अनुचित व्यवहार के आरोपों पर भाजपा महिला मोर्चा का प्रदर्शन,...

मालवा की वैष्णोदेवी मंदिर...

मालवा की वैष्णोदेवी मंदिर दिगठान पहुंची भव्य चुनरी कलश यात्राराहुल सेन मांडवमोप्रतिवर्ष...

भारत का पहला Flex-Fuel...

"भारत का पहला E85 फ्लेक्स-फ्यूल एडवेंचर मैक्सी-स्कूटर Honda ADV 160 लॉन्च हो गया है। ₹1.70 लाख की कीमत वाले इस स्कूटर के फीचर्स, इंजन और स्पेसिफिकेशन्स की पूरी खबर यहाँ पढ़ें।"

पिरान कलियर में कांग्रेस...

पिरान कलियर में कांग्रेस की मासिक बैठक संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत...
Homeदेश'यह दवा है या खुली लूट?' कैंसर दवाओं की 10 गुना कीमतों...

‘यह दवा है या खुली लूट?’ कैंसर दवाओं की 10 गुना कीमतों पर सुप्रीम कोर्ट लाल; कहा- जनता के साथ हो रही दिनदहाड़े डकैती

‘यह दवा है या खुली लूट?’ कैंसर दवाओं की 10 गुना कीमतों पर सुप्रीम कोर्ट लाल; कहा- जनता के साथ हो रही दिनदहाड़े डकैती

नई दिल्ली: देश में जानलेवा बीमारियों के इलाज में काम आने वाली दवाओं की आसमान छूती कीमतों पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा ऐतराज जताया है। शीर्ष अदालत ने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की दवाओं पर वसूले जा रहे भारी-भरकम मुनाफे को लेकर दवा कंपनियों और संबंधित सरकारी विभागों को आड़े हाथों लिया। एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान पीठ ने तीखी टिप्पणी करते हुए इसे लाचार मरीजों के साथ “दिनदहाड़े डकैती और जबरन वसूली” जैसा बताया।

चंद रुपयों की दवा पर हजारों की MRP

मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ के सामने जब दवाओं की कीमतों के आंकड़े रखे गए, तो अदालत भी हैरान रह गई। कोर्ट को जानकारी दी गई कि कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एक बेहद जरूरी दवा, जिसकी वास्तविक थोक कीमत केवल ₹2,700 है, उसे बाजार में ₹27,000 की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) का ठप्पा लगाकर खुलेआम बेचा जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने तल्ख लहजे में कहा कि जब एक लाचार इंसान कैंसर जैसी बीमारी से जूझ रहा होता है, तो वह अपनों की जान बचाने के लिए अपने घर, जमीन और गहने तक बेच देता है। ऐसी स्थिति में दवाओं की कीमतों में 10 गुना तक का अंतर रखना एक तरह की रंगदारी है। कोर्ट ने इस बात पर भी गहरा दुख जताया कि सब कुछ जानते हुए भी देश के दवा नियामक और संबंधित अधिकारी इस अंधाधुंध मुनाफेबाजी पर आंखें मूंदकर बैठे हैं।

टैक्सपेयर्स के पैसों का हो रहा गलत इस्तेमाल

अदालत ने इस मामले के एक और गंभीर पहलू की तरफ ध्यान आकर्षित किया। पीठ ने कहा कि जब सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं (जैसे आयुष्मान भारत) के तहत इन अत्यधिक महंगी दवाओं को मरीजों को दिया जाता है, तो निजी अस्पताल सरकार से उसकी पूरी MRP का क्लेम वसूलते हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि दवा कंपनियों की इस अनियंत्रित लूट का भारी नुकसान सीधे तौर पर देश के आम टैक्सपेयर्स और सरकारी खजाने को उठाना पड़ रहा है।

याचिकाओं के जरिए उठाई गई मांग

यह पूरा मामला डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ और किशन चंद जैन द्वारा दायर की गई जनहित याचिकाओं के बाद चर्चा में आया है। इन याचिकाओं में अदालत से मांग की गई है कि:

  • कीमतों पर लगे लगाम: जो दवाएं आवश्यक दवाओं की राष्ट्रीय सूची में नहीं आती हैं, उनके मुनाफा मार्जिन की भी एक सीमा तय की जाए ताकि कंपनियां मनमानी न कर सकें।
  • जेनेरिक दवाओं को मिले बढ़ावा: डॉक्टरों के लिए मरीजों को सस्ती जेनेरिक दवाएं लिखना कानूनी रूप से अनिवार्य किया जाए।
  • लागत में पारदर्शिता हो: दवाओं के बनने के खर्च (मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट) और उसकी बिक्री के दामों के बीच के भारी अंतर को खत्म करने के लिए ठोस कानून बने।

शीर्ष अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस विषय पर केंद्र सरकार और दवा मूल्य नियामक प्राधिकरण से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि व्यापार और मुनाफे के नाम पर जीवनरक्षक दवाओं को आम जनता की पहुंच से दूर नहीं होने दिया जा सकता।

डिस्क्लेमर: यह समाचार केवल सूचना और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी दवा को खरीदने, बदलने या चिकित्सा परामर्श के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या सर्टिफाइड फार्मासिस्ट से संपर्क करें और फिजिकल लेबल की जांच स्वयं करें।)

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments