तान्या बनर्जी हत्याकांड—रिश्तों के फरेब, जुनून और हाईवे के उस खौफनाक मोड़ की दास्तां जिसने पुलिस को चकराया
क्राइम डेस्क, NTV TIME:
अपराध की दुनिया में जब कोई एकतरफा प्यार जुनून और नफरत में बदल जाता है, तो अंजाम बेहद खौफनाक होता है। कोलकाता की रहने वाली और बेंगलुरु के एक नामी बीपीओ (BPO) में काम करने वाली एक होनहार युवती तान्या बनर्जी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। साल 2006 का यह हत्याकांड आज भी कॉर्पोरेट जगत और पुलिस फाइलों में एकतरफा प्यार के पागलपन और एक शातिर साजिश के सबसे चर्चित मामलों में से एक है। एक फोन कॉल, एक झूठी मुलाकात और हाईवे पर मिली एक लाश ने पूरे सिस्टम को हिलाकर रख दिया था।
1. सस्पेंस की शुरुआत: दफ्तर से गायब हुई होनहार बेटी
कोलकाता के एक संभ्रांत परिवार की तान्या बनर्जी बेंगलुरु में अपने करियर की नई ऊंचाइयों को छू रही थीं। वे अपनी शिफ्ट खत्म कर रोज़ाना की तरह घर लौटती थीं। लेकिन जुलाई 2006 के उस मनहूस दिन, तान्या ऑफिस के लिए निकलीं और फिर कभी वापस नहीं लौटीं। जब देर रात तक उनका फोन बंद आने लगा, तो परेशान परिवार ने पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अभी सुराग तलाश ही रही थी कि बेंगलुरु से दूर हासन हाईवे के पास एक युवती का संदिग्ध शव मिलने की खबर से हड़कंप मच गया।
2. हाईवे पर मिली लाश और गहराता सस्पेंस
हाईवे के किनारे सुनसान झाड़ियों में मिली वह लाश किसी और की नहीं बल्कि तान्या बनर्जी की थी। तान्या के शरीर पर चोट के निशान थे, जिससे यह साफ था कि यह कोई हादसा या आत्महत्या नहीं, बल्कि एक सोची-समझी क्रूर हत्या थी। पुलिस के सामने सबसे बड़ा सस्पेंस यह था कि आखिर बेंगलुरु के सुरक्षित माहौल में काम करने वाली एक लड़की इतनी दूर हाईवे पर कैसे पहुंची? उसके मोबाइल फोन के कॉल रिकॉर्ड्स (CDR) खंगालने पर पुलिस के हाथ एक ऐसा नंबर लगा, जिसने पूरे केस का रुख मोड़ दिया।
3. वो आख़िरी मुलाक़ात और शादी का ठुकराया हुआ प्रस्ताव
कॉल डिटेल्स के आधार पर पुलिस ने तान्या के एक पूर्व सहकर्मी गुरुराज किशोर को हिरासत में लिया। शुरुआत में तो वह पुलिस को गुमराह करता रहा और सस्पेंस बनाए रखा, लेकिन जब पुलिस ने सख्ती दिखाई तो उसने जो सच उगला, उसने सबको झकझोर दिया।
गुरुराज तान्या से एकतरफा प्यार करता था और काफी समय से उस पर शादी का दबाव बना रहा था। तान्या ने उसके इस प्रस्ताव को पूरी तरह ठुकरा दिया था, जिससे गुरुराज का अहंकार और सनक सातवें आसमान पर पहुंच गए थे। कत्ल वाले दिन, उसने तान्या को बातचीत के बहाने बुलाया और कार में बैठाया। जब तान्या ने दोबारा उसके प्रस्ताव को खारिज किया, तो उसने कार के भीतर ही तान्या का गला घोंटकर उसे मौत के घाट उतार दिया।
4. लाश को ठिकाने लगाने का शातिर प्लान
हत्या को अंजाम देने के बाद गुरुराज ने सबूत मिटाने के लिए शातिर दिमाग चलाया। वह तान्या की लाश को कार की पिछली सीट पर छिपाकर बेंगलुरु शहर से दूर हासन हाईवे की तरफ निकल गया। वह किसी ऐसे सुनसान ठिकाने की तलाश में था जहां लाश आसानी से न मिले। आखिरकार, रात के सन्नाटे का फायदा उठाकर उसने तान्या के शव को हाईवे के पास की झाड़ियों में फेंक दिया और वापस शहर आकर ऐसे बर्ताव करने लगा जैसे उसे कुछ पता ही न हो।
पुलिस तफ्तीश (Police Investigation): कैसे सुलझी कत्ल की गुत्थी?
इस ब्लाइंड मर्डर केस को सुलझाने के लिए बेंगलुरु पुलिस ने एक विशेष टीम का गठन किया। पुलिस ने इस केस को वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर तीन चरणों में क्रैक किया:
कॉल रिकॉर्ड्स (CDR Analysis)
पुलिस ने सबसे पहले तान्या के मोबाइल फोन के कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड्स (CDR) निकाले। तफ्तीश में सामने आया कि तान्या के गायब होने से ठीक पहले उसके फोन पर एक विशेष नंबर से लगातार कई कॉल्स और मैसेजेस आए थे। वह नंबर तान्या के एक पूर्व सहकर्मी गुरुराज किशोर का था। टावर लोकेशन से पता चला कि तान्या के गायब होने के समय गुरुराज की लोकेशन भी उसी के आसपास थी।
हाईवे के सीसीटीवी और टोल नाके
पुलिस ने बेंगलुरु से हासन हाईवे की ओर जाने वाले रूट्स के टोल नाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। पुलिस को एक संदिग्ध सेंट्रो कार दिखाई दी जो तान्या के गायब होने के समय हाईवे की तरफ तेज रफ्तार में गई थी और कुछ घंटों बाद वापस बेंगलुरु लौटी थी। यह कार गुरुराज किशोर की ही थी।
फॉरेंसिक साइंस और कार की जांच
पुलिस ने गुरुराज किशोर को हिरासत में लेकर जब उसकी कार की फॉरेंसिक जांच (Forensic Examination) करवाई, तो कार की पिछली सीट और मैट से तान्या के बालों के टुकड़े और उंगलियों के फिंगरप्रिंट्स बरामद हुए। इन अकाट्य सबूतों के सामने आते ही कातिल गुरुराज का सारा झूठ ढह गया और वह पुलिस के सामने टूट गया।
5. कोर्ट का इंसाफ और इस केस का सबक
पुलिस ने कॉल रिकॉर्ड्स, फॉरेंसिक साक्ष्यों और गुरुराज की कार से मिले सबूतों के आधार पर एक मजबूत चार्जशीट तैयार की। आरोपी गुरुराज किशोर को अदालत ने दोषी पाते हुए सख्त सजा सुनाई। यह केस आज भी इस बात का गवाह है कि कैसे एकतरफा प्यार का पागलपन किसी की हंसती-खेलती जिंदगी को हमेशा के लिए उजाड़ सकता है।


