स्मार्टफोन क्रांति की शुरुआत: जब नोकिया ने 15 अगस्त को हमेशा के लिए बदल दिया मोबाइल का इतिहास
नई दिल्ली: 15 अगस्त का दिन न सिर्फ भारत की आजादी के लिए जाना जाता है, बल्कि तकनीक की दुनिया में भी यह तारीख एक बहुत बड़ी ‘आजादी’ यानी तकनीकी क्रांति की गवाह रही है। आज से ठीक तीन दशक पहले, 15 अगस्त 1996 को फिनलैंड की दिग्गज कंपनी नोकिया (Nokia) ने बाजार में एक ऐसा डिवाइस उतारा जिसने दुनिया को हैरान कर दिया। इस डिवाइस का नाम था—
‘Nokia 9000 Communicator’।
यह सिर्फ एक नया मोबाइल फोन नहीं था, बल्कि यह दुनिया का पहला ऐसा व्यावसायिक हैंडसेट था जिसने मोबाइल फोन पर इंटरनेट, ईमेल और वेब ब्राउजिंग की शुरुआत की। यही वह मोड़ था, जिसे आज हम ‘स्मार्टफोन क्रांति’ के शुरुआती बिंदु के रूप में याद करते हैं।
जब मोबाइल बना ‘जेब में रखने वाला कंप्यूटर’
1990 के दशक के मध्य में मोबाइल फोन का इस्तेमाल सिर्फ कॉल करने या बहुत हुआ तो टेक्स्ट मैसेज (SMS) भेजने के लिए किया जाता था। ऐसे दौर में नोकिया ने एक ऐसा हैंडसेट पेश किया जो बाहर से तो एक साधारण भारी-भरकम फोन जैसा दिखता था, लेकिन जैसे ही इसे बीच से एक किताब की तरह खोला जाता था, अंदर एक पूरी नई दुनिया सामने आ जाती थी।Nokia 9000 Communicator के अंदर एक बड़ी लंबी स्क्रीन और एक पूरा QWERTY कीबोर्ड (कंप्यूटर जैसा कीबोर्ड) दिया गया था। उस समय के लिहाज से यह किसी जादू से कम नहीं था। लोग अपने हाथ में थामे एक छोटे से उपकरण से ईमेल भेज सकते थे, फैक्स प्राप्त कर सकते थे और इंटरनेट की शुरुआती वेबसाइट्स को ब्राउज कर सकते थे।
इंटरनेट और वेब ब्राउजिंग की पहली दस्तक
इस फोन की सबसे बड़ी खासियत इसका इंटरनेट इनेबल्ड होना था। हालांकि, उस समय इंटरनेट की स्पीड आज के 4G या 5G जैसी बिल्कुल नहीं थी और डेटा बहुत महंगा हुआ करता था, लेकिन इसके बावजूद बिजनेस जगत और तकनीक के दीवानों के लिए यह एक क्रांतिकारी कदम था। नोकिया 9000 कम्युनिकेटर की मदद से चलते-फिरते ईमेल का जवाब देना संभव हो गया, जिसने कामकाजी दुनिया की रफ्तार को हमेशा के लिए बदल दिया।इसने साबित कर दिया कि मोबाइल फोन का भविष्य सिर्फ वॉयस कॉलिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाले समय में एक पोर्टेबल कंप्यूटर का रूप लेने वाला है।
भले ही आज के पतले, टचस्क्रीन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस स्मार्टफोन्स के सामने Nokia 9000 Communicator एक भारी-भरकम ईंट जैसा नजर आए, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि आज के आईफोन (iPhone) या एंड्रॉइड (Android) फोन की नींव इसी डिवाइस ने रखी थी। इसने दुनिया को सिखाया कि एक फोन के भीतर इंटरनेट, ऑफिस टूल्स और कम्युनिकेशन्स को कैसे एक साथ समेटा जा सकता है।15 अगस्त 1996 को शुरू हुआ यह सफर आज इस मुकाम पर पहुंच चुका है कि स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा बन गया है। तकनीक के इतिहास में नोकिया का यह साहसिक कदम हमेशा सुनहरे अक्षरों में दर्ज रहेगा, जिसने हमें भविष्य की दुनिया से रूबरू कराया।


