Sunday, October 18, 2026

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ऐतिहासिक 2 सितंबर: वह तारीख जिसने नेहरू को सौंपी देश की कमान और दुनिया को दिया पहला ATM!

कैलेंडर की हर तारीख अपने भीतर इतिहास का एक समंदर समेटे होती है, लेकिन 2 सितंबर का दिन मानव सभ्यता के सफ़र में एक बेहद ख़ास मुकाम रखता है। यह वह तारीख है जिसने एक तरफ सदियों की गुलामी झेल रहे भारत को लोकतंत्र की पहली सीढ़ी पर खड़ा किया, तो दूसरी तरफ दुनिया को विनाशकारी विश्व युद्ध की विभीषिका से मुक्ति दिलाई। तकनीक से लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति तक, आज का दिन इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है।

आइए विस्तार से जानते हैं 2 सितंबर की उन 4 बड़ी घटनाओं को, जिन्होंने हमारे आज को आकार दिया:

1. पंडित नेहरू के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन (1946)

15 अगस्त 1947 को मिली आधिकारिक आज़ादी से ठीक एक साल पहले, 2 सितंबर 1946 को भारत की पहली अंतरिम सरकार (Interim Government of India) का गठन किया गया था। ब्रिटिश राज से एक संप्रभु और स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में सत्ता के हस्तांतरण (Transfer of Power) को सुचारू बनाने के लिए यह एक बेहद महत्वपूर्ण कदम था।

  • नेहरू बने उप-कप्तान: पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इस सरकार में वायसराय की कार्यकारी परिषद के उपाध्यक्ष (Vice President) का पद संभाला, जो व्यावहारिक रूप से प्रधानमंत्री का पद था।
  • कैबिनेट का स्वरूप: इस अंतरिम काउंसिल में सरदार वल्लभभाई पटेल (गृह मंत्रालय), डॉ. राजेंद्र प्रसाद (खाद्य एवं कृषि) और असफ़ अली (रेलवे) जैसे दिग्गज नेता शामिल थे। शुरुआती दौर में मुस्लिम लीग ने इसका बहिष्कार किया था, लेकिन बाद में अक्टूबर में वे भी इसमें शामिल हुए। इस सरकार ने स्वतंत्र भारत के संविधान निर्माण और लोकतांत्रिक ढांचे की असली बुनियाद रखी थी।

2. द्वितीय विश्व युद्ध का आधिकारिक अंत (1945)

यूं तो अगस्त 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए जाने के बाद जापान ने घुटने टेक दिए थे, लेकिन कानूनी और औपचारिक रूप से द्वितीय विश्व युद्ध का अंत 2 सितंबर 1945 को हुआ।

  • युद्धपोत ‘मिसौरी’ पर आत्मसमर्पण: टोक्यो की खाड़ी में खड़े अमेरिकी नौसेना के विशाल युद्धपोत ‘यूएसएस मिसौरी’ (USS Missouri) पर एक ऐतिहासिक समारोह आयोजित किया गया।
  • दस्तावेज़ों पर दस्तखत: जापानी विदेश मंत्री ममोरु शिगेमित्सु और जनरल योशिजीरो उमेज़ू ने मित्र राष्ट्रों (Allied Forces) के सामने बिना शर्त आत्मसमर्पण के आधिकारिक दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर किए। इस हस्ताक्षर के साथ ही 6 साल तक चला, 7 करोड़ से अधिक जानें लेने वाला और दुनिया को तबाह करने वाला इंसानी इतिहास का सबसे भीषण महायुद्ध हमेशा के लिए समाप्त हो गया।

3. बैंकिंग जगत में महाक्रांति: दुनिया का पहला एटीएम (1969)

आज हम आधी रात को भी सड़क किनारे लगे कैबिन से पैसे निकाल लेते हैं, लेकिन इस आधुनिक सुविधा की शुरुआत आज ही के दिन हुई थी। 2 सितंबर 1969 को न्यूयॉर्क के रॉकफिला सेंटर स्थित ‘केमिकल बैंक’ ने दुनिया की पहली ऑटोमेटेड टेलर मशीन (ATM) को जनता के सामने पेश किया था।

  • डॉन वेटजेल का आविष्कार: इस मशीन को इंजीनियर डॉन वेटजेल (Don Wetzel) और उनकी टीम ने विकसित किया था।
  • शुरुआती स्वरूप: शुरुआत में यह मशीन आज की तरह अन्य बैंकों से जुड़ी नहीं थी और न ही इससे तुरंत बैलेंस चेक होता था; यह केवल बैंक खाते से नकदी (कैश) बाहर निकालने का काम करती थी। इसने बैंकिंग सेक्टर से कागज़ी काम और लंबी लाइनों के झंझट को ख़त्म कर डिजिटल इकॉनमी का रास्ता साफ़ किया।

4. हो ची मिन्ह ने की वियतनाम की आज़ादी की घोषणा (1945)

2 सितंबर 1945 को दक्षिण-पूर्व एशिया की राजनीति में एक नया सूर्योदय हुआ। हनोई के बा दिन्ह स्क्वायर पर लाखों की भीड़ के सामने वियतनामी क्रांतिकारी नेता हो ची मिन्ह (Ho Chi Minh) ने फ्रांस और जापान के औपनिवेशिक शासन से वियतनाम की स्वतंत्रता की घोषणा की।

  • बना लोकतांत्रिक गणराज्य: इसके साथ ही ‘डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ वियतनाम’ का जन्म हुआ। हालांकि, इसके बाद वियतनाम को पूरी तरह स्थिर होने के लिए फ्रांस और बाद में अमेरिका के साथ एक लंबा और खूनी संघर्ष (वियतनाम युद्ध) लड़ना पड़ा, लेकिन आज़ादी की पहली हुंकार इसी दिन भरी गई थी। यही कारण है कि 2 सितंबर को आज भी वियतनाम में ‘राष्ट्रीय दिवस’ (National Day) के रूप में बेहद धूमधाम से मनाया जाता है।

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