Saturday, October 17, 2026

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18 साल से कालेज की राह देख रहा शहीदों का ग्राम अमझेरा, घोषणा से आगे नहीं बढ़ी सरकार-2008 में शिवराज सिंह चौहान ने की थी घोषणा, 2024 में मुख्यमंत्री को दिखाई फाइल; फिर भी दो साल से स्वीकृति का इंतजार

18 साल से कालेज की राह देख रहा शहीदों का ग्राम अमझेरा, घोषणा से आगे नहीं बढ़ी सरकार
-2008 में शिवराज सिंह चौहान ने की थी घोषणा, 2024 में मुख्यमंत्री को दिखाई फाइल; फिर भी दो साल से स्वीकृति का इंतजार

जितेन्द्र चौहान कि रिपोर्ट

अमझेरा: शहीद महाराव बख्तावरसिंह राठौड़ की नगरी अमझेरा में कालेज की घोषणा 18 साल से सरकारी फाइलों में कैद है। वर्ष 2008 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अमझेरा में नवीन महाविद्यालय खोलने की घोषणा की थी। घोषणा के बाद सरकारें बदलीं, मुख्यमंत्री बदले, जनप्रतिनिधि बदलते रहे, लेकिन अमझेरा के विद्यार्थियों की कालेज की जरुरत जस की तस है। वर्ष 2024 में फिर कालेज की फाइल मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव के सामने रखी गई। यहां भी जल्द स्वीकृति और शुरुआत का आश्वासन मिला, लेकिन उस आश्वासन को भी दो साल बीत गए और कालेज अब तक कागज से बाहर नहीं निकल पाया। सबसे बड़ी विडंबना ये है कि अमझेरा और आसपास के क्षेत्र में हर साल करीब 350 से 400 विद्यार्थी 12वीं पास करते हैं, लेकिन उनके लिए स्थानीय स्तर पर एक भी शासकीय कालेज नहीं है। यानी हर साल नई पीढ़ी 12वीं के बाद उच्च शिक्षा की दहलीज पर पहुंचती है और दूरी, खर्च तथा साधनों की कमी के
कारण बड़ी संख्या में वहीं रुक जाती है।

18 साल में 18 कदम भी नहीं बढ़ी फाइल

2008 में हुई घोषणा के बाद अमझेरा के लोगों को उम्मीद थी कि जल्द कालेज शुरु होगा। लेकिन 18 वर्ष बाद भी स्थिति ये है कि कालेज भवन, कक्षाएं और प्रवेश तो दूर, स्वीकृति की प्रक्रिया ही पूरी नहीं हुई। वर्ष 2024 में जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के सामने मामला रखा तो एक बार फिर उम्मीद जगी। मुख्यमंत्री ने जल्द महाविद्यालय स्वीकृत कर शुरु करने की बात कही, लेकिन दो वर्ष बाद भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ। सवाल ये है कि जब एक कालेज की जरुरत 18 साल से सामने है तो सरकार को इसे शुरु करने में आखिर कितने साल और चाहिए।

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400 बच्चे पास, आगे की राह बंद

अमझेरा के शासकीय स्कूल से हर वर्ष 200 से अधिक विद्यार्थी 12वीं पास करते हैं। निजी स्कूलों से 80 से 100 और आसपास के आदिवासी गांवों के स्कूलों से 70 से 80 विद्यार्थी 12वीं उत्तीर्ण होते हैं। यानी हर साल 350 से 400 विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए तैयार होते हैं। लेकिन धार और राजगढ़ के शासकीय कालेज करीब 30 किलोमीटर दूर हैं। मनावर की दूरी करीब 45 किलोमीटर है। आर्थिक रुप से कमजोर परिवारों के लिए रोज इतनी दूरी तय कर बच्चों को कालेज भेजना आसान नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इनमें से करीब 20 प्रतिशत विद्यार्थी ही नियमित या निजी माध्यम से उच्च शिक्षा ले पाते हैं। बाकी विद्यार्थियों की पढ़ाई 12वीं के बाद छूट जाती है।

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बालिकाओं की राह और मुश्किल

दूरी का असर छात्राओं पर और ज्यादा है। परिवहन की कमी और सामाजिक परिस्थितियों के कारण क्षेत्र की 10 प्रतिशत छात्राएं भी मुश्किल से कालेज तक पहुंच पाती हैं। ऐसे में स्थानीय कालेज नहीं होना सिर्फ शिक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि बेटियों की उच्च शिक्षा के अवसरों पर भी सीधा असर डाल रहा है।

चार तहसीलों के विद्यार्थियों को मिल सकता है लाभ

अमझेरा के आसपास धार, सरदारपुर, गंधवानी और मनावर तहसीलों के कई गांव हैं। यहां बड़ी संख्या में आदिवासी और कमजोर वर्ग के परिवार रहते हैं। अमझेरा में शासकीय महाविद्यालय खुलता है तो इन क्षेत्रों के विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा मिल सकती है। जिला पंचायत अध्यक्ष सरदार सिंह मेड़ा, पूर्व जिला पंचायत सदस्य कमल यादव, जनपद सदस्य नेहा शुभम दीक्षित सहित क्षेत्रवासी कई वर्षों से महाविद्यालय की मांग उठा रहे हैं। अब अमझेरा के लोगों की मांग सिर्फ कालेज की नहीं, 18 साल पुरानी घोषणा का हिसाब मांगने की है। हर साल 350-400 विद्यार्थी 12वीं पास कर रहे हैं, लेकिन सरकार की कालेज संबंधी घोषणा अभी भी उसी जगह खड़ी है, जहां 2008 में थी।

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