जन विश्वास अभियान के दौरान CM का कड़ा रुख
जन विश्वास अभियान के तहत आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक ढिलाई पर बेहद सख्त तेवर दिखाए। मंच पर जनता की शिकायतें और विभागीय योजनाओं की समीक्षा रिपोर्ट देखते ही मुख्यमंत्री का पारा चढ़ गया।
उन्होंने बिना किसी देरी के मंच से ही ऑन-द-स्पॉट एक्शन लेते हुए 1 डिप्टी कलेक्टर, 2 मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) समेत कुल 7 अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करने का फरमान सुना दिया। मुख्यमंत्री के इस अचानक उठाए गए कदम से पूरे प्रशासनिक महकमे में अफरा-तफरी मच गई।
जनता की शिकायतों और लापरवाही पर गिरी गाज
कार्यक्रम के दौरान स्थानीय नागरिकों ने सीधे मुख्यमंत्री के सामने अधिकारियों की सुस्ती, फाइलें अटकाने और सरकारी योजनाओं का लाभ न मिलने की शिकायतें रखीं। जब मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से इन पर जवाब मांगा, तो वे संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। योजनाओं के क्रियान्वयन में पाई गई गंभीर कमियों और जनता की अनदेखी की पुष्टि होते ही मुख्यमंत्री ने माइक से अधिकारियों के नाम पुकारे और उनके निलंबन के आदेश जारी कर दिए
“लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी” — मुख्यमंत्री का सख्त संदेश
इस कड़ी कार्रवाई के बाद सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि जनता के काम में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि ‘जन विश्वास अभियान’ का मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं और सुविधाओं को सीधे जनता के द्वार तक पहुँचाना है। अगर इसमें कोई भी अधिकारी रोड़ा बनेगा या अपने कर्तव्य में लापरवाही बरतेगा, तो उसे पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।
प्रशासनिक गलियारे में मचा हड़कंप
मुख्यमंत्री के इस कड़े रुख के बाद जिले और प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप का माहौल है। ऑन-द-स्पॉट निलंबन की इस कार्रवाई से अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को भी स्पष्ट संदेश मिल गया है कि जन समस्याओं के त्वरित समाधान और सरकारी योजनाओं के समय पर निष्पादन में कोई भी बहाना स्वीकार नहीं किया जाएगा।


