Saturday, October 17, 2026

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इंदौर के नामचीन गरबा...

इंदौर के माता कनकेश्वरी गरबा पंडाल में बीजेपी नेता कमल चौहान द्वारा 15 वर्षीय किशोरी और उसके परिवार के साथ बदसलूकी और धक्का-मुक्की का वीडियो वायरल. कांग्रेस ने आरोपी नेता की बर्खास्तगी और सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की. पढ़ें पूरी खबर.

बांग्लादेश में बड़ा विवाद:...

बांग्लादेश की जगन्नाथ यूनिवर्सिटी में दुर्गा पूजा के महाषष्ठी के दिन केंद्रीय मंदिर के पास गोमांस पकाने और कैंपस में गोकशी के ऐलान से सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया है। पहले रोक लगाने के बाद प्रशासन ने छात्रों के दबाव में यू-टर्न लिया। पूरी खबर पढ़ें।

मांडू में सूखे का...

धार जिला सूखाग्रस्त घोषित होने के बाद ऐतिहासिक नगरी मांडू में जल संकट गहराया। नगर परिषद ने मुनादी कराकर तालाबों के पानी को कृषि व निर्माण कार्यों में इस्तेमाल करने पर रोक लगाई।

उत्तराखंड के ऐतिहासिक आदि...

उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में स्थित ऐतिहासिक आदि बद्री मां भगवती शक्तिपीठ (बदियाकोट) में भीषण आग लगने से सदियों पुराना मुख्य मंदिर और उसकी अद्भुत काष्ठकला जलकर खाक हो गई है। पूरी खबर पढ़ें।
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PF और पेंशन पर सरकार का बड़ा ऐलान: सैलरी लिमिट ₹15,000 से बढ़कर हुई ₹25,000, जानें आपकी इन-हैंड सैलरी पर क्या होगा असर

नई दिल्ली, 16 सितंबर 2026: देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के लिए एक बहुत बड़ी खबर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने EPFO (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन) की अनिवार्य कवरेज सीमा (Wage Ceiling) को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने के ऐतिहासिक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कैबिनेट बैठक के बाद एक press briefing में इस बड़े फैसले की आधिकारिक घोषणा की। यह नया नियम विश्वकर्मा पूजा (17 सितंबर 2026) से देश भर में प्रभावी रूप से लागू माना जाएगा। साल 2014 के बाद यानी पूरे 12 साल बाद पीएफ नियमों में यह अब तक का सबसे बड़ा और क्रांतिकारी संशोधन है।

➡️ 51 लाख से अधिक नए कर्मचारियों को मिलेगा ‘सोशल सिक्योरिटी’ का कवर

सरकार के इस फैसले से देश की एक बहुत बड़ी वर्कफोर्स को सीधा फायदा मिलने जा रहा है। अब तक जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और डीए (Basic + DA) ₹15,000 से अधिक थी, उनके लिए ईपीएफओ के दायरे में आना अनिवार्य नहीं था। लेकिन अब यह सीमा ₹25,000 हो जाने के कारण 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य रूप से इस सामाजिक सुरक्षा तंत्र से जुड़ जाएंगे। इस बड़े कल्याणकारी कदम को सुचारू रूप से चलाने के लिए केंद्र सरकार हर साल करीब ₹11,339 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय खर्च वहन करेगी।

कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी और सेविंग्स पर क्या होगा असर?

इस नियम के लागू होने के बाद उन कर्मचारियों के पर्सनल फाइनेंस (Personal Finance) पर सबसे ज्यादा असर दिखेगा जिनकी सैलरी ₹15,000 से ₹25,000 के ब्रैकेट में आती है। सबसे पहला बदलाव यह होगा कि जो लोग इस सैलरी रेंज में हैं, वे अब सीधे EPFO के सदस्य बन जाएंगे।

चूंकि बेसिक सैलरी का 12% हिस्सा पीएफ में कटेगा, इसलिए कर्मचारियों की मंथली इन-हैंड सैलरी पहले के मुकाबले थोड़ी कम हो जाएगी। हालांकि, कंपनी और कर्मचारी दोनों का पीएफ योगदान बड़े बेस पर तय होने से भविष्य का रिटायरमेंट फंड (PF Corpus) दोगुनी रफ्तार से बढ़ेगा।

इसके साथ ही पेंशन फंड में योगदान बढ़ने से रिटायरमेंट के बाद हर महीने मिलने वाली मंथली पेंशन (EPS) काफी ज्यादा हो जाएगी। इसके अलावा, EPFO की तरफ से मिलने वाले मुफ्त इंश्योरेंस कवर (EDLI) की लिमिट भी सैलरी बेस बढ़ने से स्वतः बढ़कर अधिकतम ₹7 लाख से अधिक हो जाएगी।

फैसला क्यों था जरूरी?

श्रम संगठनों और कर्मचारी यूनियनों द्वारा पिछले कई सालों से इस सैलरी लिमिट को बढ़ाने की मांग की जा रही थी। इससे पहले सितंबर 2014 में इस सीमा को ₹6,500 से बढ़ाकर ₹15,000 किया गया था। पिछले एक दशक में देश में बढ़े जीवन स्तर, महंगाई और न्यूनतम वेतन में हुई वृद्धि को देखते हुए ₹15,000 की पुरानी सीमा पूरी तरह अप्रासंगिक हो चुकी थी। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की एक सख्त टिप्पणी के बाद सरकार ने इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ाया और करोड़ों कर्मचारियों को त्योहारों का बड़ा तोहफा दे दिया।

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