वित्तीय प्रबंधन मजबूत: सरकार ने कर्ज का लक्ष्य ₹1.20 लाख करोड़ घटाया, राजकोषीय अनुशासन पर बड़ा कदम
नई दिल्ली:
भारत सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था और वित्तीय सेहत को लेकर एक बड़ा और सकारात्मक कदम उठाया है। वित्त मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष (2026-27) के लिए अपने कुल अनुमानित बाजार कर्ज (Gross Market Borrowing) में ₹1,20,494 करोड़ (करीब ₹1.20 लाख करोड़) की बड़ी कटौती करने का फैसला किया है। अब सरकार पूरे साल में ₹17.20 लाख करोड़ के बजटीय अनुमान की जगह केवल ₹15.99 लाख करोड़ का कर्ज ही बाजार से लेगी।
दूसरी छमाही (H2) का उधारी कैलेंडर जारी
वित्त मंत्रालय ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ मिलकर अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 की अवधि (दूसरी छमाही) के लिए उधारी का पूरा प्लान जारी कर दिया है। इस 6 महीने के दौरान सरकार बाजार से ₹7.86 लाख करोड़ जुटाएगी। यह कर्ज कुल 23 साप्ताहिक नीलामियों (Weekly Auctions) के जरिए लिया जाएगा, जिसमें हर हफ्ते ₹30,000 करोड़ से ₹39,000 करोड़ तक के बॉन्ड जारी होंगे। सरकार इस बार 3, 5, 7, 10, 15, 30, 40 और 50 वर्षों की मैच्योरिटी वाले बॉन्ड पेश करेगी। इनमें सबसे ज्यादा हिस्सा 10 साल की मैच्योरिटी वाले बॉन्ड्स (26.3%) का होगा। चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में सरकार हर हफ्ते ₹23,000 करोड़ के ट्रेजरी बिल जारी कर शॉर्ट-term फंड जुटाएगी।
₹15,000 करोड़ के ‘सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड’
इस कर्ज योजना में पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ (Sustainable) प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने के लिए ₹15,000 करोड़ के सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड (Sovereign Green Bonds) भी शामिल किए गए हैं। इसे मिलाकर पूरे साल का ग्रीन बॉन्ड कोटा ₹30,000 करोड़ हो जाएगा, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है।
कर्ज कम करने की मुख्य वजह?
अर्थशास्त्रियों के मुताबिक सरकार द्वारा कर्ज घटाने के पीछे दो बड़े कारण हैं। पहला, सरकार की डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स से होने वाली कमाई (Tax Revenue) उम्मीद से काफी बेहतर रही है। दूसरा, सरकारी संपत्तियों के मुद्रीकरण (Asset Monetisation) से सरकार के खजाने में अच्छा खासा पैसा आया है, जिससे उसे बाजार से ज्यादा उधार लेने की जरूरत नहीं पड़ी।
देश और आम जनता पर क्या होगा इसका असर?
जब सरकार बाजार से कम कर्ज लेती है, तो बैंकों के पास आम जनता और कॉरपोरेट सेक्टर्स को लोन देने के लिए ज्यादा पैसा बचता है। इससे आने वाले समय में लोन (Home/Car Loan) की ब्याज दरें स्थिर या कम हो सकती हैं। इस घोषणा से बॉन्ड मार्केट में तेजी देखने को मिल सकती है, जिससे बॉन्ड यील्ड (Bond Yield) पर दबाव कम होगा जो बैंकों के लिए अच्छा संकेत है। राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को काबू में रखने की सरकार की इस प्रतिबद्धता से विदेशी निवेशकों (FIIs) का भारतीय बाजार पर भरोसा बढ़ेगा, जिसका शेयर बाजार पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।


