मध्य प्रदेश के गुना जिले से इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक बेहद गंभीर वारदात सामने आई है। कैंट थाना क्षेत्र के पिपरोदा केशराज गांव में पुराने जमीनी विवाद और मक्का की फसल चोरी का विरोध करने पर दबंगों ने दलित परिवार की महिलाओं और एक नाबालिग बच्ची के साथ बर्बरता की सारी हदें पार कर दीं। पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें सरेराह रास्ते से जबरन खींचकर पीटा गया, सड़क पर घसीटा गया और 10वीं कक्षा में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा के कपड़े तक फाड़ दिए गए। पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए नामजद आरोपियों के खिलाफ एससी-एसटी (SC-ST) एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर लिया है।
थाने जा रही महिलाओं को रास्ते में घेरा और घसीटा
यह पूरी वारदात सुबह करीब 6:30 बजे की है। पीड़ित परिवार की महिलाएं, जिनमें मां तुलसाबाई, बहू सीमा अहिरवार और 10वीं कक्षा में पढ़ने वाली 17 वर्षीय नाबालिग बेटी वर्षा शामिल हैं, अपने खेत पर काम के सिलसिले में गई थीं। खेत पहुंचने पर उन्हें पता चला कि उनकी कटी रखी मक्का की फसल के 4-5 बड़े ढेर गायब हैं। जब वे इस चोरी की शिकायत दर्ज कराने पैदल ही कैंट पुलिस थाने की तरफ जा रही थीं, तभी रास्ते में दबंगों ने उनका रास्ता रोक लिया।
घर में बंधक बनाकर की बर्बरता, कपड़े फाड़े
आरोपियों ने महिलाओं को सरेराह गंदी-गंदी जातिसूचक गालियां देना शुरू कर दिया। जब महिलाओं ने इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने उनके बाल और हाथ पकड़े और उन्हें सड़क पर बेरहमी से घसीटना शुरू कर दिया। इसके बाद दबंग महिलाओं को जबरन खींचकर अपने घर के अंदर ले गए और दरवाजा बंद कर उन्हें बंधक बना लिया। घर के भीतर महिलाओं को लात-घूंसों और थप्पड़ों से बेरहमी से पीटा गया। इस दौरान एक आरोपी ने 10वीं की नाबालिग छात्रा के साथ सरेआम अभद्रता करते हुए उसके कपड़े तक फाड़ दिए। दबंगों ने पीड़ित परिवार को सरेआम धमकी दी कि यदि वे दोबारा अपने खेत पर दिखाई दिए, तो उन्हें जान से मार दिया जाएगा। इस क्रूर हमले में मां तुलसाबाई की छाती और पीठ पर गंभीर चोटें आई हैं, जबकि बहू सीमा और नाबालिग बेटी वर्षा के पूरे शरीर, सिर और हाथों पर गंभीर अंदरूनी व बाहरी चोटें आई हैं।
चार नामजद आरोपियों पर केस दर्ज
इस पूरी घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद पुलिस हेल्पलाइन (डायल 112) को सूचना मिली। पुलिस बल ने तुरंत मौके पर पहुंचकर महिलाओं को आरोपियों के चंगुल से सुरक्षित छुड़ाया और थाने लेकर आए। पीड़ितों को तुरंत चिकित्सकीय परीक्षण (Medical Examination) के लिए अस्पताल भेजा गया। पुलिस ने पीड़ित परिवार की शिकायत पर तत्काल संज्ञान लेते हुए गांव के ही चार नामजद दबंगों—गजराम यादव, लल्लू यादव, रामकुमार यादव और धर्मेंद्र यादव—के खिलाफ मामला पंजीकृत कर लिया है।
इन गंभीर धाराओं में हुई कार्रवाई
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की है। आरोपियों पर मारपीट करने, सरेआम गाली-गलौज करने और जान से मारने की धमकी देने के लिए धारा 115, 296 और 351(2) BNS लगाई गई है। इसके साथ ही, नाबालिग छात्रा के कपड़े फाड़ने और लज्जा भंग करने के अपराध में धारा 74 BNS (महिला की लज्जा भंग करने के उद्देश्य से आपराधिक बल का प्रयोग) जोड़ी गई है। दलित परिवार को जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने और प्रताड़ित करने के कारण मामले में एससी-एसटी एक्ट की विशेष धाराएं भी लगाई गई हैं। पुलिस प्रशासन का कहना है कि गांव में तनाव को देखते हुए स्थिति पर पैनी नजर रखी जा रही है और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।


