भोपाल। मध्यप्रदेश में कुकुरमुत्ते की तरह खुल रहे निजी कोचिंग संस्थानों की मनमानी, मनमाफिक फीस वसूली और बुनियादी सुविधाओं की कमी पर लगाम कसने के लिए राज्य सरकार ने सबसे बड़ा कानून लागू कर दिया है। उच्च शिक्षा विभाग ने ‘मध्यप्रदेश कोचिंग केंद्र (पंजीयन एवं विनियमन) नियम, 2026’ का फाइनल नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।
इस नए कानून के तहत अब राज्य का कोई भी कोचिंग सेंटर बिना सरकारी रजिस्ट्रेशन के संचालित नहीं हो सकेगा। इसके साथ ही कोचिंग संचालकों को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर फीस, कोर्स, रिफंड पॉलिसी और पढ़ाने वाले शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर भारी जुर्माने से लेकर उनका पंजीयन पूरी तरह रद्द करने का प्रावधान किया गया है।
हर ब्रांच का अलग रजिस्ट्रेशन: जानिए पंजीयन के कड़े नियम
सरकार ने कोचिंग सेंटरों की जवाबदेही तय करने के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी और सख्त बनाया है:
- 90 दिनों की समय सीमा: प्रदेश में पहले से संचालित सभी छोटे-बड़े कोचिंग सेंटरों को इस राजपत्र (Notification) प्रकाशन की तारीख से 90 दिनों के भीतर जिला स्तर पर पंजीयन के लिए अनिवार्य रूप से आवेदन करना होगा।
- 3 साल की वैधता: कोचिंग के लिए मिलने वाला यह रजिस्ट्रेशन हमेशा के लिए नहीं होगा। इसकी अवधि केवल 3 साल की होगी, जिसके बाद इसे दोबारा रिन्यू (नवीनीकरण) कराना पड़ेगा।
- नॉन-ट्रांसफरेबल (अहस्तांतरणीय): कोचिंग का रजिस्ट्रेशन किसी दूसरे व्यक्ति या संस्था को ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा।
- मल्टीपल ब्रांचेज पर नकेल: यदि किसी कोचिंग संचालक की शहर या राज्य में एक से अधिक शाखाएं (Branches) हैं, तो उन्हें एक संस्थान नहीं माना जाएगा। हर एक ब्रांच के लिए अलग से नया रजिस्ट्रेशन लेना अनिवार्य होगा।
वेबसाइट पर पारदर्शिता: इन जानकारियों को छुपाया तो होगी कार्रवाई
नियमों के मुताबिक, अब कोई भी कोचिंग सेंटर गुपचुप तरीके से या पैम्फलेट पर भ्रामक प्रचार करके छात्रों को नहीं ठग सकेगा। प्रत्येक कोचिंग संस्थान को अपनी खुद की आधिकारिक वेबसाइट बनानी होगी और उस पर निम्नलिखित जानकारियां अपलोड करनी होंगी:
- फीस का पूरा ढांचा (Fee Structure): किस कोर्स की कितनी फीस है, इसकी पूरी जानकारी। कोर्स के बीच में किसी भी तरह की फीस बढ़ोतरी पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।
- शिक्षकों का प्रोफाइल (Tutors Profile): कोचिंग में पढ़ाने वाले ट्यूटर्स की शैक्षणिक योग्यता और उनका अनुभव। कोचिंग में पढ़ाने वाले ट्यूटर्स के लिए न्यूनतम योग्यता स्नातक (Graduation) होना अनिवार्य कर दिया गया है।
- उपलब्ध सुविधाएं: संस्थान में कुल कितने कमरे हैं, बैठने की क्या व्यवस्था है और सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं।
- सफलता के वास्तविक आंकड़े: पिछले 5 वर्षों में उस संस्थान से परीक्षा पास करने वाले विद्यार्थियों के प्रामाणिक आंकड़े। किसी भी तरह का भ्रामक या झूठा विज्ञापन (जैसे 100% सिलेक्शन की गारंटी) देने पर सख्त पाबंदी होगी।
- शिकायत निवारण व्यवस्था: छात्रों या अभिभावकों की शिकायतों को दर्ज करने और उनके निपटारे के लिए वेबसाइट पर ऑनलाइन पोर्टल या संपर्क सूत्र देना होगा।
विद्यार्थियों से भेदभाव पर पूरी तरह रोक
कोचिंग संस्थानों में अक्सर छात्रों के प्रदर्शन या उनकी पृष्ठभूमि के आधार पर अलग-अलग व्यवहार की शिकायतें आती थीं। नए नियमों में इसे पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है:
- समानता का अधिकार: कोचिंग संचालक प्रवेश या शिक्षण प्रक्रिया के दौरान किसी भी विद्यार्थी के साथ धर्म, मूल वंश, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर कोई भेदभाव नहीं कर सकेंगे।
- अलग बैच बनाने पर पाबंदी: इन आधारों पर छात्रों का कोई भी अलग बैच या वर्ग (Sections) नहीं बनाया जा सकेगा। सभी को समान माहौल में शिक्षा देनी होगी।
सुरक्षा के लिए CCTV का कड़ा पहरा और निजता (Privacy) का सम्मान
छात्र-छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधोसंरचना (Infrastructure) और सुरक्षा मानकों को कड़ा किया गया है:
- अनिवार्य CCTV: कोचिंग परिसर के सभी प्रमुख और उपयुक्त स्थानों पर सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाना अनिवार्य होगा, ताकि सुरक्षा की लाइव मॉनिटरिंग हो सके।
- निजता का सख्त नियम: विद्यार्थियों की प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखा जाएगा। कोचिंग परिसर के शौचालय (Washrooms), चेंजिंग रूम और काउंसलिंग रूम जैसे संवेदनशील स्थानों पर किसी भी प्रकार की रिकॉर्डिंग या कैमरा लगाना पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा।
- बुनियादी सुविधाएं: हर संस्थान में प्रति छात्र पर्याप्त सिटिंग स्पेस, स्वच्छ पेयजल, साफ-सफाई, फर्स्ट-एड (प्राथमिक चिकित्सा) और आग से बचाव के लिए फायर सेफ्टी एनओसी (NOC) व उपकरण होना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, परिसर में आने-जाने वाले आगंतुकों (Visitors) का नियमित रिकॉर्ड रखना होगा।
उम्र सीमा, क्लास टाइमिंग्स और मानसिक स्वास्थ्य सहायता
कोटा और अन्य कोचिंग हब्स में छात्रों के बढ़ते मानसिक तनाव और आत्महत्या के मामलों को देखते हुए सरकार ने इस कानून में विद्यार्थियों के मानसिक संरक्षण को विशेष प्राथमिकता दी है:
- उम्र और क्लास की सीमा: 16 वर्ष से कम उम्र या 10वीं कक्षा से छोटे बच्चों को किसी भी कोचिंग सेंटर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इसके साथ ही, किसी भी छात्र को दिन में 5 घंटे से अधिक नहीं पढ़ाया जा सकेगा।
- स्कूल टाइमिंग पर प्रतिबंध: जब स्कूलों का नियमित समय संचालित हो रहा हो, उस दौरान कोई भी कोचिंग संस्थान अपनी कक्षाएं नहीं लगा सकेगा। कोचिंग केवल स्कूल समय के पहले या बाद में ही संचालित होगी।
- प्रोफेशनल काउंसलर अनिवार्य: हर कोचिंग संस्थान में पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों के साथ-साथ योग्य मानसिक स्वास्थ्य परामर्शदाता (Mental Health Counselors) की तैनाती अनिवार्य होगी। छात्रों के तनाव को दूर करने के लिए नियमित रूप से करियर गाइडेंस और काउंसलिंग सेशन आयोजित करने होंगे।
लापरवाही पर भारी जुर्माने और कार्रवाई का प्रावधान
सरकार ने नियमों की अनदेखी करने वाले लापरवाह संस्थानों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की व्यवस्था की है:
- बिना रजिस्ट्रेशन कोचिंग चलाना: नए कानून के तहत बिना वैध पंजीयन के कोचिंग संचालित करने पर ₹25,000 से लेकर ₹1,000,000 (1 लाख) तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकेगा।
- पहली बार उल्लंघन पर कार्रवाई: यदि कोई कोचिंग संस्थान पहली बार गाइडलाइंस या नियमों को तोड़ते हुए पाया जाता है, तो उस पर ₹25,000 का जुर्माना लगाया जाएगा।
- दूसरी बार उल्लंघन पर कार्रवाई: यदि संस्थान अपनी गलती नहीं सुधारता और दूसरी बार भी नियमों की अवहेलना करता है, तो जुर्माने की राशि बढ़ाकर ₹1,00,000 (1 लाख) कर दी जाएगी।
- लगातार नियमों की अवहेलना: जो संस्थान बार-बार नियमों को ताक पर रखेंगे, उन पर ₹2 लाख तक का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके साथ ही प्रशासन द्वारा उस संस्थान का रजिस्ट्रेशन हमेशा के लिए रद्द (Cancel) कर कोचिंग को बंद करा दिया जाएगा।
मध्यप्रदेश कोचिंग केंद्र नियम 2026: फीस रिफंड नीति (Refund Policy)
- प्रो-राटा (Pro-rata) आधार पर रिफंड: यदि कोई छात्र किसी भी व्यक्तिगत कारण, बीमारी, मानसिक तनाव या पढ़ाई से संतुष्ट न होने के कारण कोर्स की अवधि के बीच में ही कोचिंग छोड़ देता है, तो संस्थान उसकी पूरी फीस नहीं रख सकता। कोचिंग संचालक को छात्र द्वारा अटेंड न की गई बची हुई अवधि की फीस ‘प्रो-राटा’ (यानी जितने दिन पढ़ाई नहीं की, उस अनुपात में) अनिवार्य रूप से वापस लौटानी होगी।
- एडवांस और एकमुश्त फीस पर रोक: कोचिंग संस्थान अब छात्रों या उनके अभिभावकों पर पूरे कोर्स की भारी-भरकम फीस एक साथ या एडवांस में जमा करने के लिए दबाव नहीं बना सकते। फीस को किस्तों (Installments) में लेने की सुविधा देनी होगी।
- हॉस्टल और अन्य शुल्क पर भी नियम: यदि कोचिंग संस्थान खुद का हॉस्टल या मेस संचालित करता है, तो छात्र द्वारा हॉस्टल छोड़ने पर भी बची हुई अवधि का आवास और भोजन शुल्क नियमानुसार वापस करना होगा।
- शिकायत और दंडात्मक कार्रवाई: यदि कोई कोचिंग सेंटर छात्र के छोड़ने के बाद उसकी वैध रिफंड राशि को रोकने, आनाकानी करने या लटकाने की कोशिश करता है, तो छात्र सीधे जिला स्तरीय समिति में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसे नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा और संस्थान पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।


