गौरव जोशी
इंदौर की सियासी बिसात: राहुल की ‘गूंज’ से पहले नितिन नबीन की एंट्री, आखिर मालवा में क्या पक रहा है?
मालवा का नया सियासी समीकरण
मध्य प्रदेश की व्यावसायिक और राजनीतिक राजधानी इंदौर इस समय देश के सबसे बड़े सियासी अखाड़े में तब्दील हो चुका है। महज 48 घंटों के भीतर देश की दो सबसे बड़ी राजनीतिक ताकतों के शीर्ष चेहरे यहाँ अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। 19 सितंबर को कांग्रेस के दिग्गज नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अपने चर्चित अभियान ‘छात्रों की गूंज’ के साथ इंदौर आ रहे हैं। लेकिन इस गूंज के सुनाई देने से ठीक दो दिन पहले, 17 सितंबर को भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की मध्य प्रदेश में पहली एंट्री हो रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी के दौरे से ऐन पहले भाजपा अध्यक्ष का यह कार्यक्रम कोई महज इत्तेफाक नहीं है, बल्कि यह भाजपा की एक सोची-समझी काउंटर स्ट्रैटेजी यानी जवाबी रणनीति का हिस्सा है।
युवा वोट बैंक और Gen-Z को साधने की होड़
इंदौर और पूरा मालवा क्षेत्र हमेशा से सूबे की राजनीति की दिशा तय करता आया है और इस बार दोनों ही पार्टियों का पूरा ध्यान नई पीढ़ी यानी युवा मतदाताओं पर टिका है। राहुल गांधी दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में युवाओं, बेरोजगारी और परीक्षा प्रणाली में सुधारों को लेकर लगातार मुखर रहे हैं। इंदौर coaching hub और यूनिवर्सिटीज का केंद्र है, इसलिए कांग्रेस ने रीजनल पार्क के सामने बने हाईटेक डोम में सीधे छात्रों से संवाद की तैयारी की है। दिलचस्प बात यह है कि इस कार्यक्रम को विशुद्ध रूप से युवाओं का रखने के लिए 35 साल से अधिक उम्र के नेताओं और पार्टी के पारंपरिक झंडे-बैनरों से दूरी बनाई गई है। दूसरी तरफ राहुल गांधी युवाओं के बीच सरकार विरोधी कोई नैरेटिव सेट कर पाएं, उससे पहले ही भाजपा के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की एंट्री कराई जा रही है। भाजपा इस दौरे के जरिए युवाओं को यह संदेश देना चाहती है कि उनके पास भी एक युवा, ऊर्जावान और संगठनात्मक रूप से बेहद सक्रिय राष्ट्रीय नेतृत्व मौजूद है।
मुद्दों का टकराव: संवाद बनाम डिलीवरी मॉडल
दोनों दलों ने अपने कार्यक्रमों की रूपरेखा के जरिए अपनी-अपनी प्राथमिकताओं और एजेंडे को भी साफ कर दिया है। भाजपा ने सुपर कॉरिडोर मैदान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत चुनी है। यहाँ राज्य स्तरीय स्वामित्व योजना के तहत करीब 50 हजार से ज्यादा लोगों को जमीन और मकानों के पट्टों का मालिकाना हक सौंपा जाएगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव की मौजूदगी में होने वाले इस सरकारी कार्यक्रम के जरिए भाजपा जमीनी स्तर पर अपने ठोस डिलीवरी मॉडल को जनता के सामने रख रही है। वहीं कांग्रेस का पूरा फोकस व्यवस्थापकीय कमियों, paper leak, महंगी शिक्षा और रोजगार के अवसरों की कमी जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार को घेरने का है।
परमिशन पॉलिटिक्स से गरमाया माहौल
राहुल गांधी के इस दौरे को लेकर इंदौर में शुरुआती दौर से ही अनुमति की राजनीति देखने को मिली। पहले यह कार्यक्रम नेहरू स्टेडियम में होना था, लेकिन नगर निगम से मंजूरी न मिलने के बाद काफी खींचतान हुई और अंततः भारी-भरकम राशि जमा कर रीजनल पार्क के सामने की जमीन पर अनुमति मिली। कांग्रेस ने इसे भाजपा की घबराहट करार दिया, जबकि भाजपा ने इसे प्रशासनिक और कानूनी नियमों के तहत की गई कार्रवाई बताया। इस विवाद ने कार्यक्रम से पहले ही सियासी पारे को आसमान पर पहुंचा दिया है।
मालवा के चक्रव्यूह में संघ की सक्रियता
इस पूरे घटनाक्रम को और अधिक दिलचस्प बना देती है आरएसएस की सक्रियता। जिस दौरान नितिन नबीन इंदौर और उज्जैन के दौरों पर होंगे, ठीक उसी समय 17 और 18 सितंबर को आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत भी उज्जैन में मौजूद रहेंगे और युवा धर्म संसद को संबोधित करेंगे। संगठन और सत्ता के शीर्ष चेहरों का एक ही समय पर मालवा-निमाड़ क्षेत्र में सक्रिय होना यह साफ करता है कि भाजपा और संघ परिवार इस क्षेत्र में विपक्ष को पैर पसारने का कोई मौका नहीं देना चाहते हैं।
लिटमस टेस्ट: ‘गूंज’ बनाम ‘स्वामित्व’ का अंतिम फैसला
इंदौर का यह सप्ताह सिर्फ दो बड़े नेताओं के दौरों का गवाह नहीं बन रहा, बल्कि यह आगामी समय के लिए राजनीतिक नैरेटिव तय करने की प्रयोगशाला बन चुका है। कांग्रेस और विशेषकर जीतू पटवारी के नेतृत्व के लिए राहुल गांधी का यह शो राज्य में अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन और युवाओं के भरोसे को वापस पाने का एक बड़ा लिटमस टेस्ट है। वहीं दूसरी तरफ, राहुल की एंट्री से ठीक पहले अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को उतारकर भाजपा ने यह साफ संदेश दे दिया है कि वह आक्रामक और रीयल-टाइम रिस्पॉन्स वाली राजनीति के लिए पूरी तरह तैयार है। अब देखना यह होगा कि इंदौर का युवा और आम जनमानस भाजपा के स्वामित्व और डिलीवरी वाले दांव पर मुहर लगाता है या फिर राहुल गांधी की गूंज के साथ खड़ा होता है।


