मध्य प्रदेश के खंडवा जिले से एक हैरान कर देने वाला सरकारी फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहाँ कोलगांव के तत्कालीन पटवारी राजेश मंडलोई पर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए गांव की 51 संपत्तियों को अपने और अपनी पत्नी मनीषा मंडलोई के नाम दर्ज कराने का गंभीर आरोप लगा है। ग्रामीणों की शिकायतों और शुरुआती जांच रिपोर्ट के बाद खंडवा अनुविभागीय अधिकारी (SDO) ऋषि सिंघई ने पटवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
सरकार की ‘स्वामित्व भू-अधिकार योजना’ के तहत ग्रामीण आबादी क्षेत्र में रहने वाले पात्र परिवारों को आवासीय पट्टे और मालिकाना हक दिए जा रहे हैं। कोलगांव में इस योजना के तहत कुल 935 पट्टे जारी किए गए। जब इन पट्टों की अंतिम सूची सामने आई, तो ग्रामीणों के होश उड़ गए। सूची के मुताबिक, कुल पट्टों में से 48 पट्टे खुद पटवारी राजेश मंडलोई और 3 पट्टे उनकी पत्नी के नाम दर्ज पाए गए।
ग्रामीणों के आंगन और सार्वजनिक संपत्तियों पर भी कब्जा
ग्रामीणों का आरोप है कि पटवारी ने रिकॉर्ड में हेरफेर करते हुए गांव के आम रास्तों, सार्वजनिक मैदानों और यहाँ तक कि लोगों के घरों के निजी आंगनों को भी नहीं छोड़ा।
- घर का आंगन हुआ पटवारी का: गांव के निवासी दीपक तोमर ने बताया कि उनके परिवार के चार मकान एक ही परिसर में हैं, जिसके बीच की जमीन का इस्तेमाल वे पीढ़ियों से आंगन के रूप में कर रहे हैं। स्वामित्व योजना की सूची में यह आंगन अब पटवारी के नाम दर्ज हो चुका है।
- मांगलिक भवन का काम रुका: सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश चाकरे के अनुसार, गांव के मुख्य रास्ते से लगी सरकारी जमीन (खसरा नंबर 623) पर ग्रामीण चंदा जुटाकर बलाही समाज का मांगलिक भवन बना रहे थे। प्लिंथ लेवल तक काम होने के बाद जब पता चला कि यह जमीन भी पटवारी ने अपने नाम करा ली है, तो विवाद के डर से निर्माण कार्य रोकना पड़ा।
- बावड़ी और मैदान भी लपेटे में: गांव के शुभम तोमर ने बताया कि जिस खुले मैदान और बावड़ी से पूरा मोहल्ला मोटर पंप के जरिए पानी भरता था, वह हिस्सा भी सरकारी रिकॉर्ड में पटवारी के स्वामित्व में दिखा रहा है।
कांग्रेस ने उठाई थी आवाज, जांच के बाद गिरी गाज
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब कांग्रेस के जिलाध्यक्ष उत्तमपाल सिंह पुरनी ने मामले के पुख्ता दस्तावेज कलेक्टर को सौंपकर सरकारी जमीन के गबन की उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी। इसके बाद जावर वृत्त के नायब तहसीलदार ने मामले की मैदानी जांच की और अपनी रिपोर्ट सौंपी।
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट पाया गया कि पटवारी राजेश मंडलोई ने ‘अधिकार अभिलेख योजना’ के तहत दुर्भावनापूर्वक और पद का दुरुपयोग करते हुए इन जमीनों को अपने परिवार के नाम दर्ज किया था। इसके बाद SDO ऋषि सिंघई ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम, 1966 के तहत पटवारी को सस्पेंड करने के आदेश जारी किए।


