Saturday, September 12, 2026

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MP Government New Rule: सरकारी अफसरों और कर्मचारियों पर FIR से पहले लेनी होगी विभाग की मंजूरी, मोहन यादव सरकार का बड़ा आदेश

MP Government New Rule: सरकारी अफसरों और कर्मचारियों पर FIR से पहले लेनी होगी विभाग की मंजूरी, मोहन यादव सरकार का बड़ा आदेश

भोपाल:
मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने प्रशासनिक और पुलिसिंग व्यवस्था को लेकर एक बेहद बड़ा और नीतिगत फैसला लिया है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब राज्य में किसी भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कोई भी आपराधिक मामला (FIR) दर्ज करने से पहले संबंधित सरकारी विभाग की लिखित मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया गया है।

सरकार के इस कदम से अब पुलिस सीधे तौर पर किसी भी शासकीय सेवक पर हाथ नहीं डाल पाएगी, जिसके बाद राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में इस फैसले की काफी चर्चा हो रही है।

क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, कई बार सरकारी अधिकारियों को उनके द्वारा लिए गए नीतिगत निर्णयों या शासकीय कर्तव्यों के पालन के दौरान दुर्भावनापूर्ण शिकायतों का सामना करना पड़ता है। झूठी शिकायतों और तुरंत होने वाली एफआईआर (FIR) के कारण प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होता है और अधिकारियों का मनोबल गिरता है। इसी प्रशासनिक काम को बिना किसी डर के सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार ने यह कवच प्रदान किया है।

कैसे काम करेगा नया नियम?

  • लिखित अनुमति अनिवार्य: यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कोई शिकायत आती है, तो पुलिस सीधे केस दर्ज नहीं करेगी। पुलिस को पहले उस विभाग के सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) को पूरा मामला भेजना होगा।
  • विभाग करेगा समीक्षा: संबंधित विभाग शिकायत के तथ्यों और सबूतों की जांच करेगा। यदि विभाग को लगता है कि मामला सही है, तभी वह लिखित में एफआईआर दर्ज करने की अनुमति देगा।
  • भ्रष्टाचार के मामलों में छूट: शुरुआती जानकारी के मुताबिक, यह नियम सामान्य आपराधिक शिकायतों और कामकाज से जुड़े मामलों पर लागू होगा, ताकि सरकारी सेवकों को बेवजह परेशान न किया जा सके।

विपक्ष और जनता के बीच छिड़ी बहस

इस फैसले के सामने आने के बाद राज्य में राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई है। जानकारों का मानना है कि इस नियम से सरकारी कामकाज में तेजी आएगी और अधिकारी बिना किसी दबाव के फैसले ले सकेंगे। वहीं, कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस नियम से आम जनता के लिए किसी दागी अधिकारी के खिलाफ आवाज उठाना या कानूनी कार्रवाई करवाना थोड़ा पेचीदा हो सकता है।


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