Thursday, October 29, 2026

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बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत पर CJP प्रमुख अभिजीत दीपके का दौरा, तीखे सवालों के बाद मांगी माफी

बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत पर CJP प्रमुख अभिजीत दीपके का दौरा, तीखे सवालों के बाद मांगी माफी

बालाघाट (मध्य प्रदेश):
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में संक्रामक बीमारियों से 30 से अधिक बैगा आदिवासी बच्चों की मौत का संवेदनशील मामला शनिवार को उस समय एक नए राजनीतिक और मीडिया ड्रामे में बदल गया, जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ग्राउंड जीरो पर पहुंचे। जिला मुख्यालय से सुदूर बैहर क्षेत्र के अडोरी, कोरका और बोन्दरी गांवों का दौरा करने के दौरान दीपके को न केवल प्रशासनिक चुनौतियों, बल्कि स्थानीय मीडिया के कड़े प्रतिरोध का भी सामना करना पड़ा।

लाशों पर राजनीति का आरोप और तीखी बहस

स्थानीय युवाओं के साथ प्रभावित गांवों में पहुंचे अभिजीत दीपके जब मीडिया से मुखातिब हुए, तो उन्हें स्थानीय पत्रकारों के तीखे और अप्रत्याशित सवालों का सामना करना पड़ा। स्थानीय संवाददाताओं ने दीपके को घेरते हुए सीधे सवाल दागे कि, “जब प्रशासन और डॉक्टरों की टीमें लगातार कैंप कर रही हैं और 1000 से अधिक बच्चे ठीक हो चुके हैं, तब इस संवेदनशील मुद्दे पर बाहर से आकर राजनीति क्यों की जा रही है?”

शुरुआत में इस तीखी बहस के दौरान माहौल काफी गरमा गया और सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियोज़ में दिखा कि दीपके कुछ सवालों के जवाब देने से बचते नजर आए।

मीडियाकर्मियों से मांगी माफी: ‘जमीनी हकीकत दिखाना ही मकसद’

सवालों से घिरने और तीखी नोकझोंक के बाद, अभिजीत दीपके ने सूझबूझ दिखाते हुए मीडियाकर्मियों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि उनका मकसद किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना या स्थानीय स्तर पर चल रहे राहत कार्यों को कमतर आंकना नहीं था।

माफी मांगते हुए दीपके ने स्पष्ट किया:

“अगर मेरी किसी बात से या हमारे साथियों के व्यवहार से स्थानीय पत्रकारों को ठेस पहुंची है, तो मैं उसके लिए माफी मांगता हूँ। हमारा उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि पीड़ित आदिवासी परिवारों को न्याय मिले और अस्पतालों में बदहाली, दूषित पानी व स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के लिए प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही तय हो।”

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक जनहित याचिका (PIL) पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में दावा किया गया है कि प्रभावित आदिवासी इलाकों में अस्पताल खचाखच भरे हैं और हैंडपंपों से पीला व दूषित पानी आ रहा है। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि स्थिति अब नियंत्रण में है और सरकार ने मृतकों के परिवारों के लिए 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की है।

दीपके के इस दौरे और मीडिया के साथ हुई इस गहमा-गहमी ने बालाघाट के इस बेहद संवेदनशील स्वास्थ्य संकट को सुर्खियों में ला दिया है।

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