MP में निकाय चुनाव लड़ना हुआ 60% महंगा: महापौर के लिए ₹32 हजार और नपा अध्यक्ष के लिए ₹24 हजार हुई जमानत राशि
भोपाल (26 सितंबर 2026): मध्य प्रदेश में आगामी नगरीय निकाय चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों की जेब पर अब सीधा असर पड़ने वाला है। राज्य सरकार ने ‘मध्यप्रदेश नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994’ में बड़ा संशोधन करते हुए महापौर से लेकर पार्षद पद तक के लिए सिक्योरिटी डिपॉजिट (जमानत राशि) में भारी बढ़ोतरी कर दी है। नए नियमों के लागू होने के बाद अब चुनाव लड़ना करीब 60 फीसदी तक महंगा हो गया है।
इसके अलावा, चुनाव में काले धन और अनियंत्रित खर्च पर रोक लगाने के लिए सरकार ने नए नियम भी कड़े कर दिए हैं। अब हर प्रत्याशी को निर्वाचन से जुड़ा पूरा लेखा-जोखा सरकार को सौंपना होगा।
जमानत राशि में हुई भारी बढ़ोतरी
संशोधित प्रावधानों के तहत विभिन्न पदों के लिए जमानत राशि अब इस प्रकार बढ़ा दी गई है:
- नगर निगम महापौर: पहले इस पद के लिए ₹20,000 की जमानत राशि जमा करनी होती थी, जो अब बढ़कर ₹32,000 कर दी गई है।
- नगर पालिका अध्यक्ष: इस पद के प्रत्याशी के लिए पहले जमानत राशि ₹15,000 थी, जिसे अब बढ़ाकर ₹24,000 कर दिया गया है।
- नगर परिषद अध्यक्ष: चुनाव लड़ने के लिए पहले ₹10,000 की सिक्योरिटी लगती थी, जो अब बढ़कर ₹16,000 हो गई है।
(नोट: नियमानुसार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़े वर्ग (OBC) और महिला उम्मीदवारों के लिए इस तय राशि में रियायत का प्रावधान पहले की तरह ही लागू रहेगा।)
अलग बैंक खाता खुलवाना अनिवार्य
चुनावी पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए अब महापौर, अध्यक्ष और पार्षद पद के उम्मीदवारों को किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक में एक अलग और स्वतंत्र बैंक खाता (Separate Bank Account) खोलना होगा।
- नामांकन पत्र जमा करते समय इस नए खाते की जानकारी रिटर्निंग ऑफिसर (RO) को लिखित में देनी होगी।
- चुनाव से जुड़ी हर तरह की वित्तीय लेनदेन, चंदा या खर्च केवल इसी निर्दिष्ट खाते के माध्यम से किया जा सकेगा।
नामांकन से मतगणना तक के खर्च का देना होगा पूरा ब्योरा
नए नियमों के मुताबिक, प्रत्याशियों को नामांकन-पत्र दाखिल करने की तारीख से लेकर मतगणना के दिन तक हुए एक-एक पैसे के खर्च का हिसाब रखना होगा। चुनाव परिणाम आने के बाद तय समय-सीमा के भीतर इस चुनावी खर्च का पूरा ब्योरा राज्य निर्वाचन आयोग के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। यदि कोई उम्मीदवार तय समय के भीतर अपने खर्च का सही ब्योरा नहीं देता है, तो आयोग द्वारा उसे आगामी चुनावों के लिए अयोग्य (निरर्हित) घोषित किया जा सकता है।
नामांकन के लिए मिलेंगे कम से कम 7 दिन
सरकार ने नामांकन की समय-सीमा में भी बदलाव किया है। नए प्रावधान के अनुसार, उम्मीदवारों को नामांकन पत्र जमा करने के लिए कम से कम 7 दिनों का समय दिया जाएगा। यदि इस अवधि का आखिरी दिन (सातवां दिन) कोई सार्वजनिक अवकाश या छुट्टी का दिन होता है, तो उम्मीदवार उसके अगले कार्यदिवस (Working Day) को भी अपना नामांकन दाखिल कर सकेंगे।


