Wednesday, October 21, 2026

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21 अक्टूबर आयोडीन अल्पता दिवस पर विशेष

21 अक्टूबर आयोडीन अल्पता दिवस पर विशेष

आयोडीनयुक्त नमक न ज्यादा न कम संतुलित होना चाहिए

(अब इलेक्ट्रिक सॉल्ट का प्रयोग बढ़ेगा)

यदि आप ब्लड प्रेशर या हाइपरटेंशन की समस्या से पीड़ित है, तो अपने भोजन में बदलाव करेंगे, तो उससे दवाई की तरह फायदा पहुंचा सकता है। यदि आप अपने रोजाना के भोजन से आयोडीन नमक को कम कर दिया जाए, तो हाई ब्लड प्रेशर में हाइपरटेंशन की दवा के बराबर फायदा मिलेगा। अब वर्तमान में खाने की लगभग हर वस्तु में नमक मिलाया जा रहा है। दो ब्रेड में लगभग 400 से 500 मिलीग्राम नमक हो सकता है। खाने के साथ लिया गया अचार दिन भर की आयोडीन नमक की जरूरत को पूरा कर सकता है। एक कटोरी सूप में कई दिन की खुराक के बराबर आयोडीन नमक हो सकता है।

शरीर को स्वस्थ रहने के लिए इम्यून सिस्टम का मजबूत रहना काफी जरूरी है। स्ट्रांग इम्यून सिस्टम हमें कई तरह से इन्फेक्शन और वायरस से लड़ने में सहायता करता है। कुछ चीजों का अधिक मात्रा में सेवन करने से हमारा इम्यून सिस्टम बहुत कमजोर पड़ने लगता है। यहाँ यह स्पष्ट है कि चिप्स, फोजन, डिनर, ओर फास्ट फूड जैसे खाध्य पदार्थ शरीर के इम्यून सिस्टम को नुकसान पहुंचाते है। आयोडीन नमक की मात्रा इन खाद्य पदार्थों में अधिक होने से शरीर में होने से बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचता है। जिसकी वजह से आटो इम्यून डिसीज की आशंका बढ़ जाती है। अधिक नमक मात्रा वाले पिज्जा, बर्गर जैसे फास्ट फूड को छोड़ना ही होगा। केवल ब्लड प्रेशर ही नही ज्यादा नमक वाली चीजों को सेहत करने से हार्ट की समस्या के खतरे साथ ही किडनी को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। स्पष्ट है कि अधिक आयोडीन नमक की मात्रा सेहन करने से बल्डप्रेशर के साथ किडनी को भी नुकसान होता। रोजाना लगभग पांच ग्राम आयोडीन नमक खाकर आप हार्ट, किडनी को तंदुरुस्त रख सकते हैं। डब्ल्यूएचओ ने प्रतिदिन दो ग्राम से कम सोडियम खाने की अनुशंसा की है। इस आयोडीन नमक खाने से 10 वर्ष से हार्ट और किडनी रोग के कारण होने वाली तीन लाख मौतों को रोका जा
सकता हैं।

भारत की ओर देखे तो आयोडीन नमक के उच्च स्तर के उपभोग में उपयोग की समस्या से निपटने के लिए बहुत कम उपाय किए गए हैं। हमारे देश में सोडियम के उपयोग में कमी लाने के लिए कोई के राष्ट्रीय नीति नहीं है। देश नागरिक डब्लूएचओद्वारा अनुशंसित मात्रा से लगभग दो गुना सोडियम का सेवन कर रहे हैं। पैकेज्ड खाध्य पदार्थों की मात्रा भी बढ़ रही है। अब समय रहते लोगों को सोडियम में कटौती सहित स्वस्थ भोजन के बारे में शिक्षित करना होगा। वर्ष 2025 अंत तक सोडियम उपभोग को 30 प्रतिशत तक कम करना, गैर-संचारी रोगों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए विश्व स्वास्थय संगठन द्वारा अनुशंसित के वैश्विक लक्ष्यों में से एक है। प्रतिदिन यह देखना भी आवश्यक है, जिन पदार्थों का प्रयोग करने जा रहे उनमें पहले से अधिक नमक तो मौजूद नहीं है। विभिन्न प्रकार के स्नैक्स तैयार करने हो,नमक का कम से कम प्रयोग करे। नमक के जरिए स्वाद बढ़ाने की बजाय विभिन प्रकार के मसालों और हर्ब्स का प्रयोग अधिक करें। इसमे न केवल स्वाद में विविधता आएगी, बल्कि शरीर में विभिन्न प्रकार के पोषक तत्व पहुंचने के कारण हमारे रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी अधिक मजबूती बनेगी।
यह स्पष्ट है कि आयोडीन एक पोषक तत्व है, जिसकी कमी और अधिकता दोनों ही शरीर के लिए हानिकारक है। शरीर खुद आयोडीन नहीं बनता है। इसे प्राप्त करने का एकमात्र जरिया भोजन ही होता है। इसलिए किसी भी स्थिति में इसके संतुलन को रोकना जरूरी है। जब शरीर को पर्याप्त आयोडीन नहीं मिलता तो थायराइड को अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इसे धीरे-धीरे थायराइड का आकार बढ़ सकता है, जिसे घेंघा (डाइटर )कहते हैं। आयोडीन की गंभीर कमी से दिमाग का विकास भी प्रभावित होता है । वहीं थायराइड ग्रंथि का आकार बढ़ जाता है । यह गर्दन में सूजन या गिल्टी की तरह दिखने लगता है। लंबे समय तक आयोडीन की कमी रहने से शरीर के सामान्य कामकाज भी प्रभावित होते हैं। आयोडीन की कमी से बचने का एक आसान तरीका रोजाना आयोजन युक्त नमक का इस्तेमाल करना है। अत्यधिक नमक का सेवन उच्च रक्तचाप और हृदय बीमारी की समस्या बनती है। देश में 20 करोड़ से अधिक लोग आयोडीन की कमी से होने वाले विकारों के जोखिम में है।
हमें भी भोजन करने के दौरान भी अलग से आयोडीन नमक लेने की आदत पर लगाम लगाना पड़ेगी। अब यह भी ध्यान देने की बात है , कि भोजन तैयार करने में अब सफेद नमक का प्रयोग की बजाय सेंधा नमक या काला नमक का प्रयोग करना चाहिए। जहां तक संभव हो सफेद नमक के इस्तेमाल से बचना चाहिए। वही सेंधा नमक का अधिक उपयोग भी खतरनाक होता है। अब सफेद नमक से बचने के लिए इलेक्ट्रिक सॉल्ट स्पून का आविष्कार हो गया है। जापान की कम्पनी किरिन ने बैटरी से चलने वाली ऐसी चम्मच बनाई है जो, बिना नमक डाले ही खाने को नमकीन बना देती हैं। इस इलेक्ट्रिक साल्ट स्पून को हाल ही सीइएस इनोवेशन अवार्ड 2025 में दो श्रेणी डिजिटल स्वास्थ्य व एक्सेसिबिलिटी, और एन टेक में सम्मानित किया गया है। यह इलेक्ट्रिक स्पून जीभ पर एक विशेष तरह का संकेत भेजती है जिससे हमें नमक के स्वाद का एहसास होता है। इस तरह स्वाद भी अच्छा रहता है और शरीर में सोडियम नहीं बढ़ता है। कंपनी का कहना है कि इस चम्मच से लोग अपने खाने में नमक की मात्रा कम कर पाएंगे। इस प्रकार सोडियम के सेवन को कम भी किया जानी चाहिए, जो कि स्वास्थ्य के लिए आवश्यक माना जाता है।

डॉ. बी. आर. नलवाया, मंदसौर

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