Tuesday, October 20, 2026

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देवास में जवारा विसर्जन...

मध्य प्रदेश के देवास (राजोदा) में जवारा विसर्जन के दौरान बैंड के शोर से भड़कीं मधुमक्खियों ने 200 श्रद्धालुओं पर हमला कर दिया। इस हादसे में 40 लोग घायल हुए हैं, जबकि 200 डंक लगने से गंभीर एक युवक को इंदौर रेफर किया गया है। पूरी खबर यहाँ पढ़ें।

हनुमान चौक पर दशहरा...

उत्तराखंड के मंगलौर में दशहरे पर हिंदू-मुस्लिम एकता की अनोखी मिसाल दिखी। हनुमान चौक पर पूर्व विधायक स्वर्गीय हाजी सरवत करीम अंसारी के बेटों ने फूल-मालाओं और शॉल से दशहरा जुलूस का भव्य स्वागत किया।

मांडू में 51 फीट...

ऐतिहासिक पर्यटन नगरी मांडू में दशहरा पर्व धूमधाम से मनाया गया। श्रीराम जी के भव्य जुलूस और आकर्षक आतिशबाजी के बीच 51 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव मनाया गया।

रुड़की में 107वां दशहरा...

रुड़की में 107वां दशहरा महोत्सव धूमधाम से संपन्न हुआ। कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा ने इस अवसर पर शहरवासियों को भव्य राम द्वार के निर्माण और नेहरू स्टेडियम के कायाकल्प की दो बड़ी सौगातें दीं।
HomeदेशPM Modi Vijayadashami Speech  प्रभु राम के आदर्श मानवता के इतिहास में...

PM Modi Vijayadashami Speech  प्रभु राम के आदर्श मानवता के इतिहास में अतुलनीय, विजयादशमी पर पीएम मोदी का बड़ा बयान

सत्य की जीत विजयादशमी पर प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम विशेष संदेश

नई दिल्ली:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विजयादशमी के शुभ अवसर पर समस्त देशवासियों को बधाई देते हुए राष्ट्र निर्माण का एक नया मार्ग प्रशस्त किया। दिल्ली के एक प्रमुख दशहरा उत्सव में सम्मिलित होकर उन्होंने जनता को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने देश के कोने-कोने से आए नागरिकों से अपील की कि वे इस पावन पर्व पर समवेत स्वर में ‘सियावर रामचंद्र की जय’ का नारा बुलंद करें। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि भगवान श्रीराम के जीवन मूल्य हमारी सभ्यता और राष्ट्रीय अस्मिता की असली पहचान हैं।

पुतले के दहन से आगे, चरित्र निर्माण पर ध्यान देने की आवश्यकता
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के प्रति जनमानस की गहरी आस्था का वास्तविक अर्थ समझाया। उन्होंने कहा कि श्रीराम के प्रति हमारा यह आदर केवल एक ऐतिहासिक युद्ध और रावण की पराजय तक सीमित नहीं है। यह अगाध श्रद्धा इसलिए अक्षुण्ण है क्योंकि प्रभु राम ने हमें वह मर्यादित जीवन शैली और अनुपम मूल्य दिए हैं, जिनकी तुलना संपूर्ण विश्व के इतिहास में कहीं और नहीं मिलती। उनका पूरा जीवन कर्तव्यनिष्ठा, न्यायप्रियता और परम त्याग का एक अनुपम उदाहरण है।

सांस्कृतिक चेतना से होगा सशक्त राष्ट्र का उदय
प्रधानमंत्री ने आध्यात्मिक ऊर्जा को देश के विकास से जोड़ते हुए एक नया दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक भारत अब ‘देव से देश’ और ‘राम से राष्ट्र’ की पावन भावना को आत्मसात कर प्रगति पथ पर अग्रसर है। भगवान राम का व्यक्तित्व किसी एक वर्ग की आस्था का विषय नहीं, बल्कि वे पूरे देश की एकता, आपसी भाईचारे और आदर्श शासन व्यवस्था के सबसे बड़े प्रेरणास्रोत हैं। प्रत्येक नागरिक को अपने व्यक्तिगत हितों का परित्याग कर देश की भलाई को प्राथमिकता देनी होगी।

विभाजनकारी शक्तियों के विरुद्ध एकजुटता का आह्वान
देश के आंतरिक हालातों और सुरक्षा व्यवस्था पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने समाज में बिखराव पैदा करने वाली प्रवृत्तियों को लेकर आगाह किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में दशहरे की सार्थकता सिर्फ पुतला जलाने में नहीं है, बल्कि हमें उन ताकतों को समूल नष्ट करना होगा जो जाति, भाषा या क्षेत्र के नाम पर देश को बांटना चाहती हैं। जो तत्व देश की प्रतिष्ठा को धूमिल करते हैं या हमारी साझी विरासत पर आघात करते हैं, उनके मंसूबों को नाकाम करना हर देशभक्त का दायित्व है।

आने वाली सदियों के आत्मनिर्भर भारत का रोडमैप
भारत के स्वर्णिम भविष्य की रूपरेखा रखते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश अब अपनी आंतरिक शक्ति और युवाओं के सामर्थ्य पर भरोसा करना सीख चुका है। हमें किसी भी तरह की संकीर्ण मानसिकता को छोड़कर ज्ञान, विज्ञान और नवाचार (रिसर्च) के रास्ते पर चलना होगा। आज राष्ट्र की प्रगति के लिए जो भी कड़े और दूरगामी निर्णय लिए जा रहे हैं, वे आने वाले एक हजार वर्षों के एक वैभवशाली, समृद्ध और पूरी तरह आत्मनिर्भर भारत की नींव को मजबूत कर रहे हैं।

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