Tuesday, October 13, 2026

TOP NEWS

पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय...

इंदौर में पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय ने 500 गरबा आयोजकों को लव जिहाद के खिलाफ सुरक्षा कवच बनाने, भजनों पर गरबा करने और जल संरक्षण की शपथ दिलाई। पढ़ें पूरी खबर...

हरियाणा ने जनगणना 2027...

एफसीआर डॉ. सुमिता मिश्रा ने उपायुक्तों को छूटे हुए लोगों और दोहरी गणना...

Indore Jio-bp Petrol Diesel...

इंदौर में जियो-बीपी (Jio-bp) पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कीमतें अचानक बढ़ गई हैं। पेट्रोल ₹5 और डीजल ₹3 प्रति लीटर महंगा हो गया है। बिना किसी पूर्व सूचना के हुई इस बढ़ोतरी से ग्राहकों में भारी नाराजगी है। जानें पूरी खबर...

पावागढ़ से अखंड ज्योत...

पावागढ़ से अखंड ज्योत लेकर मांडू पहुंचे श्रद्धालुः300 KM का सफर किया पैदल,...
Homeमध्य प्रदेशबंगाल में अष्टमी पर शराबबंदी का फैसला सराहनीय, क्या MP और अन्य...

बंगाल में अष्टमी पर शराबबंदी का फैसला सराहनीय, क्या MP और अन्य राज्यों को भी इस पर विचार नहीं करना चाहिए?

गौरव जोशी

बंगाल में अष्टमी पर शराबबंदी का फैसला सराहनीय, क्या MP और अन्य राज्यों को भी इस पर विचार नहीं करना चाहिए?

(NTV TIME): पश्चिम बंगाल सरकार ने इस साल दुर्गा पूजा को लेकर एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। नए नियमों के मुताबिक, महाअष्टमी के पावन पर्व पर पूरे बंगाल में शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध (Dry Day) रहेगा। बंगाल जैसे राज्य में, जहाँ पहले कभी त्योहारों के दौरान ऐसी पाबंदी नहीं देखी गई, सरकार का यह कदम वाकई चौंकाने वाला और स्वागत योग्य है।

लेकिन बंगाल के इस फैसले को देखने के बाद एक बड़ा और गंभीर सवाल हमारे मन में भी आता है— क्या मध्य प्रदेश (MP) और देश के अन्य हिंदी भाषी राज्यों को भी इस दिशा में कदम नहीं उठाना चाहिए?

त्योहार की पवित्रता का सम्मान जरूरी
मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में नवरात्रि और दुर्गा पूजा का पर्व सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की अगाध आस्था का केंद्र है। महाअष्टमी के दिन लगभग हर घर में व्रत रखे जाते हैं, कन्या पूजन होता है और पंडालों में मां शक्ति की विशेष आराधना की जाती है। जब पूरा माहौल इतना सात्विक और पवित्र होता है, तो ऐसे में शराब की दुकानों का खुला रहना कहीं न कहीं इस पावन माहौल की गरिमा को कम करता है। क्या हमारी सरकारों को केवल 26 जनवरी या 15 अगस्त जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर ही ड्राई डे रखने तक सीमित रहना चाहिए? करोड़ों नागरिकों की धार्मिक भावनाओं से जुड़े इस महापर्व पर एक दिन की शराबबंदी क्यों नहीं हो सकती?

सुरक्षा और हुड़दंग से मुक्ति का रास्ता
धार्मिक आस्था से अलग, अगर हम सामाजिक सुरक्षा के नजरिए से भी देखें, तो त्योहारों के दौरान शराबबंदी के बड़े फायदे हो सकते हैं। अक्सर देखा जाता है कि देर रात तक चलने वाले गरबा कार्यक्रमों और दुर्गा पंडालों के आसपास कुछ असामाजिक तत्व शराब के नशे में हुड़दंग मचाते हैं। इससे न केवल पारिवारिक माहौल खराब होता है, बल्कि कानून-व्यवस्था के लिए भी चुनौती खड़ी होती है। देर रात सुरक्षित घर लौटती महिलाओं और युवतियों की सुरक्षा के लिहाज से भी यदि महाअष्टमी के दिन शराब की दुकानें पूरी तरह बंद रखी जाएं, तो हुड़दंगियों पर अपने आप लगाम लग जाएगी।

राजस्व का नुकसान या जनभावनाओं का सम्मान?
जाहिर है कि सरकारों के सामने सबसे बड़ा तर्क ‘राजस्व’ (Revenue) का आता है। त्योहारों के सीजन में शराब से मिलने वाला टैक्स सरकारी खजाने को मजबूत करता है। लेकिन जब पश्चिम बंगाल जैसा राज्य अपने राजस्व के नुकसान को पीछे छोड़कर जनभावनाओं और त्योहार की मर्यादा को सर्वोपरि रख सकता है, तो मध्य प्रदेश जैसे राज्य के लिए यह असंभव क्यों होना चाहिए? मध्य प्रदेश की संस्कृति हमेशा से ही मर्यादा और संस्कारों की रही है, ऐसे में यहाँ इस तरह के फैसले को लागू करना और भी आसान होना चाहिए।

यह लेख किसी राजनीतिक विरोध या किसी आंदोलन का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह एक सीधा और सरल वैचारिक सवाल है। एक सजग मीडिया प्लेटफॉर्म के नाते हमारा मानना है कि बदलाव की शुरुआत हमेशा एक सही सवाल से होती है।

NTV TIME के पाठकों से सवाल:
आप इस बारे में क्या सोचते हैं? क्या आपको लगता है कि मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में भी महाअष्टमी के दिन शराबबंदी का यह नियम लागू होना चाहिए? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में लिखकर हमसे जरूर साझा करें।


RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments