निठारी कांड: सुरेंद्र कोली की संदिग्ध मौत, कभी फांसी के फंदे से बचा ‘जल्लाद’ हरिद्वार की चाय दुकान में मृत मिला
हरिद्वार/नई दिल्ली:
देश को दहला देने वाले निठारी सीरियल किलिंग (2006) के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली की कहानी का आज शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को एक बेहद नाटकीय और संदिग्ध अंत हो गया। पिछले साल ही सबूतों के अभाव में इलाहाबाद हाई कोर्ट से बरी हुए सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में एक चाय के खोखे (दुकान) में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
सुबह करीब 11:30 बजे जब स्थानीय लोगों ने उसका शव लटकता देखा, तो पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस को शव के पास से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, लेकिन शुरुआती जांच इसे आत्महत्या का मामला मान रही है।
क्या था निठारी कांड जिसने देश को हिला दिया था?
दिसंबर 2006 में दिल्ली से सटे नोएडा के निठारी गांव में मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी (D-5) के पीछे के गटर और नाले से बच्चों और महिलाओं के नरकंकाल मिले थे। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।
- कोठी के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया गया था।
- कोली पर बच्चों को बहला-फुसलाकर कोठी के अंदर ले जाने, उनके साथ बर्बरता करने, हत्या करने और शवों के टुकड़े कर नाले में फेंकने के आरोप थे।
- सीबीआई जांच में कोली के खिलाफ हत्या, बलात्कार और सबूत मिटाने के दर्जनों मामले दर्ज किए गए थे।
निचली अदालत से मौत की सजा और फिर हाई कोर्ट से बरी
सुरेंद्र कोली को गाजियाबाद की विशेष सीबीआई अदालत ने कई मामलों में दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। उसकी दया याचिका भी राष्ट्रपति द्वारा खारिज कर दी गई थी और उसकी फांसी की तारीख तक तय हो चुकी थी।
लेकिन कानून की लंबी लड़ाई में एक बड़ा मोड़ आया। अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जांच में गंभीर कमियों और पुख्ता सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर दोनों को बरी कर दिया। अदालत ने टिप्पणी की थी कि जांच एजेंसियों ने लापरवाही बरती और केवल आरोपी के इकबालिया बयान के भरोसे केस चलाया, जबकि ठोस वैज्ञानिक सबूत पेश नहीं किए जा सके।
जेल से रिहाई के बाद गुमनामी की जिंदगी
अदालत से बरी होने के बाद सुरेंद्र कोली समाज की नजरों से छिपकर रहने लगा था। वह पिछले कुछ महीनों से हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में अपनी पहचान छिपाकर एक चाय की दुकान पर काम कर रहा था। स्थानीय निवासियों के अनुसार, वह बेहद शांत रहता था और किसी से ज्यादा बात नहीं करता था।
आज सुबह जब वह काफी देर तक बाहर नहीं आया, तो दुकान के मालिक ने अंदर जाकर देखा, जहाँ उसका शव फंदे से लटका हुआ था। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या वह किसी मानसिक तनाव में था या उसकी मौत के पीछे कोई और वजह है। इस संदिग्ध अंत के साथ ही भारतीय अपराध इतिहास के सबसे खौफनाक अध्यायों में से एक का अंत हो गया है।


